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गांव ककरावली में अव्यवस्थाएं, नहीं हुआ विकास
ब्यूरो, एटा अमर उजाला
Updated Wed, 22 Jul 2015 11:44 PM IST
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मंडलायुक्त अलीगढ़ गुरुवार को एटा आ रहे हैं। इस दौरान वो जिले के किसी एक लोहिया गांव का औचक निरीक्षण करेंगे। हालांकि विकास खंड शीतलपुर के गांव ककरावली वर्ष 2013-14 में लोहिया गांव घोषित हुआ था लेकिन विकास के लिए अभी तक इंतजार है। ग्रामीणों की आस है इस गांव का निरीक्षण कर मंडलायुक्त व्यवस्थाओं का सच जान लें। बुधवार को कलक्ट्रेट से लेकर विकास भवन तक मंडलायुक्त के दौरे को लेकर तैयारियां चलती रहीं।
ग्राम पंचायत ककरावली निवासी वेदराम, शीलेंद्र कुमार, बवलू, ओमवीर, अजय, राजू, ओमप्रकाश, जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके गांव की आबादी 2500 के आसपास है, जिसमें मतदाताओं की संख्या 17-1800 के बीच है। उन्होंने बताया कि उनके गांव का चयन वर्ष 2013-14 में लोहिया गांव के रूप में हुआ। चयन के बाद लोगों की विकास को लेकर उम्मीद भी बढ़ी थी, लेकिन समय रहते विकास कार्य न होने पर लोगों को निराशा ही हाथ लगी है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आज भी अव्यवस्थाओं को अंबार है।
गांव में नाम मात्र को एक गली पक्की हुई है। पूरे गांव में पर्याप्त बिजली के पोल नहीं है, जिसके चलते लोग आज भी लंबी केबलों के सहारे अपने घरों को रोशन कर रहे हैं। ग्राम पंचायत से दूसरे मजरों को जाने के लिए पक्का रास्ता नहीं है। इसके चलते रास्तों में पानी भरा रहता है। शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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कमिश्नर को लेकर कार्यालयों में हुई तैयारियां
मंडलायुक्त को लेकर कार्यालयों में कर्मचारी व्यस्त दिखे। अब तक हुए विकास कार्यों की बुकलेट और जिले के लोहिया गांवों में चल रहे विकास कार्यों को दुरुस्त करने में लगे रहे। कार्यालयों के निरीक्षण के डर से फाइलों को दुरुस्त किया जा रहा था।
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ग्राम पंचायत ककरावली निवासी वेदराम, शीलेंद्र कुमार, बवलू, ओमवीर, अजय, राजू, ओमप्रकाश, जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके गांव की आबादी 2500 के आसपास है, जिसमें मतदाताओं की संख्या 17-1800 के बीच है। उन्होंने बताया कि उनके गांव का चयन वर्ष 2013-14 में लोहिया गांव के रूप में हुआ। चयन के बाद लोगों की विकास को लेकर उम्मीद भी बढ़ी थी, लेकिन समय रहते विकास कार्य न होने पर लोगों को निराशा ही हाथ लगी है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आज भी अव्यवस्थाओं को अंबार है।
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गांव में नाम मात्र को एक गली पक्की हुई है। पूरे गांव में पर्याप्त बिजली के पोल नहीं है, जिसके चलते लोग आज भी लंबी केबलों के सहारे अपने घरों को रोशन कर रहे हैं। ग्राम पंचायत से दूसरे मजरों को जाने के लिए पक्का रास्ता नहीं है। इसके चलते रास्तों में पानी भरा रहता है। शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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कमिश्नर को लेकर कार्यालयों में हुई तैयारियां
मंडलायुक्त को लेकर कार्यालयों में कर्मचारी व्यस्त दिखे। अब तक हुए विकास कार्यों की बुकलेट और जिले के लोहिया गांवों में चल रहे विकास कार्यों को दुरुस्त करने में लगे रहे। कार्यालयों के निरीक्षण के डर से फाइलों को दुरुस्त किया जा रहा था।