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Etah News: अपंजीकृत अस्पताल जान के दुश्मन, पिछले महीने गई छह की जान
Wed, 06 Sep 2023 11:12 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 06 Sep 2023 11:12 PM IST
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एटा। जिले में शहर से लेकर देहात तक अपंजीकृत क्लीनिक व नर्सिंग होम चल रहे हैं। जहां आए दिन किसी न किसी मरीज की मौत हो रही है। इलाज के नाम पर ये मरीजों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। अगस्त में छह मरीजों की जान इलाज के दौरान जा चुकी है।
किसी भी रोड पर चले जाओ यहां अपंजीकृत नर्सिंग होम व क्लीनिक खुले मिल जाएंगे। आलम यह है कि फार्मासिस्टों के बाद अब मेडिकल संचालक भी इलाज करने लगे हैं। दुकान के बाहर ड्रिप लगाकर शहर में इलाज करते देखे जा सकते हैं। यह लोग बेखौफ होकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन जानकर भी अनजान बने हुए हैं। अधिकांश मामलों में नोटिस की औपचारिकता कर टीमें लौट आती हैं। कुछ नर्सिंग होम व क्लीनिक संचालक ऐसे हैं जो नोटिस का जवाब तक नहीं देते हैं। वहीं सील होने पर नाम बदलकर दूसरे स्थान पर क्लीनिक व नर्सिंग होम खोल लेते हैं।
ग्रामीणों क्षेत्र में बुरा हाल
ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो वहां का हाल ही बुरा है। क्लीनिकों पर मरीजों की खासी भीड़ देखने को मिलती है। यह लोग प्लेटलेट्स कम होने पर मरीज को डेंगू बताकर उनका इलाज शुरू करते हैं। इस दौरान अधिक क्षमता वाली एंटीबायटिक सहित स्टेरॉयड दवाओं का प्रयोग करते हैं। जो मरीजों के लिए खतरनाक साबित होती हैं।
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किसी भी रोड पर चले जाओ यहां अपंजीकृत नर्सिंग होम व क्लीनिक खुले मिल जाएंगे। आलम यह है कि फार्मासिस्टों के बाद अब मेडिकल संचालक भी इलाज करने लगे हैं। दुकान के बाहर ड्रिप लगाकर शहर में इलाज करते देखे जा सकते हैं। यह लोग बेखौफ होकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन जानकर भी अनजान बने हुए हैं। अधिकांश मामलों में नोटिस की औपचारिकता कर टीमें लौट आती हैं। कुछ नर्सिंग होम व क्लीनिक संचालक ऐसे हैं जो नोटिस का जवाब तक नहीं देते हैं। वहीं सील होने पर नाम बदलकर दूसरे स्थान पर क्लीनिक व नर्सिंग होम खोल लेते हैं।
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ग्रामीणों क्षेत्र में बुरा हाल
ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो वहां का हाल ही बुरा है। क्लीनिकों पर मरीजों की खासी भीड़ देखने को मिलती है। यह लोग प्लेटलेट्स कम होने पर मरीज को डेंगू बताकर उनका इलाज शुरू करते हैं। इस दौरान अधिक क्षमता वाली एंटीबायटिक सहित स्टेरॉयड दवाओं का प्रयोग करते हैं। जो मरीजों के लिए खतरनाक साबित होती हैं।
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