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सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे हजारों वाहन
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शहर में स्कूली बच्चों को लेकर जाती अनफिट बस- अमर उजाला
- फोटो : ETAH
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एटा। परिवहन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी के कारण जिले की सड़कों पर हजारों अनफिट वाहन मौत बनकर दौड़ रहे हैं। हाईवे पर यह वाहन अक्सर हादसे का कारण बन रहे हैं। जिले में 2193 वाहन ऐसे हैं जो अनफिट हैं।
जिले के हाईवे पर आए दिन कोई न कोई सड़क हादसा हो जाता है। इसका सबसे प्रमुख कारण है सड़कों पर खटारा वाहनों का दौड़ना है। इनमें ट्रक, ट्रैक्टर से लेकर बसें भी शामिल है। इनता ही विभाग अनदेखी के कारण अनफिट स्कूली वाहन बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं। इन वाहनों पर न तो कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान है।
एक नजर में फिटनेस पास
परिवाहन निगम के पास टेक्नीकल जांच के लिए संसाधन नहीं है। यहां कार्यालय का कर्मचारी एक नजर में वाहन को देखकर फिटनेस प्रमाण पत्र दे देता है। एक माह में करीब दो सौ से अधिक फिटनेस के लिए आवेदन आते है। सभी वाहनों को देखना भी मुश्किल होता है। ऐसे में कुछ वाहनों को बिना देखे ही प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। यह सब खेल दलालों के माध्यम से खेला जाता है।
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कार्रवाई न होने से बेखौफ हैं चालक
सबसे बुरा हाल तो व्यवसायिक वाहनों का है। इनकी बॉडी जर्जर होती है, बैक लाइट, रिएक्टर, लाइट वाहनों में नदारद रहती है। इससे रात के समय हादसों की आशंका अधिक रहती है। यही हाल छोटे वाहनों का है। यह क्षमता से अधिक माल लेकर चलते है, चेंकिग के दौरान खानापूर्ति कर दी जाती है। वहीं फिटनेस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
यह हैं फिटनेस के नियम
परिवाहन निगम में दो तरह का फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। एक व्यवसायिक दूसरा निजी, नए व्यवसायिक वाहनों को दो साल का फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। इन्हें बाद में प्रत्येक साल फिटनेस प्रमाण पत्र लेना होता है। जबकि निजी वाहन सात सीटर व उससे अधिक के वाहनों को हर दो साल में प्रमाण पत्र लेना जरूरी होता है।
जिले में खटारा वाहनों के खिलाफ बराबर अभियान चलाया जा रहा है। स्कूली बसों को फिटनेस प्रमाण प्रत्र न लेने पर ब्लैक लिस्टेड भी किया गया है। दोबारा खटारा वाहनों के खिलाफ फिर अभियान चलाया जाएगा।
हेमचंद्र गौतम, एआरटीओ प्रशासन, एटा
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जिले के हाईवे पर आए दिन कोई न कोई सड़क हादसा हो जाता है। इसका सबसे प्रमुख कारण है सड़कों पर खटारा वाहनों का दौड़ना है। इनमें ट्रक, ट्रैक्टर से लेकर बसें भी शामिल है। इनता ही विभाग अनदेखी के कारण अनफिट स्कूली वाहन बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं। इन वाहनों पर न तो कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान है।
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एक नजर में फिटनेस पास
परिवाहन निगम के पास टेक्नीकल जांच के लिए संसाधन नहीं है। यहां कार्यालय का कर्मचारी एक नजर में वाहन को देखकर फिटनेस प्रमाण पत्र दे देता है। एक माह में करीब दो सौ से अधिक फिटनेस के लिए आवेदन आते है। सभी वाहनों को देखना भी मुश्किल होता है। ऐसे में कुछ वाहनों को बिना देखे ही प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। यह सब खेल दलालों के माध्यम से खेला जाता है।
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कार्रवाई न होने से बेखौफ हैं चालक
सबसे बुरा हाल तो व्यवसायिक वाहनों का है। इनकी बॉडी जर्जर होती है, बैक लाइट, रिएक्टर, लाइट वाहनों में नदारद रहती है। इससे रात के समय हादसों की आशंका अधिक रहती है। यही हाल छोटे वाहनों का है। यह क्षमता से अधिक माल लेकर चलते है, चेंकिग के दौरान खानापूर्ति कर दी जाती है। वहीं फिटनेस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
यह हैं फिटनेस के नियम
परिवाहन निगम में दो तरह का फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। एक व्यवसायिक दूसरा निजी, नए व्यवसायिक वाहनों को दो साल का फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। इन्हें बाद में प्रत्येक साल फिटनेस प्रमाण पत्र लेना होता है। जबकि निजी वाहन सात सीटर व उससे अधिक के वाहनों को हर दो साल में प्रमाण पत्र लेना जरूरी होता है।
जिले में खटारा वाहनों के खिलाफ बराबर अभियान चलाया जा रहा है। स्कूली बसों को फिटनेस प्रमाण प्रत्र न लेने पर ब्लैक लिस्टेड भी किया गया है। दोबारा खटारा वाहनों के खिलाफ फिर अभियान चलाया जाएगा।
हेमचंद्र गौतम, एआरटीओ प्रशासन, एटा