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पुलिस की किरकिरी बने आत्महत्या के दो मामले
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पोस्टमार्टम ग्रह पर रोते बिलखते मृतक अभिषेक के परिजन । फाइल फोटो-संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। साल 2021 में जिले के दो बड़े आत्महत्या के मामले पुलिस की किरकिरी बने रहे। किशोर अभिषेक चौहान ने तमंचे से गोली मारकर खुदकुशी की, पिता ने पुलिस पर गलत केस में जेल भेजने का आरोप लगाते हुए अवसाद में आने की बात कही। पुलिसकर्मियों पर रिपार्ट दर्ज हुई और निलंबित भी हुए। मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया। वहीं सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता की सुसाइड के बाद इसमें में भी एक पुलिसकर्मी का नाम आया।
साल का सबसे चर्चित और पुलिस के लिए असहजता का मामला बापूनगर निवासी अभिषेक आत्महत्या प्रकरण रहा। उसके पिता रवेंद्र के अनुुसार पिज्जा लेने जा रहे अभिषेक को पुलिस ने 9 मार्च को पकड़ा था। छोड़ने के लिए रुपये मांगे। न देने पर 12 मार्च को नशीला पदार्थ का झूठा मुकदमा लगाकर जेल भेज दिया। 25 जुलाई को वह जमानत पर छूटा। जिसके बाद बिना जुर्म के अपराधी बनाए जाने के अवसाद में रहने लगा। अंतत: 21 सितंबर को उसने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मामले में दो उपनिरीक्षक, एक मुख्य आरक्षी और एक आरक्षी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की रिपोर्ट दर्ज हुई। चारों को निलंबित कर दिया गया। वहीं मानवाधिकार आयोग की भी जांच चल रही है।
पटियाली गेट निवासी सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने 30 मई को फंदा लगाकर आत्महत्या की थी। इसमें उनके पुत्र की पत्नी व साले के अलावा फर्रुखाबाद के मऊ थानांतर्गत उपनिरीक्षक को उकसाने के आरोप लगाकर नामजद किया गया। वीरेंद्र के पुत्र प्रदीप ने आरोप लगाया था कि वीरेंद्र गुप्ता के विरुद्ध जानलेवा हत्या का एक मामला थाना मऊ में दर्ज कराया गया था। विवेचक ने दो लाख रुपये लेने के बावजूद चार्जशीट लगा दी। रुपये वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी दी। जिससे वीरेंद्र मानसिक रूप से परेशान रहने लगे।
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साल का सबसे चर्चित और पुलिस के लिए असहजता का मामला बापूनगर निवासी अभिषेक आत्महत्या प्रकरण रहा। उसके पिता रवेंद्र के अनुुसार पिज्जा लेने जा रहे अभिषेक को पुलिस ने 9 मार्च को पकड़ा था। छोड़ने के लिए रुपये मांगे। न देने पर 12 मार्च को नशीला पदार्थ का झूठा मुकदमा लगाकर जेल भेज दिया। 25 जुलाई को वह जमानत पर छूटा। जिसके बाद बिना जुर्म के अपराधी बनाए जाने के अवसाद में रहने लगा। अंतत: 21 सितंबर को उसने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मामले में दो उपनिरीक्षक, एक मुख्य आरक्षी और एक आरक्षी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की रिपोर्ट दर्ज हुई। चारों को निलंबित कर दिया गया। वहीं मानवाधिकार आयोग की भी जांच चल रही है।
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पटियाली गेट निवासी सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने 30 मई को फंदा लगाकर आत्महत्या की थी। इसमें उनके पुत्र की पत्नी व साले के अलावा फर्रुखाबाद के मऊ थानांतर्गत उपनिरीक्षक को उकसाने के आरोप लगाकर नामजद किया गया। वीरेंद्र के पुत्र प्रदीप ने आरोप लगाया था कि वीरेंद्र गुप्ता के विरुद्ध जानलेवा हत्या का एक मामला थाना मऊ में दर्ज कराया गया था। विवेचक ने दो लाख रुपये लेने के बावजूद चार्जशीट लगा दी। रुपये वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी दी। जिससे वीरेंद्र मानसिक रूप से परेशान रहने लगे।
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