ठाकुर जी पांच गीतों को भाव से गाने वाला भव पार हो जाता है-आचार्य
सार
श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को छठे दिन आचार्य ऋषिराज चतुर्वेदी ने कहा कि महारास मे पांच अध्याय हैं उनमें गाए जाने वाले पंचगीत भागवत के पांच प्राण हैं। रुक्मणि के भाई ने उनका विवाह अधर्मी राजकुमार शिशुपाल से सुनिश्चित किया था लेकिन रुक्मणिजी ने मन ही मन द्वारिकाधीश भगवान कृष्ण को अपना पति बनाने का संकल्प लिया था उनके इस संकल्प को नंदलाल कृष्ण ने रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह करके उन्हे अपनी भार्या के रूप मैं वरण करके प्रधान पटरानी का स्थान दिया। नीरेंद्र वार्ष्णेय, विवेक वार्ष्णेय बंटी, रेखा वार्ष्णेय, प्रेमचंद्र, धर्मेंद्र गुप्ता, राजा चौहान, शिव गुप्ता, राम किशन, ओमप्रकाश यादव मौजूद रहे।
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अवागढ़ में भागवत सुनते श्रद्धालु ।
- फोटो : ETAH