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ठाकुर जी पांच गीतों को भाव से गाने वाला भव पार हो जाता है-आचार्य

Fri, 16 Sep 2022 11:22 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 16 Sep 2022 11:22 PM IST
सार

श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को छठे दिन आचार्य ऋषिराज चतुर्वेदी ने कहा कि महारास मे पांच अध्याय हैं उनमें गाए जाने वाले पंचगीत भागवत के पांच प्राण हैं। रुक्मणि के भाई ने उनका विवाह अधर्मी राजकुमार शिशुपाल से सुनिश्चित किया था लेकिन रुक्मणिजी ने मन ही मन द्वारिकाधीश भगवान कृष्ण को अपना पति बनाने का संकल्प लिया था उनके इस संकल्प को नंदलाल कृष्ण ने रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह करके उन्हे अपनी भार्या के रूप मैं वरण करके प्रधान पटरानी का स्थान दिया। नीरेंद्र वार्ष्णेय, विवेक वार्ष्णेय बंटी, रेखा वार्ष्णेय, प्रेमचंद्र, धर्मेंद्र गुप्ता, राजा चौहान, शिव गुप्ता, राम किशन, ओमप्रकाश यादव मौजूद रहे।

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Thakur ji, the one who sings five songs with emotion, the bhava is transcended - Acharya
अवागढ़ में भागवत सुनते श्रद्धालु । - फोटो : ETAH

विस्तार

अवागढ़। श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को छठे दिन आचार्य ऋषिराज चतुर्वेदी ने कहा कि महारास मे पांच अध्याय हैं उनमें गाए जाने वाले पंचगीत भागवत के पांच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। इस दौरान रुक्मणि विवाह प्रसंग सुन भक्त भावभिवोर हो गए।
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आचार्य ने रुक्मणि विवाह पर बोलते हुए आचार्य ने कहा कि जो भी भक्त रुक्मणि विवाह के उत्सव में शामिल होते है उनके जीवन में कभी भी वैवाहिक समस्या नहीं होती। रुक्मणि के भाई ने उनका विवाह अधर्मी राजकुमार शिशुपाल से सुनिश्चित किया था लेकिन रुक्मणिजी ने मन ही मन द्वारिकाधीश भगवान कृष्ण को अपना पति बनाने का संकल्प लिया था उनके इस संकल्प को नंदलाल कृष्ण ने रुक्मणि का हरण कर उनसे विवाह करके उन्हे अपनी भार्या के रूप मैं वरण करके प्रधान पटरानी का स्थान दिया।
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इसके साथ ही दिव्य महारास लीला, मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि संदीपनी आश्रम में विद्या अध्ययन, कलियावन का वध, उद्धव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारिकापुरी की स्थापना के बाद रुक्मणि विवाह के प्रसंग की कथा सुनाई गई। नीरेंद्र वार्ष्णेय, विवेक वार्ष्णेय बंटी, रेखा वार्ष्णेय, प्रेमचंद्र, धर्मेंद्र गुप्ता, राजा चौहान, शिव गुप्ता, राम किशन, ओमप्रकाश यादव मौजूद रहे।
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