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देर शाम घर लाया गया घनश्याम का शव, परिजनों ने किया अंतिम संस्कार

Tue, 28 Apr 2020 09:30 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 28 Apr 2020 09:30 PM IST
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suicide
गांव अमर गोजिया स्थित आवास पर गमगीन बैठे पुलिसकर्मी के परिजन। संवाद - फोटो : ETAH
एटा। थाना देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव अमर गोजिया निवासी घनश्याम मथुरा में थाना हाईवे में कांस्टेबल थे। सोमवार की देर रात को उन्होंने अपनी बैरक में स्वयं को गोली मार ली। वहां पर तैनात पुलिसकर्मी उन्हें लहूलुहान स्थिति में अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मंगलवार देर शाम को सिपाही का शव पैतृक गांव लाया गया, जहां परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया।
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पुलिस के अनुसार बैरक में सोमवार की रात सब कुछ ठीक चल रहा था। इसी बीच गोली चलने की आवाज सुनाई दी। इस पर पुलिसकर्मी बैरक की ओर दौड़ पड़े। उन्होंने मौके पर देखा कि घनश्याम अपनी बैरक में लहूलुहान अवस्था में पड़ा हुआ है। उन्होंने उसे तुरंत उठाया और अस्पताल की ओर लेकर चल दिए, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
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देर रात सिपाही की मौत की खबर परिजनों को मिली तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मंगलवार को देर शाम सिपाही के शव को उसके गांव अमर गोजिया लाया गया, जहां उसके ने अंतिम संस्कार किया।
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चार भाइयों में सबसे छोटे थे घनश्याम
सिपाही घनश्याम चार भाई थे। सबसे बड़े भाई रामगोपाल गांव में ही खेती करते हैं। उनसे छोटे किशनवीर थे, जिनकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है। तीसरे नंबर पर सुखवीर थे, जो आर्मी से
रिटायर्ड हैं। माता-पिता की कई साल पहले मौत हो चुकी है।
तीनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
घनश्याम के तीन बेटे हैं। सबसे बड़ा बेटा राहुल 12वीं कक्षा पास हो चुका है। उसके बाद बेटी रश्मि 8वीं कक्षा में पढ़ती है। सबसे छोटा बेटा अंशुल 10 साल का है। वह चौथी कक्षा में पढ़ता है।
पत्नी से सोमवार की रात दस बजे हुई थी बात
घनश्याम की पत्नी सुमन से सोमवार की रात को करीब दस बजे बात हुई थी। इस दौरान घनश्याम ने उससे हंसी खुशी बात की। इस दौरान उसके मन में किसी प्रकार का गुस्सा नहीं था। फोन पर सभी बच्चों का हाल चाल भी पूछे। फोन कटने के आधे घंटे बाद ही घनश्याम के मौत की खबर आ गई, जिससे पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है।
सीबीआई जांच की मांग उठाई
घनश्याम के भांजे अशोक यादव ने कहा कि मामा कभी आत्महत्या नहीं कर सकते हैं। उनकी हत्या की गई है। इसके पीछे किसी ने षड्यंत्र रचा है। वहीं, चचेरे भाई विनय ने भी हत्या करने का आरोप लगाया है।

14 साल मथुरा में की नौकरी
सिपाही घनश्याम पुलिस में साल 1998 में भर्ती हुए थे। इसके बाद से सबसे ज्यादा लगभग 14 साल तक मथुरा में नौकरी की। उससे पहले मुरादाबाद और बिछवां (मैनपुरी) में भी नौकरी कर चुके हैं।

पुलिसकर्मी घनश्याम का फाइल फोटो। संवाद

पुलिसकर्मी घनश्याम का फाइल फोटो। संवाद- फोटो : ETAH

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