{"_id":"612e1e488ebc3e7a004ec8ea","slug":"strange-fee-demanded-twice-on-the-same-application-etah-news-agr505747510","type":"story","status":"publish","title_hn":"अजब: एक ही आवेदन पर मांग लिया दो बार शुल्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अजब: एक ही आवेदन पर मांग लिया दो बार शुल्क
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अधिकारी सहज सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराना चाहते। एक मामले में तो सिंचाई विभाग ने एक ही आवेदन पर दो बार शुल्क मांग लिया। पहली बार में पांच हजार रुपये जमा करने को कहा गया। बाद में 10 हजार रुपये की मांग की गई है। मामला रजबहों के निर्माण कार्यों से जुड़ा हुआ है।
शहर के बनगांव रोड निवासी रवीश कुमार ने 15 मई को सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता के नाम सूचना का अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत किया। जिसमें उन्होंने 2018-19 से रजबहा अनुभाग गढ़ी, छछैना, सकीट, बंदी, कुरावली आदि सिल्ट सफाई को छोड़कर आदेश या अनुबंध के जरिए कराए गए कार्य, निर्माण आदि का विवरण मांगा। लंबे समय तक विभाग सूचना को टालता रहा। 21 जून को विभाग की ओर से पत्र भेजकर बताया गया कि तीन-चार साल के अभिलेखों की छायाप्रति के लिए पांच हजार रुपये जमा कराएं। यह भी कहा गया कि खर्च कम होने पर शेष धनराशि वापस कर दी जाएगी।
रवीश ने रुपयों की मांग गलत बताते हुए इसकी अपील कर दी। हालांकि वहां से तो कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन इस बीच अधिशासी अभियंता ने फिर एक पत्र भेजकर सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए 10 हजार रुपये जमा करने की मांग कर दी। रवीश का कहना है कि एक ही आवेदन और समान सूचनाओं के लिए अलग-अलग शुल्क मांगना ही संदेहास्पद है। अपील के बाद 45 दिन के समय का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद मामले को राज्य सूचना आयोग में ले जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर के बनगांव रोड निवासी रवीश कुमार ने 15 मई को सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता के नाम सूचना का अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत किया। जिसमें उन्होंने 2018-19 से रजबहा अनुभाग गढ़ी, छछैना, सकीट, बंदी, कुरावली आदि सिल्ट सफाई को छोड़कर आदेश या अनुबंध के जरिए कराए गए कार्य, निर्माण आदि का विवरण मांगा। लंबे समय तक विभाग सूचना को टालता रहा। 21 जून को विभाग की ओर से पत्र भेजकर बताया गया कि तीन-चार साल के अभिलेखों की छायाप्रति के लिए पांच हजार रुपये जमा कराएं। यह भी कहा गया कि खर्च कम होने पर शेष धनराशि वापस कर दी जाएगी।
विज्ञापन
रवीश ने रुपयों की मांग गलत बताते हुए इसकी अपील कर दी। हालांकि वहां से तो कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन इस बीच अधिशासी अभियंता ने फिर एक पत्र भेजकर सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए 10 हजार रुपये जमा करने की मांग कर दी। रवीश का कहना है कि एक ही आवेदन और समान सूचनाओं के लिए अलग-अलग शुल्क मांगना ही संदेहास्पद है। अपील के बाद 45 दिन के समय का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद मामले को राज्य सूचना आयोग में ले जाएंगे।
विज्ञापन