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अभी भी लाडले के लौटने का इंतजार

Sun, 22 Jan 2017 12:15 AM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Sun, 22 Jan 2017 12:15 AM IST
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Still awaiting the return of beloved
मासूमों की मौत पर गमगीन मह‌िलाएं - फोटो : Amar Ujala
लापरवाही, नासमझी और मनमानी ने उनकी खुशियों को खाक कर दिया। घर का चिराग बुझ गया, तो बहनों के विश्वास और प्यार की डोर कलाई को तरस गई। बार-बार हादसे की भयावह तस्वीरें उनके दर्द को ताजा कर देती हैं, आंसू सूख चुके हैं। बेटे की याद में मां अब रोती नहीं, बस चुपचाप बैठी है और लाडले के लौटने के इंतजार में दरवाजे निहार रही है। जी हां कुछ यही दर्द है उन परिवारों का है जिन्होेंने गुरुवार स्कूल बस हादसे में अपने कलेजे के टुकड़ों को खो दिया। गांव नगला गजपत में सांत्वना देने पहुंच रहे लोग मासूमों के परिजनों को होनी की दुहाई देकर दुख को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सच में परिजन अपने प्यारे को खोने का दुख ताउम्र नहीं भूल पाएंगे।
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गांव नगला गजपत निवासी मुकेश के 13 साल के बेटे पंकज को हादसे ने छीन लिया। मुकेश के परिवार में दो बेटियों के साथ पंकज अकेला और सबसे बड़ा भाई था। परिवार को उम्मीद थी कि वो पढ़-लिखकर अपनी बहनों और परिवार को संभालेगा, लेकिन हादसे ने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। मुकेश की आठ साल की बेटी अंजली भी हादसे में घायल हो गई। दूसरी बेटी नीतू बार-बार भाई को याद कर रो पड़ती है।
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मुकेश ने बताया कि तीनों बच्चे जेएस विद्या निकेतन में पढ़ते हैं। हादसे वाले दिन अंजली और पंकज ही स्कूल गए थे। नीतू घर पर रह गई थी। अगर पता होता कि छुट्टी है, तो उनको भी स्कूल नहीं भेजते। मुकेश की पत्नी रेखा बार-बार बेटे को याद करके बेहोश हो जाती है। परिवार के लोग रेखा को संभालते हैं, लेकिन वो होश में आकर दरवाजे की ओर देखती है और गुमसुम हो जाती है।
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मुकेश का कहना है कि घर का इकलौता बेटा था। अब दोनों बेटियां किसे राखी बांधेगी? दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मुकेश बार-बार प्रशासन और स्कूल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, लेकिन हालात के आगे वो भी हार मान जाते हैं। गांव नगला गजपत के ही सुधीर का छह साल का बेटा हैप्पी हादसे में घायल हुआ। उसका इलाज सैफई में चल रहा है। परिजन लाडले की सलामती को प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं गांव के बलवीर के बच्चे अमन, पूनम और नेहा घायल हुए। बलवीर की पत्नी ममता कुमारी कहती हैं कि मालूम होता कि ऐसा होगा, तो बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। गांव के बच्चों की मौत और घायल होने के बाद नगला गजपत में सन्नाटा है।
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