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राजकीय प्रदर्शनी में कवि सम्मेलन
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sun, 17 Jan 2016 10:48 PM IST
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नुमाइश में रविवार रात अखिल भारतीय कवित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक राकेश कुमार सिंह कंच रहे।
हाथरस से आई मीरा दीक्षित ने अपनी कविता रात सपने तेरे खूब आते रहे, रात भर नींद में भी सताते रहे, जाग-जाग कर रात भर प्यार से ही तेरा नाम लिखते और मिटाते रहे सुनाया। ग्वालियर से आई मीना शर्मा ने बांसुरी की धुन पर राधे-राधे बोल कर, मोहन किशोरी के गीत गाया करते, जब याद आती राधे की तो बंासुरी की तान पर उनको बुलाया करते, आगरा से आई यशोधरा यादव ने महकती हुई जिंदगी हैं बेटियां और बहती हुई एक नदी हैं बेटियां, हौसला जो मिले आसमां,चूम लें अप्सरा लोक की परी हैं बेटियां, इलाहाबाद से आई कवियत्री डा. आभा श्रीवास्तव ने झूठ के चेहरे से पर्दा हटाने आई हूं, आज मैं सच को भी दर्पण दिखाने आई हूॅं, हर अंधेरे को चुनौती है आज आभा की, मै अंधेरे का हर एक सच बताने आई हूॅं सुनाकर समां बाध दिया। मध्यप्रदेश से आई अरुणा चौहान ने वैसे फर्क पड़ता नहीं कोई झपड़ी या दुर्ग होने से, घर को मंदिर का दर्ज मिलता है घर में कोई बुजुर्ग होने से सुनकार महफिल मे खूब तालियंा बटोरीं। मथुरा से आई प्रिया शर्मा की कविता आंखों की किस्मत में हंसी मंजर नहीं होता...सुनाया। लखनऊ से आई डा. मंजू प्रिय ने हूॅं वतन परस्त मैं ही इन्कलाब हॅूं, खामोश रह के मुझसे जिया जाएगा नहीं सुनाई। एटा के शैली एडवोकट की कविता आप जिनके करीब होते, बड़े खुश नसीब होते हैं ने तालियां बटोरीं। सम्मेलन का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश केके शर्मा ने किया। अध्यक्षता शासकीय अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ की मधुलिया यादव और संचालन सतीश मधुक ने किया। शैलेश सक्सेना एडवोकेट, अनिल चतुर्वेदी, कालेंद्र सिंह समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
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हाथरस से आई मीरा दीक्षित ने अपनी कविता रात सपने तेरे खूब आते रहे, रात भर नींद में भी सताते रहे, जाग-जाग कर रात भर प्यार से ही तेरा नाम लिखते और मिटाते रहे सुनाया। ग्वालियर से आई मीना शर्मा ने बांसुरी की धुन पर राधे-राधे बोल कर, मोहन किशोरी के गीत गाया करते, जब याद आती राधे की तो बंासुरी की तान पर उनको बुलाया करते, आगरा से आई यशोधरा यादव ने महकती हुई जिंदगी हैं बेटियां और बहती हुई एक नदी हैं बेटियां, हौसला जो मिले आसमां,चूम लें अप्सरा लोक की परी हैं बेटियां, इलाहाबाद से आई कवियत्री डा. आभा श्रीवास्तव ने झूठ के चेहरे से पर्दा हटाने आई हूं, आज मैं सच को भी दर्पण दिखाने आई हूॅं, हर अंधेरे को चुनौती है आज आभा की, मै अंधेरे का हर एक सच बताने आई हूॅं सुनाकर समां बाध दिया। मध्यप्रदेश से आई अरुणा चौहान ने वैसे फर्क पड़ता नहीं कोई झपड़ी या दुर्ग होने से, घर को मंदिर का दर्ज मिलता है घर में कोई बुजुर्ग होने से सुनकार महफिल मे खूब तालियंा बटोरीं। मथुरा से आई प्रिया शर्मा की कविता आंखों की किस्मत में हंसी मंजर नहीं होता...सुनाया। लखनऊ से आई डा. मंजू प्रिय ने हूॅं वतन परस्त मैं ही इन्कलाब हॅूं, खामोश रह के मुझसे जिया जाएगा नहीं सुनाई। एटा के शैली एडवोकट की कविता आप जिनके करीब होते, बड़े खुश नसीब होते हैं ने तालियां बटोरीं। सम्मेलन का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश केके शर्मा ने किया। अध्यक्षता शासकीय अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ की मधुलिया यादव और संचालन सतीश मधुक ने किया। शैलेश सक्सेना एडवोकेट, अनिल चतुर्वेदी, कालेंद्र सिंह समेत अनेक लोग मौजूद रहे।