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शंकराचार्य एक महान दार्शनिक एवं धर्म प्रवर्तक थे-नीरज
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एटा। सरस्वती विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सभागार में शंकराचार्य जयंती शुक्रवार को मनाई गई। मुख्य वक्ता नवीन नीरज शर्मा ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य एक महान दार्शनिक एवं धर्म प्रवर्तक थे। उन्होंने भगवत गीता उपनिषदों और वेदांत सूत्रों का प्रतिपादन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सत्यशील मिश्रा ने कहा कि शंकराचार्य सात वर्ष की आयु में ही घर सन्यासी हो गए। दो हजार किमी की यात्रा करने के बाद इन्हें गुरु के रुप में श्री गोविंद भागवतपाद मिले।
घूम-घूम कर सनातन हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार करने लगे। इनके विशेष कार्य और सनातन धर्म के उत्थान के लिए इन्हें आज भी पूरे भारतवर्ष में याद किया जाता है। प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार वर्मा, उप प्रधानाचार्य प्रेमचंद्र, रमन प्रताप सिंह, डॉ. अरुण राजौरिया, आश्चर्य वार्ष्णेय, श्याम सुंदर शुक्ला, दयाशंकर पचौरी, पंकज मलिक, सुनीता जैन मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सत्यशील मिश्रा ने कहा कि शंकराचार्य सात वर्ष की आयु में ही घर सन्यासी हो गए। दो हजार किमी की यात्रा करने के बाद इन्हें गुरु के रुप में श्री गोविंद भागवतपाद मिले।
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घूम-घूम कर सनातन हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार करने लगे। इनके विशेष कार्य और सनातन धर्म के उत्थान के लिए इन्हें आज भी पूरे भारतवर्ष में याद किया जाता है। प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार वर्मा, उप प्रधानाचार्य प्रेमचंद्र, रमन प्रताप सिंह, डॉ. अरुण राजौरिया, आश्चर्य वार्ष्णेय, श्याम सुंदर शुक्ला, दयाशंकर पचौरी, पंकज मलिक, सुनीता जैन मौजूद रहे।
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