{"_id":"57bc8f314f1c1bcc59d4f967","slug":"shaheed-sipaahee-manoj-ka-paarthiv-shareer-dekh-har-aankh-nam","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहीद सिपाही मनोज का पार्थिव शरीर देख हर आंख नम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहीद सिपाही मनोज का पार्थिव शरीर देख हर आंख नम
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Tue, 23 Aug 2016 11:49 PM IST
विज्ञापन
पार्थिव शरीर देख हर आंख नम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुलंदशहर पुलिस लाइन में सोमवार देर रात हुई गोलीबारी में शहीद सिपाही जैथरा थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव निवासी मनोज यादव का शव मंगलवार शाम गांव पहुंचा तो परिवारीजनों को रोता-बिलखता देख हर किसी की आंख नम हो गईं। पत्नी, पिता, चार बहने आई भाई का रो-रोकर बुरा हाल था। महिलाएं और ग्रामीण परिवारीजनों को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे, लेकिन परिवार के लोग रो-रोकर बेहोश हो रहे थे।
सुल्तानपुर गांव निवासी ओमपाल यादव का बेटा मनोज यादव वर्ष 2006 में एटा से पुलिस में भर्ती हुआ था। कई साल से मनोज बुलंदशहर पुलिस लाइन में पत्नी सुशीला, बेटे अभिषेक (07), आर्यन (02) और भाई जितेंद्र के साथ रहता था। उसका बीच का भाई नरेंद्र पिता ओमपाल के साथ खेती में हाथ बटाता था। सोमवार शाम बुलंदशहर पुलिस लाइन में हुई गोलीबारी में मनोज की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई थी। लेकिन रिश्तेदारों ने परिवार की सबसे छोटी बेटी रिंकी को सिर्फ गोली लगने की सूचना दी थी।मं गलवार अल-सुबह परिवार को जब मौत की सूचना मिली तो कोहराम मच गया। मां रामसुती, बहन ममता, सविता, पिंकी, रिंकी के आंसू नहीं थम रहे थे। वहीं पत्नी सुशीला, बेटे अभिषेक, आर्यन और भाई नरेंद्र घटना के वक्त बुलंदशहर में ही थी। रो-रो कर परिवार के आंसू सूख चुके थे। मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे जैसे ही मनोज यादव का पार्थव शरीर सुल्तानपुर पहुंचा परिवारीजनों और ग्रामीणों में कोहराम मच गया। गांव की महिलाएं पत्नी, मां, बहनों को ढांढस बंधा रहे थे तो ग्रामीण परिवार के पुरुषों के आंसू रोकने की कोशिश कर रहे थे। शाम छह बजे मनोज के भाई जितेंद्र ने मुखागिभन देकर अंतिम संस्कार किया।
सुल्तानपुर में सुबह से नहीं जले चूल्हे
मंगलवार को पूरे गांव में दिनभर मातम का सन्नाटा पसरा गया और पूरे दिन गांव में चूल्हे नहीं जले। ग्रामीणों ने बताया कि मनोज हसमुख स्वभाव का होने के अलावा हर वक्त लोगों की मदद को तैयार रहता था। मनोज जुलाई में दो दिन की छुट्टी पर गांव आया था।
विज्ञापन
मासूम बेटों को पिता की मौत से अनजान
बुलंदशहर पुलिस लाइन में हुई गोलीबारी में शहीद सिपाही मनोज यादव के दो मासूम बेटे हैं। बड़ा बेटा अभिषेक सात साल है और छोटे बेटा आर्यन अभी दो साल का भी नहीं हुआ है। उन्हें पता भी नहीं है कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठा चुका है, जबकि पत्नी सुशीला का सिंदूर मिटने से वो गश खाकर गिर रही थी।
सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
मनोज का राजकीय सम्मान के साथ सलामी देकर अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर एसडीएम एनपी पांडेय, सीओ धरम सिंह मार्छल, एसओ जैथरा कलौश दुबे श्रद्धांजलि देने पहुचे। गांव के लाडले को अंतिम विदाई देने सुल्तानपुर गांव के अलावा आसपास गांव सैकड़ों ग्रामीणों ने नाम आंखों अंतिम विदाई दी।
विज्ञापन
सुल्तानपुर गांव निवासी ओमपाल यादव का बेटा मनोज यादव वर्ष 2006 में एटा से पुलिस में भर्ती हुआ था। कई साल से मनोज बुलंदशहर पुलिस लाइन में पत्नी सुशीला, बेटे अभिषेक (07), आर्यन (02) और भाई जितेंद्र के साथ रहता था। उसका बीच का भाई नरेंद्र पिता ओमपाल के साथ खेती में हाथ बटाता था। सोमवार शाम बुलंदशहर पुलिस लाइन में हुई गोलीबारी में मनोज की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई थी। लेकिन रिश्तेदारों ने परिवार की सबसे छोटी बेटी रिंकी को सिर्फ गोली लगने की सूचना दी थी।मं गलवार अल-सुबह परिवार को जब मौत की सूचना मिली तो कोहराम मच गया। मां रामसुती, बहन ममता, सविता, पिंकी, रिंकी के आंसू नहीं थम रहे थे। वहीं पत्नी सुशीला, बेटे अभिषेक, आर्यन और भाई नरेंद्र घटना के वक्त बुलंदशहर में ही थी। रो-रो कर परिवार के आंसू सूख चुके थे। मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे जैसे ही मनोज यादव का पार्थव शरीर सुल्तानपुर पहुंचा परिवारीजनों और ग्रामीणों में कोहराम मच गया। गांव की महिलाएं पत्नी, मां, बहनों को ढांढस बंधा रहे थे तो ग्रामीण परिवार के पुरुषों के आंसू रोकने की कोशिश कर रहे थे। शाम छह बजे मनोज के भाई जितेंद्र ने मुखागिभन देकर अंतिम संस्कार किया।
विज्ञापन
सुल्तानपुर में सुबह से नहीं जले चूल्हे
मंगलवार को पूरे गांव में दिनभर मातम का सन्नाटा पसरा गया और पूरे दिन गांव में चूल्हे नहीं जले। ग्रामीणों ने बताया कि मनोज हसमुख स्वभाव का होने के अलावा हर वक्त लोगों की मदद को तैयार रहता था। मनोज जुलाई में दो दिन की छुट्टी पर गांव आया था।
विज्ञापन
मासूम बेटों को पिता की मौत से अनजान
बुलंदशहर पुलिस लाइन में हुई गोलीबारी में शहीद सिपाही मनोज यादव के दो मासूम बेटे हैं। बड़ा बेटा अभिषेक सात साल है और छोटे बेटा आर्यन अभी दो साल का भी नहीं हुआ है। उन्हें पता भी नहीं है कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठा चुका है, जबकि पत्नी सुशीला का सिंदूर मिटने से वो गश खाकर गिर रही थी।
सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
मनोज का राजकीय सम्मान के साथ सलामी देकर अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर एसडीएम एनपी पांडेय, सीओ धरम सिंह मार्छल, एसओ जैथरा कलौश दुबे श्रद्धांजलि देने पहुचे। गांव के लाडले को अंतिम विदाई देने सुल्तानपुर गांव के अलावा आसपास गांव सैकड़ों ग्रामीणों ने नाम आंखों अंतिम विदाई दी।