{"_id":"62558750e3d2a06c0607074b","slug":"ro-plants-running-in-the-city-are-distributing-diseases-etah-news-agr5300226108","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर में चल रहे आरओ प्लांट बांट रहे बीमारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर में चल रहे आरओ प्लांट बांट रहे बीमारी
विज्ञापन
आगरा रोड स्थित एक आरओ प्लांट में भरी रखीं पानी की बड़ी बोतलें । संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। शहर में चल रहे आरओ प्लांट लोगों को बीमारी बांट रहे हैं। शहर में 50 आरओ प्लांट अनाधिकृत तरीके से चलाए जा रहे हैं, न तो इनका पंजीकरण है और न ही पानी का आज तक परीक्षण कराया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से एक भी प्लांट प्रमाणित नहीं है। संचालकों के पास उपलब्ध मीटर ऐसे हैं, जो पानी में 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर से ज्यादा टीडीएस होने पर काम ही नहीं करते। जबकि शहर के भूमिगत पानी का टीडीएस इससे अधिक पहुंच गया है। ऐसे में इन आरओ प्लांट का पानी स्वस्थ रखने के बजाए बीमार बना सकता है।
शहर के कई गली-मोहल्लों में आरओ प्लांट संचालित कर लिए गए हैं, जो घर-घर पानी की आपूर्ति करते हैं। कई सरकारी व निजी कार्यालयों तथा दुकानों में भी इनकी आपूर्ति पहुंचती है। कुल मिलाकर प्रतिदिन तीन हजार तक बोतल-कैंपर इन दिनों बेचे जा रहे हैं, लेकिन किसी भी आरओ प्लांट संचालक ने अभी तक जल निगम में पानी की जांच नहीं कराई है। जिससे इस पानी की शुद्धता प्रमाणित हो सके।
जल परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट के मुताबिक शहर के अधिकांश इलाकों के भूजल में 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर से अधिक टीडीएस का स्तर हो चुका है। जबकि मानक के अनुसार यह 500 से कम होना चाहिए। प्लांट संचालक भूजल का ही प्रयोग अपनी आपूर्ति में भी करते हैं। अधिकांश प्लांट संचालकों के पास टीडीएस का स्तर मापने के लिए उचित उपकरण तक नहीं है। जिससे पानी की शुद्धता का पता लग सके। इनके पास ऐसा मीटर है जो 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर के अंदर तक का ही स्तर बताता है। इससे अधिक पर यह काम करना बंद कर देता है।
विज्ञापन
जल परीक्षण में ऐसे होता है टीडीएस चेक
जल निगम की प्रयोगशाला के लैब सहायक हरेंद्र कुमार ने बताया कि एक ओवन में करीब 50 एमएल पानी का सैंपल लिया जाता है। इसे गर्म करने के बाद करीब तीन से चार घंटे ठंडा किया जाता है। इसके बाद पानी के ऊपर जो परत जमती है। उसका भार मापा जाता है। परत के भार के मान के साथ दस हजार से भाग देकर एक हजार से घटाते हैं। इससे टीडीएस के सही स्तर का पता लगता है।
विज्ञापन
शहर के कई गली-मोहल्लों में आरओ प्लांट संचालित कर लिए गए हैं, जो घर-घर पानी की आपूर्ति करते हैं। कई सरकारी व निजी कार्यालयों तथा दुकानों में भी इनकी आपूर्ति पहुंचती है। कुल मिलाकर प्रतिदिन तीन हजार तक बोतल-कैंपर इन दिनों बेचे जा रहे हैं, लेकिन किसी भी आरओ प्लांट संचालक ने अभी तक जल निगम में पानी की जांच नहीं कराई है। जिससे इस पानी की शुद्धता प्रमाणित हो सके।
विज्ञापन
जल परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट के मुताबिक शहर के अधिकांश इलाकों के भूजल में 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर से अधिक टीडीएस का स्तर हो चुका है। जबकि मानक के अनुसार यह 500 से कम होना चाहिए। प्लांट संचालक भूजल का ही प्रयोग अपनी आपूर्ति में भी करते हैं। अधिकांश प्लांट संचालकों के पास टीडीएस का स्तर मापने के लिए उचित उपकरण तक नहीं है। जिससे पानी की शुद्धता का पता लग सके। इनके पास ऐसा मीटर है जो 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर के अंदर तक का ही स्तर बताता है। इससे अधिक पर यह काम करना बंद कर देता है।
विज्ञापन
जल परीक्षण में ऐसे होता है टीडीएस चेक
जल निगम की प्रयोगशाला के लैब सहायक हरेंद्र कुमार ने बताया कि एक ओवन में करीब 50 एमएल पानी का सैंपल लिया जाता है। इसे गर्म करने के बाद करीब तीन से चार घंटे ठंडा किया जाता है। इसके बाद पानी के ऊपर जो परत जमती है। उसका भार मापा जाता है। परत के भार के मान के साथ दस हजार से भाग देकर एक हजार से घटाते हैं। इससे टीडीएस के सही स्तर का पता लगता है।