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रेलवे स्टेशन पर नहीं है सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Wed, 20 Apr 2016 11:20 PM IST
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रेलवे स्टेशन को उड़ाने की धमकी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रेलवे स्टेशन को उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पुलिस तो सतर्क हो गई है। लेकिन स्टेशन की सुरक्षा को देखा जाए तो यहां कुछ भी नहीं हैं। स्टेशन परिसर के अंदर जाने वाले लोगों की चेकिंग तक नहीं की जाती। बिना रोकटोक के ही कोई भी अंदर घुस जाता है। जो कभी भी स्टेशन परिसर एवं यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
कासगंज जंक्शन मथुरा, एवं बरेली के लिए प्रतिदिन दो दर्जन ट्रेनों का आवागमन होता है। इन ट्रेनों के माध्यम से प्रतिदिन ही हजारों यात्री अपना आवागमन करते है। यदि स्टेशन को सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो यह बेहद संवेदनशील है। स्टेशन के मुख्य द्वार पर पहले एक मैटल डिटेक्टर लगा हुआ था, लेकिन एक साल पहले इसके खराब हो जाने के बाद इसको हटा दिया गया। इसके बाद नया मैटल डिटेक्टर लगाने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिससे बिना सुरक्षा जांच के ही लोग स्टेशन के अंदर प्रवेश करते हैं। स्टेशन के आसपास कई बस्तियों है, लेकिन रेलवे ने स्टेशन के एक साइड में ही जालीदार दीवार बनवा रखी है। यह दीवार जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसकी जालियां टूट चुुकी है। जिससे बडे़ बड़े गेट बन गए हैं। इनमें से होकर यात्री व अन्य लोग अपना प्रवेश या निकासी करते रहते हैं। यही नहीं स्टेशन पर रेलवे ने आज तक सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगाए है। स्टेशन पर आवागमन करने वाले लोगों पर नजर नहीं रखी जाती। स्टेशन परिसर में अक्सर अपराधी तत्व सक्रिय रहते हैं। सुरक्षा के इंतजाम न होने पर कभी भी कोई अपराधी तत्व कभी भी वारदात को अंजाम दे सकता है।
डेढ़ साल पहले मिला था संदिग्ध
कासगंज। जीआरपी ने स्टेशन से डेढ़ साल पहले एक संदिग्ध गूंगे युवक को दबोचा था। उसके पास से पुलिस को टैबलेट, देश विदश की विभिन्न इमारतों, पाक की मोहर लगे नक्शे, फ्यूज, रिस्ट बाच, दर्जन भर एटीएम, कोड भाषा में लिखी डायरी, कई सिम सहित अन्य सामान बरामद हुआ था। जिसे पुलिस ने चोरी की धाराओं में जेल भेज दिया था।
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कासगंज जंक्शन मथुरा, एवं बरेली के लिए प्रतिदिन दो दर्जन ट्रेनों का आवागमन होता है। इन ट्रेनों के माध्यम से प्रतिदिन ही हजारों यात्री अपना आवागमन करते है। यदि स्टेशन को सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो यह बेहद संवेदनशील है। स्टेशन के मुख्य द्वार पर पहले एक मैटल डिटेक्टर लगा हुआ था, लेकिन एक साल पहले इसके खराब हो जाने के बाद इसको हटा दिया गया। इसके बाद नया मैटल डिटेक्टर लगाने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिससे बिना सुरक्षा जांच के ही लोग स्टेशन के अंदर प्रवेश करते हैं। स्टेशन के आसपास कई बस्तियों है, लेकिन रेलवे ने स्टेशन के एक साइड में ही जालीदार दीवार बनवा रखी है। यह दीवार जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसकी जालियां टूट चुुकी है। जिससे बडे़ बड़े गेट बन गए हैं। इनमें से होकर यात्री व अन्य लोग अपना प्रवेश या निकासी करते रहते हैं। यही नहीं स्टेशन पर रेलवे ने आज तक सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगाए है। स्टेशन पर आवागमन करने वाले लोगों पर नजर नहीं रखी जाती। स्टेशन परिसर में अक्सर अपराधी तत्व सक्रिय रहते हैं। सुरक्षा के इंतजाम न होने पर कभी भी कोई अपराधी तत्व कभी भी वारदात को अंजाम दे सकता है।
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डेढ़ साल पहले मिला था संदिग्ध
कासगंज। जीआरपी ने स्टेशन से डेढ़ साल पहले एक संदिग्ध गूंगे युवक को दबोचा था। उसके पास से पुलिस को टैबलेट, देश विदश की विभिन्न इमारतों, पाक की मोहर लगे नक्शे, फ्यूज, रिस्ट बाच, दर्जन भर एटीएम, कोड भाषा में लिखी डायरी, कई सिम सहित अन्य सामान बरामद हुआ था। जिसे पुलिस ने चोरी की धाराओं में जेल भेज दिया था।
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