{"_id":"66844ddab7cf2ceb2905fd14","slug":"relatives-kept-reaching-till-late-night-to-identify-the-dead-bodies-etah-news-c-163-1-sagr1017-119187-2024-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etah News: शवों की पहचान करने के लिए देर रात तक पहुंचते रहे परिजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etah News: शवों की पहचान करने के लिए देर रात तक पहुंचते रहे परिजन
Wed, 03 Jul 2024 12:28 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 03 Jul 2024 12:28 AM IST
विज्ञापन
एटा। हाथरस सत्संग हादसा में मृतकों की पहचान करने के लिए मोर्चरी पर देर रात तक परिजन आते रहे। वहीं पुलिस कर्मी रात तक पहचान कराने में जुटे रहे।
जब पहचान नहीं हुई तो अन्य जिलों तक दौड़ लगाई, भीड़ में ऐसे गुम हुए कि उनकी तलाश करने के लिए भटकना पड़ा। जिला फर्रुखाबाद के कायमगंज निवासी हरवीर सिंह ने बताया कि परिवार के साथ पत्नी के साथ बेटी संध्या भी सत्संग में गई थी। लेकिन भगदड़ में दोनों ही लापता हैं, कई जिलों में घायलों और मृतकों को भेजा गया है। समझ नहीं आ रहा कि दोनों कहां पर होंगी। पहले एटा ही आए हैं, यहां पर दोनों में से एक भी नहीं मिली है। अब हाथरस के लिए जा रहे हैं।
हरवीर देर रात करीब 8 बजे पोस्टमार्टम पर परिजन के साथ पहुंचा था, जब अपने नहीं मिले तो दूसरे जिला के लिए रवाना हो गए। ऐसे तमाम लोग हैं जो अपनों की तलाश में एक जिला से दूसरे जिला तक भटकने को मजबूर हुए हैं। वहीं रनवीर सिंह ने बताया कि भीड़ में दबने के बाद हर कोई अपनी जान बचाने के प्रयास में जुटा था, अपना कौन छूट गया और दब गया, यह देख तक नहीं पाया। बाद में राहत कार्य में जुटे लोग घायलों और मृतकों को वाहनों से इधर-उधर भेजते रहे। इसके चलते पता नहीं चला कि कौन कहां भेजा गया है। संवाद
विज्ञापन
जब पहचान नहीं हुई तो अन्य जिलों तक दौड़ लगाई, भीड़ में ऐसे गुम हुए कि उनकी तलाश करने के लिए भटकना पड़ा। जिला फर्रुखाबाद के कायमगंज निवासी हरवीर सिंह ने बताया कि परिवार के साथ पत्नी के साथ बेटी संध्या भी सत्संग में गई थी। लेकिन भगदड़ में दोनों ही लापता हैं, कई जिलों में घायलों और मृतकों को भेजा गया है। समझ नहीं आ रहा कि दोनों कहां पर होंगी। पहले एटा ही आए हैं, यहां पर दोनों में से एक भी नहीं मिली है। अब हाथरस के लिए जा रहे हैं।
हरवीर देर रात करीब 8 बजे पोस्टमार्टम पर परिजन के साथ पहुंचा था, जब अपने नहीं मिले तो दूसरे जिला के लिए रवाना हो गए। ऐसे तमाम लोग हैं जो अपनों की तलाश में एक जिला से दूसरे जिला तक भटकने को मजबूर हुए हैं। वहीं रनवीर सिंह ने बताया कि भीड़ में दबने के बाद हर कोई अपनी जान बचाने के प्रयास में जुटा था, अपना कौन छूट गया और दब गया, यह देख तक नहीं पाया। बाद में राहत कार्य में जुटे लोग घायलों और मृतकों को वाहनों से इधर-उधर भेजते रहे। इसके चलते पता नहीं चला कि कौन कहां भेजा गया है। संवाद
विज्ञापन