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नोट बंदी से ककोड़ा मेले में भी मंदी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Nov 2016 10:29 PM IST
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छोटे नोट की कमी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पांच सौ एवं 1000 रुपये के नोट बंदी का असर ककोड़ा मेला पर भी है। मेले में लगी दुकानों से ग्राहक नदारद हैं। इससे दुकानदारों के होश उड़े हैं।
बता दें कि गंगा तट पर लगने वाले इस धार्मिक मेले में बड़ी संख्या में लोग तंबू बनाकर प्रवास कर रहे हैं। वहीं सैकड़ों दुकानें भी सजी हैं। दुकानदारों को आशा थी कि मेले में अच्छा कारोबार होगा। पर, नोटबंदी ने इस बार मेले की सूरत बिगाड़ दी है। छोटे नोट न होने से मेले में खरीदारों की भीड़ नहीं है। वहीं गंगातट पर प्रवास करने वाले भी रोजमर्रा के सामानों की खरीदारी के लिए परेशान हैं। बैंकों से रुपये निकालने में हो रही दिक्कतों के कारण लोग चाहकर भी मेले में खरीदारी से बच रहे हैं।
बिसात खाने की दुकान चलाने वाले हरपाल सिंह ने बताया कि पिछले वर्षों में खासी खरीदारी ग्राहकों के द्वारा की जाती थी। नोट बंदी से पहले भी मेले में बिक्री ठीक थी, लेकिन बड़े नोट बंद होने के बाद ग्राहकों की संख्या सिमटने लगी है। मिष्ठान विक्रेता रामचंद्र का कहना है कि लोगों के पास छोटे नोट न होने से बिक्री भी प्रभावित हो रही है। बैंकों से सीमित मात्रा में पैसे निकलने से लोग इसे खर्च करने से बच रहे हैं।
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बता दें कि गंगा तट पर लगने वाले इस धार्मिक मेले में बड़ी संख्या में लोग तंबू बनाकर प्रवास कर रहे हैं। वहीं सैकड़ों दुकानें भी सजी हैं। दुकानदारों को आशा थी कि मेले में अच्छा कारोबार होगा। पर, नोटबंदी ने इस बार मेले की सूरत बिगाड़ दी है। छोटे नोट न होने से मेले में खरीदारों की भीड़ नहीं है। वहीं गंगातट पर प्रवास करने वाले भी रोजमर्रा के सामानों की खरीदारी के लिए परेशान हैं। बैंकों से रुपये निकालने में हो रही दिक्कतों के कारण लोग चाहकर भी मेले में खरीदारी से बच रहे हैं।
बिसात खाने की दुकान चलाने वाले हरपाल सिंह ने बताया कि पिछले वर्षों में खासी खरीदारी ग्राहकों के द्वारा की जाती थी। नोट बंदी से पहले भी मेले में बिक्री ठीक थी, लेकिन बड़े नोट बंद होने के बाद ग्राहकों की संख्या सिमटने लगी है। मिष्ठान विक्रेता रामचंद्र का कहना है कि लोगों के पास छोटे नोट न होने से बिक्री भी प्रभावित हो रही है। बैंकों से सीमित मात्रा में पैसे निकलने से लोग इसे खर्च करने से बच रहे हैं।
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