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जिला अस्पताल नहीं...अब मेडिकल कॉलेज कहिए जनाब
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जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगा मेडिकल कॉलेज का बोर्ड। संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। जी हां, अब इसे जिला अस्पताल नहीं, मेडिकल कॉलेज कहिए जनाब। स्वास्थ्य सुविधाओं में पिछड़े और हांफते हुआ जिला अस्पताल को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं वाले मेडिकल कॉलेज की शक्ल दी जा रही है। आधारभूत ढांचे से लेकर मानव संसाधन तक में धीरे-धीरे बदलाव किया जा रहा है। कई जगह मेडिकल कॉलेज का नाम लिखवाया गया है। मुख्य द्वार पर भी मेडिकल कॉलेज का साइन बोर्ड लगा दिया गया है। वहीं अन्य व्यवस्थाओं को बदलने की प्रक्रिया चल रही है।
जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कर दिया गया है। इसके साथ ही व्यवस्थाएं भी बदलने लगी हैं। यहां ब्लड बैंक के पास की बिल्डिंग में 10 बेड का आईसीयू वार्ड बना दिया गया है। साथ ही नेत्र रोग विभाग के लिए 10 बेड अलग से सुरक्षित किए गए हैं। जबकि तीन बेड ब्लड बैंक में डाले गए हैं। इतना ही नहीं आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन प्लांट से पाइप लाइन डालकर सप्लाई दी गई है। जबकि वार्ड के बाहर मेडिकल कॉलेज का नाम पेंट कराया गया है।
बेड पर डलवाई जा रही संख्या
वार्डों में मरीजों के लिए पड़े बेडों पर उनकी संख्या डलवाई जा रही है। वहीं खिड़कियों में पर्दे लगाए जा रहे हैं। जिसके बाद वार्ड बदले-बदले नजर आने लगे हैं।
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जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कर दिया गया है। इसके साथ ही व्यवस्थाएं भी बदलने लगी हैं। यहां ब्लड बैंक के पास की बिल्डिंग में 10 बेड का आईसीयू वार्ड बना दिया गया है। साथ ही नेत्र रोग विभाग के लिए 10 बेड अलग से सुरक्षित किए गए हैं। जबकि तीन बेड ब्लड बैंक में डाले गए हैं। इतना ही नहीं आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन प्लांट से पाइप लाइन डालकर सप्लाई दी गई है। जबकि वार्ड के बाहर मेडिकल कॉलेज का नाम पेंट कराया गया है।
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बेड पर डलवाई जा रही संख्या
वार्डों में मरीजों के लिए पड़े बेडों पर उनकी संख्या डलवाई जा रही है। वहीं खिड़कियों में पर्दे लगाए जा रहे हैं। जिसके बाद वार्ड बदले-बदले नजर आने लगे हैं।
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