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मासूम की लाशों देख गम में डूबे लोग
Amar Ujala
Updated Sat, 21 Jan 2017 12:31 AM IST
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गमगीन बैठी महिलाएं
- फोटो : Amar Ujala
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हादसे में मारे गए बच्चों की लाशें देख हर शख्स की आंखें भरी हुई हैं। गम, गुस्से का गुबार देख प्रशासन ने रात में ही ज्यादातर शवों के अंतिम संस्कार करा दिए।
कोहरे के कारण असदपुर के समीप गुरुवार को स्कूली बस और ट्रक में हुई टक्कर में 12 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। इस हादसे से क्षेत्र के छह गांवों में मातम पसरा हुआ है। हादसे में बाद प्रशासन ने शवों का पोस्टमार्टम कराया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने ज्यादातर मृतक बच्चों के अंतिम संस्कार गुरुवार की रात ही करा दिए। हादसे में मृत हुए पुरंजला गांव के सात वर्षीय मासूम अनुज पुत्र सुधीर का अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया गया तो मौजूद हर शख्स की आंखें छलछला उठीं थीं। मंजर ऐसा था, मानो शव से लिपटा कफन भी सिसक रहा हो। हर कोई हादसे को कोस रहा था। वहीं पुरंजला निवासी अनामिका, नितिन, प्रेरणा पुत्री आदेश, नगला उम्मेद के आयुष, आंशिका का सैफई में उपचार चल रहा है। हालत गंभीर होने पर नगला उम्मेद के दीपक को सैफई से पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया है। नगला उम्मेद निवासी शीबू, किशन, अंशिका, राजवीर, आदेश और करिश्मा को आगरा भेजा गया है। जिनके बच्चे अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे रहे हैं। उनके परिजन लाडलों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।
आखिरी वक्त लाड़ले का मुंह नहीं देख पाई मां
पुरंजला गांव निवासी सुधीर के तीनाें बच्चे आलोक (10), ज्योति (11) अनुज (7) जेएस विद्या निकेतन स्कूल की बस में सवार होकर गुरुवार सुबह स्कूल गए थे। हादसे में मासूम अनुज की मौत हो गई। जबकि जिंदा बचे आलोक और ज्योति घायल हैं। पोस्टमार्टम के बाद शाम को परिवारीजन अनुज का शव लेकर घर आए, लेकिन देर रात आलोक और ज्योति को सैफई रेफर कर दिया गया। मां दोनाें घायल बच्चों के साथ सैफई चली। ऐसे में शुक्रवार की सुबह पिता सुधीर ने मां की गैरमौजूदगी में ही जिगर के टुकड़े का अंतिम संस्कार किया। जिस बच्चे को मां ने नौ महीने कोख में रखा और दूध पिला कर बड़ा किया। वही उसे आखिरी वक्त देख तक नहीं पाई।
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गम में डूबे गांवों में ढांढस बंधाने वालों का तांता
असदपुर स्कूल बस हादसे में एक दर्जन बच्चों की मौत से इलाका गमगीन है। वहीं गमजदा परिवारों को ढांढस बंधाने के लिए शुक्रवार को दिनभर लोगों का तांता लगा रहा। बता दें कि असदपुर में स्कूल हादसे के बाद क्षेत्र के रामनगर, टिकैतपुर, केला, पुरंजला, नगला उम्मेद, नगला बिरियन में मातम पसरा है। शुक्रवार को मृतक मासूमों के घर रिश्तेदार, ग्रामीण और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के आने का सिलसिला बना रहा।
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कोहरे के कारण असदपुर के समीप गुरुवार को स्कूली बस और ट्रक में हुई टक्कर में 12 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। इस हादसे से क्षेत्र के छह गांवों में मातम पसरा हुआ है। हादसे में बाद प्रशासन ने शवों का पोस्टमार्टम कराया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने ज्यादातर मृतक बच्चों के अंतिम संस्कार गुरुवार की रात ही करा दिए। हादसे में मृत हुए पुरंजला गांव के सात वर्षीय मासूम अनुज पुत्र सुधीर का अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया गया तो मौजूद हर शख्स की आंखें छलछला उठीं थीं। मंजर ऐसा था, मानो शव से लिपटा कफन भी सिसक रहा हो। हर कोई हादसे को कोस रहा था। वहीं पुरंजला निवासी अनामिका, नितिन, प्रेरणा पुत्री आदेश, नगला उम्मेद के आयुष, आंशिका का सैफई में उपचार चल रहा है। हालत गंभीर होने पर नगला उम्मेद के दीपक को सैफई से पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया है। नगला उम्मेद निवासी शीबू, किशन, अंशिका, राजवीर, आदेश और करिश्मा को आगरा भेजा गया है। जिनके बच्चे अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे रहे हैं। उनके परिजन लाडलों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।
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आखिरी वक्त लाड़ले का मुंह नहीं देख पाई मां
पुरंजला गांव निवासी सुधीर के तीनाें बच्चे आलोक (10), ज्योति (11) अनुज (7) जेएस विद्या निकेतन स्कूल की बस में सवार होकर गुरुवार सुबह स्कूल गए थे। हादसे में मासूम अनुज की मौत हो गई। जबकि जिंदा बचे आलोक और ज्योति घायल हैं। पोस्टमार्टम के बाद शाम को परिवारीजन अनुज का शव लेकर घर आए, लेकिन देर रात आलोक और ज्योति को सैफई रेफर कर दिया गया। मां दोनाें घायल बच्चों के साथ सैफई चली। ऐसे में शुक्रवार की सुबह पिता सुधीर ने मां की गैरमौजूदगी में ही जिगर के टुकड़े का अंतिम संस्कार किया। जिस बच्चे को मां ने नौ महीने कोख में रखा और दूध पिला कर बड़ा किया। वही उसे आखिरी वक्त देख तक नहीं पाई।
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गम में डूबे गांवों में ढांढस बंधाने वालों का तांता
असदपुर स्कूल बस हादसे में एक दर्जन बच्चों की मौत से इलाका गमगीन है। वहीं गमजदा परिवारों को ढांढस बंधाने के लिए शुक्रवार को दिनभर लोगों का तांता लगा रहा। बता दें कि असदपुर में स्कूल हादसे के बाद क्षेत्र के रामनगर, टिकैतपुर, केला, पुरंजला, नगला उम्मेद, नगला बिरियन में मातम पसरा है। शुक्रवार को मृतक मासूमों के घर रिश्तेदार, ग्रामीण और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के आने का सिलसिला बना रहा।