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मुझे नाले में न डालो बाबूजी ...
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Wed, 31 Aug 2016 11:18 PM IST
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काव्य संध्या का आयोजन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जनपदीय साहित्यिक संस्था निर्झर ने संस्थापक सुकवि जयमुरारी सक्सेना अजेय की पंद्रहवीं पुण्यतिथि पर काव्य संध्या का आयोजन ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी राधाकृष्ण गोयल, राजवीर सिंह साहू, सरोज दीदी, डा. अखिलेश चंद्र गौड़ चंद्रप्रकाश अग्रवाल व अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। संस्थाध्यक्ष डा. रामप्रकाश पाल पथिक, आदर्श सक्सेना एडवोकेट ने संस्थापक स्वर्गीय जयमुरारी के चित्र पर माल्यार्पण किया। ब्रह्माकुमारी की बहनों का संस्था के सदस्यों ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। सुकवि अजेय स्मृति पुरस्कार कुरावली के गीतकर सुरेश चौहान नीरव को निर्झर काव्य शिरोमणि अलंकरण के साथ प्रदान किया गया। उनका गीतकार होरीलाल व्यास ने अभिनंदन किया।
कार्यक्रम के संयोजक एवं निर्झर के सचिव अखिलेश सक्सेना ने शारदे वंदना ‘ माँ मेरी अंबिके मेरी वरदायिनी, काव्य रचना का उत्कृष्ट वरदान दें।’ सहसंयोजक मनोज मंजुल ने पाठ किया कि ‘मधुर स्मृतियां जैमुरारी की कभी न मिटने पाएंगी।’ बदायूं के कवि ने बेटी बचाओं को कविता पढ़ी ‘दिया जनम तो पालो बाबूजी, मुझे नाले में न डालो बाबूजी।’ कवि मुकेश मीत बरेली ने सुनाया ‘राष्ट्र और जन्म भूमि को लाल सौंप दें, पन्नाधाय वाली कुर्बानी है तो देश है।’ कवि सुरेश नीरव ने सुनाया कि ‘टूटकर एक सितारा अमर हो गया।’ संरक्षक डा. अखिलेश चंद्र गौड़ ने‘ ईश्वर दे तू जन्म हजारों बार, एक दो बार नहीं।’ इसके अतिरिक्त कवि होरीलाल व्यास, डा. रामप्रकाश पाल पथिक, अखिलेश सक्सेना, चक्रेश गौड, दविंदर चंडौक, अजय अटल, निर्मल सक्सेना, डा. विमलेश अवस्थी आदि ने भी कविता पाठ किया। डा. सुरेंद्र गुप्ता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मधुर पुंढीर, सतीश चंद्र माहेश्वरी, आलोक सक्सेना, डा. शंकर लाल, नारायण स्वरूप सक्सेना, अतुल सक्सेना, आलोक सक्सेना, सचिन पुंढीर, अभिनव शर्मा, इंद्र देव ऋषि सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी राधाकृष्ण गोयल, राजवीर सिंह साहू, सरोज दीदी, डा. अखिलेश चंद्र गौड़ चंद्रप्रकाश अग्रवाल व अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। संस्थाध्यक्ष डा. रामप्रकाश पाल पथिक, आदर्श सक्सेना एडवोकेट ने संस्थापक स्वर्गीय जयमुरारी के चित्र पर माल्यार्पण किया। ब्रह्माकुमारी की बहनों का संस्था के सदस्यों ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। सुकवि अजेय स्मृति पुरस्कार कुरावली के गीतकर सुरेश चौहान नीरव को निर्झर काव्य शिरोमणि अलंकरण के साथ प्रदान किया गया। उनका गीतकार होरीलाल व्यास ने अभिनंदन किया।
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कार्यक्रम के संयोजक एवं निर्झर के सचिव अखिलेश सक्सेना ने शारदे वंदना ‘ माँ मेरी अंबिके मेरी वरदायिनी, काव्य रचना का उत्कृष्ट वरदान दें।’ सहसंयोजक मनोज मंजुल ने पाठ किया कि ‘मधुर स्मृतियां जैमुरारी की कभी न मिटने पाएंगी।’ बदायूं के कवि ने बेटी बचाओं को कविता पढ़ी ‘दिया जनम तो पालो बाबूजी, मुझे नाले में न डालो बाबूजी।’ कवि मुकेश मीत बरेली ने सुनाया ‘राष्ट्र और जन्म भूमि को लाल सौंप दें, पन्नाधाय वाली कुर्बानी है तो देश है।’ कवि सुरेश नीरव ने सुनाया कि ‘टूटकर एक सितारा अमर हो गया।’ संरक्षक डा. अखिलेश चंद्र गौड़ ने‘ ईश्वर दे तू जन्म हजारों बार, एक दो बार नहीं।’ इसके अतिरिक्त कवि होरीलाल व्यास, डा. रामप्रकाश पाल पथिक, अखिलेश सक्सेना, चक्रेश गौड, दविंदर चंडौक, अजय अटल, निर्मल सक्सेना, डा. विमलेश अवस्थी आदि ने भी कविता पाठ किया। डा. सुरेंद्र गुप्ता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मधुर पुंढीर, सतीश चंद्र माहेश्वरी, आलोक सक्सेना, डा. शंकर लाल, नारायण स्वरूप सक्सेना, अतुल सक्सेना, आलोक सक्सेना, सचिन पुंढीर, अभिनव शर्मा, इंद्र देव ऋषि सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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