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महाशिवरात्रि को लेकर शिवालयों में तैयारियां शुरू
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शहर का प्रसिद्घ एवं एतिहासिक शिव मंदिर,कैलाश मंदिर- संवाद
- फोटो : ETAH
एटा/अलीगंज/सकीट। शुक्रवार को महाशिवरात्रि पर कांवड़ियों का सैलाब उमड़ेगा। शिवालयों में भोलेनाथ के जयकारे लगेंगे। नगर पालिका महाशिवरात्रि को लेकर कैलाश मंदिर की व्यवस्थाओं में जुट गई है। पालिका की तरफ से मंदिर पर चार लाइटें लगाई जाएंगी, जिससे मंदिर जगमग होगा। वहीं, मंदिर पर भी भक्तों ने रंगाई -पुताई का कार्य शुरू करा दिया है। महंत धीरज झा ने बताया कि लगभग तीन लाख रुपये से कैलाशगंज स्थित कैलाश मंदिर की रंगाई-पुताई की जा रही है। बृहस्पतिवार की रात 12 बजे से कांवड़ियों का सैलाब उमड़ने लगेगा। इस बार लगभग 10 हजार से ज्यादा भक्त पहुंचेंगे।
अलीगंज में महाशिवरात्रि पर माता महाकाली मंदिर पर तैयारियां चल रही हैं। यहां लगभग 400 वर्ष पुराना शिवालय है। बताया जाता है कि शिवलाल मिश्रा को स्वप्न में एक शिवलिंग तालाब में दिखा था, उन्होंने सबेरे लोगों को सपने की बात बताई तो लोगों ने स्वप्न के अनुसार शिवलिंग तलाशा। शिवलिंग मिलने पर पुरानी तहसील स्थित नगरपालिका परिषद वाली गली में भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया जिसे अब लोग शिवालय के नाम से जानते है।
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सकीट में रंगाई-पुताई चल रही
सकीट ब्लॉक क्षेत्र के शिवालय में रंग-बिरंगी झालरों व फूलों से सजावट हो रही है। ग्राम नोरंगाबाद के समीप बने प्राचीन शिव मंदिर में लोगों की आस्था है। बुजुर्गों ने बताया कि पूर्व में महादेव बाबा का आशीर्वाद लेने के लिए दस्यु छविराम, महावीर, पोती, अलवर ने माथा टेका था। शिवरात्रि को भक्तजन नंगे पैर सोरों, कछला से कांवड़ में गंगाजल लाकर चढ़ाते है। कुछ भक्त नेजा, झंडा, घंटा, बेलपत्र, बेर, धतूरा आदि चढ़ाकर कर भोलेनाथ को खुश करते है
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अलीगंज में महाशिवरात्रि पर माता महाकाली मंदिर पर तैयारियां चल रही हैं। यहां लगभग 400 वर्ष पुराना शिवालय है। बताया जाता है कि शिवलाल मिश्रा को स्वप्न में एक शिवलिंग तालाब में दिखा था, उन्होंने सबेरे लोगों को सपने की बात बताई तो लोगों ने स्वप्न के अनुसार शिवलिंग तलाशा। शिवलिंग मिलने पर पुरानी तहसील स्थित नगरपालिका परिषद वाली गली में भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया जिसे अब लोग शिवालय के नाम से जानते है।
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सकीट में रंगाई-पुताई चल रही
सकीट ब्लॉक क्षेत्र के शिवालय में रंग-बिरंगी झालरों व फूलों से सजावट हो रही है। ग्राम नोरंगाबाद के समीप बने प्राचीन शिव मंदिर में लोगों की आस्था है। बुजुर्गों ने बताया कि पूर्व में महादेव बाबा का आशीर्वाद लेने के लिए दस्यु छविराम, महावीर, पोती, अलवर ने माथा टेका था। शिवरात्रि को भक्तजन नंगे पैर सोरों, कछला से कांवड़ में गंगाजल लाकर चढ़ाते है। कुछ भक्त नेजा, झंडा, घंटा, बेलपत्र, बेर, धतूरा आदि चढ़ाकर कर भोलेनाथ को खुश करते है
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