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मदरसा: बिल्डिंग से लेकर छात्रवृत्ति तक में फर्जीवाड़ा

Mon, 10 Apr 2017 11:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो एटा।
अमर उजाला ब्यूरो एटा। Updated Mon, 10 Apr 2017 11:09 PM IST
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Madarsa: From Building to Scholarship up to Frazier
मदरसा: बिल्डिंग से लेकर छात्रवृत्ति तक में फर्जीवाड़ा - फोटो : amar ujala
अल्पसंख्यकों के लिए शुरू की गई योजनाओं में जमकर खेल चल रहा है। जिले में मदरसा संचालन में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विभागीय सांठगांठ के चलते मदरसा संचालक जमकर धन का बंदरबांट कर रहे हैं। आलम यह है कि मारहरा गेट स्थित एक भवन में दो-दो मदरसे संचालित हो रहे हैं। जबकि विभागीय अधिकारी इस पर पर्दा डाल रहे हैं। लेकिन लोगों की शिकायत पर जिलाधिकारी ने सीडीओ को जांच सौंप दी है।
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खूब हो रहा धन का बंदरबांट
शहर के मारहरा दरवाजा पर भूरे खां जनकल्याण शिक्षा समिति द्वारा फातिमा इस्लामिया आलिया स्कूल के नाम से मदरसा संचालित होता है। इसमें मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल, फाजिल की कक्षाएं चलती हैं। इसके साथ इसी भवन में फैमिदा अरबिक उच्च आलिया स्कूल डिग्री कालेज स्तर का मदरसा चलता है। इसमें कक्षा छह से लेकर बीए तक की कक्षाएं हैं। नियमों के मुताबिक एक भवन में दो-दो मदरसों का संचालन नहीं किया जा सकता है। जबकि मदरसा शासन से सहायता प्राप्त है। इसके अलावा शिक्षा समिति द्वारा पूरे जिले में चार मदरसे संचालित किए जा रहे हैं।
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खूब हड़पा जा रहा वजीफा
वर्ष 2016 में मदरसा फातिमा इस्लामिया आलिया स्कूल में 11419 बच्चे दर्शाए गए हैं। जबकि मौके पर पता चला कि मदरसे में कुल 70 छात्र ही दीनी तालीम लेने आते हैं। बताया जाता है कि मदरसे में पढ़ने वाले प्राइमरी के बच्चों को एक हजार रुपये वार्षिक और प्राइमरी से ऊपर के बच्चों को पांच हजार रुपये वार्षिक वजीफा मिलते हैं। इससे साफ है कि छात्रों की अधिक संख्या दिखाकर मदरसा संचालक जमकर लूट कर रहे हैं।
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स्टाफ के वेतन में भी खेल
विभागीय वेबसाइट पर मदरसे में कुल 19 शिक्षकों को तैनात दिखाया गया है। इनको वेतन भी शासन की ओर से मिलता है। जबकि आलम यह है कि मदरसे में प्रशिक्षित शिक्षक कम हैं। इसके साथ ही दोनों मदरसों में एक ही टीचर दिखाकर अलग-अलग वेतन लिया जा रहा है।


अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की भूमिका पर सवाल
मामले में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मदरसों की मान्यता और सत्यापन का काम विभाग के पास है। हर साल विभाग मदरसों का सत्यापन करता है।

सरकारी कर्मचारी है मुख्य संचालक
मदरसे को संचालित करने के लिए सरकारी कर्मचारी ने जिम्मा उठाया है। कर्मी ने अपने परिवारीजनों के नाम से मदरसे का पंजीकरण और मान्यता ली है। वहीं तालीम देने वाले शिक्षक भी अनट्रेंड हैं।


ये हैं वेबसाइट पर आंकड़े
स्थापना वर्ष: 1980
कुल छात्र- 11419
कुल शिक्षक- 19
अन्य कार्मिक- 11
कक्षाएं- 46
अन्य कमरे- 10
ब्लैक बोर्ड- 74
कंप्यूटर- 21
नोट: विभाग ने वेबसाइट पर अपलोड आंकड़ों को गलत बताकर पल्ला झाड़ लिया है।

डीएम ने सीडीओ को सौंपी जांच
शहर के कुछ लोगों ने मदरसों में चल रहे खेल की शिकायत डीएम से की। डीएम विजय किरन आनंद ने सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया को मामले की जांच सौंप दी है। सीडीओ ने जांच कर शुरू कर दी है। वहीं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को मामले में वांछित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

इनका कहना है
मारहरा गेट स्थित मदरसे की शिकायत मिली थी। जिसकी जांच चल रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।
टीएन तिवारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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