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एटाः घर पर बन रहीं जलेबी-कचौड़ी का लुत्फ ले रहे शहरवासी
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लॉकडाउन के चलते घरों में बनाई जा रही मिठाई। संवाद
- फोटो : ETAH
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लॉकडाउन ने दिनचर्या बदलने के साथ ही जीभ के स्वाद पर भी लगाम लगा दी है। 42 दिन से बंद बाजार से परेशान लोग परेशान हो चुके हैं। वे लोग दाल, चावल रोटी आदि खाकर ऊब रहे हैं। ऐसे में लोग अब घर पर ही मनचाहा व्यंजन बनाकर स्वाद पूरा कर रहे हैं। मिठाई, जलेबी, बेड़ई, गोलगप्पे, टिक्की, चाट, पकौड़ी, डोसा आदि बनाकर परिवार के साथ लुफ्त ले रहे हैं।
दाल-सब्जियों से मन भर गया
सीमित दाल-सब्जियों से मन भर गया है। बच्चे भी इसे मन से नहीं खा रहे। रविवार को घर पर डोसा, चटनी एवं सांभर बनाई। बहुत अच्छा तो नहीं बना, लेकिन सभी का मन बदल गया।-रंजना गुप्ता, गृहणी
सालगिरह पहले की तरह सेलीब्रेट नहीं कर सके।
लॉकडाउन के चलते शादी की सालगिरह पहले की तरह सेलीब्रेट नहीं कर सके। केक, मिठाई, पनीर भी नहीं मिला। फिर क्या पति के सहयोग से घर पर ही केक के साथ जलेबी, बेड़ई बनाकर सेलीब्रेट किया। -रंजना सिंह, गृहणी
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घर पर ही आलू की टिक्की बनाई
बाजार के पकवान बिना खाए चालीस से अधिक दिन गुजर गए। दिनभर घर में रहने पर भूख भी अधिक लग रही है। बच्चे भी ऊब रहे हैं। शनिवार को घर पर ही आलू की टिक्की व शाम को आलू भूनकर बच्चों की मांग पूरी की। -अनुपम द्विवेदी, शिक्षक
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दाल-सब्जियों से मन भर गया
सीमित दाल-सब्जियों से मन भर गया है। बच्चे भी इसे मन से नहीं खा रहे। रविवार को घर पर डोसा, चटनी एवं सांभर बनाई। बहुत अच्छा तो नहीं बना, लेकिन सभी का मन बदल गया।-रंजना गुप्ता, गृहणी
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सालगिरह पहले की तरह सेलीब्रेट नहीं कर सके।
लॉकडाउन के चलते शादी की सालगिरह पहले की तरह सेलीब्रेट नहीं कर सके। केक, मिठाई, पनीर भी नहीं मिला। फिर क्या पति के सहयोग से घर पर ही केक के साथ जलेबी, बेड़ई बनाकर सेलीब्रेट किया। -रंजना सिंह, गृहणी
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घर पर ही आलू की टिक्की बनाई
बाजार के पकवान बिना खाए चालीस से अधिक दिन गुजर गए। दिनभर घर में रहने पर भूख भी अधिक लग रही है। बच्चे भी ऊब रहे हैं। शनिवार को घर पर ही आलू की टिक्की व शाम को आलू भूनकर बच्चों की मांग पूरी की। -अनुपम द्विवेदी, शिक्षक