फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etah News ›   jain samaaj ke pramukh santon kee janmasthalee hai eta

जैन समाज के प्रमुख संतों की जन्मस्थली है एटा

Mon, 05 Sep 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
अमर उजाला ब्यूरो, एटा Updated Mon, 05 Sep 2016 11:45 PM IST
विज्ञापन
jain samaaj ke pramukh santon kee janmasthalee hai eta
पर्यूषण पर्व विशेष - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
देश के विभिन्न प्रांतों में रहने वाले जैन समाज के लिए एटा जिले का विशेष स्थान है। एटा की माटी ने कई दिगंबर संतों को जना है। संतों ने अपनी तपस्या के बल पर पूरे विश्व में जैन धर्म और एटा जिले का डंका बजाया। आज से पर्यूषण पर्व शुरू हो रहे हैं, ऐसे में जिले के गौरव रहे महान संतों का याद करना लाजिमी है। इन संतों ने जैन श्रावकों को धर्म की राह दिखाई, साथ ही जगत के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। 
विज्ञापन

------------
जिले के जलेसर विकासखंड के गांव कोसमा में वर्ष 1915 में जन्मे आचार्य विमल सागर ने पूरे विश्व में जैन धर्म की पताका फहराई। बताया जाता है कि आचार्य विमल सागर महाराज ने हैडमास्टर की नौकरी भी की, लेकिन उनका घर-गृहस्थी में मन न लगा, तो उन्होंने जैनेश्वरी दीक्षा ले ली। इसके बाद अपनी तपस्या के बल पर उन्होंने हजारों भक्तों को जीवन जीने की कला सिखाई। हालांकि आचार्य विमल सागर महाराज की समाधि हो चुकी है, लेकिन आज भी जैन श्रावक गुरु के उपकारों को समय-समय पर याद करते हैं। प्रसिद्ध गीतकार रवींद्र जैन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आचार्य विमल सागर के प्रमुख शिष्यों में से हैं। 
विज्ञापन


जिले के शिकोहाबाद रोड स्थित गांव फफोतू निवासी प्यारेलाल के पुत्र ओमप्रकाश ने भी स्वात्म कल्याण की लगन लगाकर जैन धर्म का नाम आगे बढ़ाया। जैनेश्वरी दीक्षा के बाद उनको आचार्य सन्मति सागर महाराज नाम मिला। उन्होंने आचार्य महावीर कीर्ति महाराज से शास्त्रों का अध्ययन किया और अपनी तपस्या के बल पर समाज को नई पहचान दी। आचार्य सन्मति सागर महीनों तक उपवास रखते थे और महीनों तक मौन रखकर साधना करते थे। उनकी तपस्या का परिणाम है कि आज भी भक्त आचार्य सन्मति सागर को भूलते नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


शहर के पुरानी बस्ती निवासी बर्तन व्यापारी लाला बंगालीदास जैन के घर में जन्मे राहुल जैन ने भी जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार कर उर्जयंत सागर नाम पाया। उन्होंने जैन श्रावकों को सिखाया कि धर्म की राह पर चलकर मोक्ष को कैसे पाया जाता है। भगवान महावीर के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार और त्याग मार्ग को अंगीकार कर वह जिन धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। 

इन तीन संतों के अलावा एटा के कई श्रावकों ने त्याग मार्ग को अपनाया है। जिनमें उपाध्याय तेजस्व सागर, मुनि विष्णु सागर, मुनि अनुकंपा सागर, मुनि सुपार्श्व सागर, मुनि सुमर सागर, मुनि पद्म सागर, मुनि अनंत सागर, आर्यिका विनीतमती, आर्यिका विव्रांतश्री, आर्यिका मनोमती, आर्यिका नियममती, आर्यिका विज्ञमती, ऐलक विश्वयज्ञ सागर, क्षुल्लक विजय सागर, क्षुल्लिका विलक्षणमती, क्षुल्लक सुरेंद्र सागर, क्षुल्लिका विमोहमती, क्षुल्लिका विर्वधमती, आर्यिका मोक्षमती, आर्यिका श्रेष्ठमती प्रमुख हैं। 


वर्तमान समय में जैन संतोें की दिनचर्या बेहद कठिन है। सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम हर परिस्थिति में दिगंबर मुद्रा में रहते हैं। दिन में खड़े होकर एक बार अन्न जल ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही भोजन में बाल या अन्य जीव देख अतंराय कर्म के जरिए प्रायश्चित करते हैं। रात को मौन रहते हैं। धर्म और आत्म कल्याण को तत्पर रहते हैं। बबिता जैन ने बताया कि जैन संतों ने एटा जिले का नाम रोशन किया है। समाज के प्रमुख संतों में जिले के श्रावक अग्रणी रहे हैं। इसलिए एटा जिले को धार्मिक और पार्श्वनगरी माना जाता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed