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प्रशिक्षण भवन के लिए तीन वर्ष बाद मिली भूमि
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Wed, 21 Jan 2015 11:38 PM IST
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गरीबों व बेरोजगारों का सहारा कही जाने वाली राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत जिले में बनने वाले प्रशिक्षण भवन के लिए लीड बैंक को जमीन मिल गई है। यह जमीन हरिश्चद्रपुर जीटी रोड स्थित डायट के पास मिली है। योजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार प्रशिक्षण भवन के दो साल में बनने की उम्मीद है। बता दें कि लीड बैंक व डीआरडीए के बीच आपस में चल रही तनातनी के चलते यह प्रोजेक्ट लगभग तीन साल से अधर में फंसा हुआ था।
एनआरएलएम योजना के अंतर्गत रूट शेट्टी योजना के तहत प्रशिक्षण के लिए जिले में ट्रेनिंग कम रेजीडेंस बनना था। इससे पहले इस भवन के लिए जीटी रोड स्थित मानपुर के समीप डेढ़ एकड़ जमीन चयनित कर ली गई थी। मगर उस पर प्रशासन की सहमति नहीं बन पाई। डीआरडीए का आरोप था कि प्रशासन ने जितनी जमीन बैंक को दी थी बैंक ने उससे ज्यादा जमीन पर अपना कब्जा जमा लिया था। तीन साल पहले इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग डेढ़ करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन तीन साल से इस भवन का निर्माण न होने के चलते अब इसकी लागत की कीमत और बढ़ गई है। जमीन चयन में हुई देरी की एक वजह यह भी थी कि बैंक प्रशिक्षण भवन का निर्माण शहर में करवाना चाहती थी, जबकि ग्राम्य विकास के तहत इस योजना का लाभ ग्रामीणों को दिया जाएगा।
इसके चलते इसका निर्माण शहर से बाहर होना चाहिए ताकि ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण केंद्र पर आने जाने में कोई परेशानी न हो।बता दें कि एनआरएलएम पहले स्वर्ण जयंती स्व-रोजगार योजना (एसजीएसवाई) के नाम से जानी जाती थी। इन दोनों योजनाओं का उद्देश्य था कि जमीनी स्तर पर निर्धनों की सशक्त एवं स्थायी संस्था बनाकर ग्रामीण परिवारों को लाभप्रद रोजगार एवं हुनरमंद बनाया जाए। बेरोजगारों को रोजगार के अवसर पाने के लिए समर्थ बनाया जाए।
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रूट शेट्टी योजना के तहत बनने वाले प्रशिक्षण भवन के लिए जमीन मिल चुकी है। अब आगे की कार्रवाई की जा रही है। उम्मीद है कि दो सालों में भवन का निर्माण हो जाएगा।
- एसके वर्मा, प्रबंधक, रूट शेट्टी योजना
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एनआरएलएम योजना के अंतर्गत रूट शेट्टी योजना के तहत प्रशिक्षण के लिए जिले में ट्रेनिंग कम रेजीडेंस बनना था। इससे पहले इस भवन के लिए जीटी रोड स्थित मानपुर के समीप डेढ़ एकड़ जमीन चयनित कर ली गई थी। मगर उस पर प्रशासन की सहमति नहीं बन पाई। डीआरडीए का आरोप था कि प्रशासन ने जितनी जमीन बैंक को दी थी बैंक ने उससे ज्यादा जमीन पर अपना कब्जा जमा लिया था। तीन साल पहले इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग डेढ़ करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन तीन साल से इस भवन का निर्माण न होने के चलते अब इसकी लागत की कीमत और बढ़ गई है। जमीन चयन में हुई देरी की एक वजह यह भी थी कि बैंक प्रशिक्षण भवन का निर्माण शहर में करवाना चाहती थी, जबकि ग्राम्य विकास के तहत इस योजना का लाभ ग्रामीणों को दिया जाएगा।
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इसके चलते इसका निर्माण शहर से बाहर होना चाहिए ताकि ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण केंद्र पर आने जाने में कोई परेशानी न हो।बता दें कि एनआरएलएम पहले स्वर्ण जयंती स्व-रोजगार योजना (एसजीएसवाई) के नाम से जानी जाती थी। इन दोनों योजनाओं का उद्देश्य था कि जमीनी स्तर पर निर्धनों की सशक्त एवं स्थायी संस्था बनाकर ग्रामीण परिवारों को लाभप्रद रोजगार एवं हुनरमंद बनाया जाए। बेरोजगारों को रोजगार के अवसर पाने के लिए समर्थ बनाया जाए।
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रूट शेट्टी योजना के तहत बनने वाले प्रशिक्षण भवन के लिए जमीन मिल चुकी है। अब आगे की कार्रवाई की जा रही है। उम्मीद है कि दो सालों में भवन का निर्माण हो जाएगा।
- एसके वर्मा, प्रबंधक, रूट शेट्टी योजना