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लापरवाही की भेंट चढ़ रहा मातृत्व सप्ताह
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sat, 30 Jan 2016 11:23 PM IST
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गर्भवती महिलाओं के लिए प्रदेश शासन की महती मातृत्व सप्ताह योजना जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। उदासीनता दिखा रहे नोडल अधिकारियों ने चार दिन गुजरने के बाद भी निरीक्षण आख्या प्रेषित नहीं की है। ऐसे में कंट्रोल रूम पर भी सूचनाएं अपडेट नहीं हो रहीं। बताते चलें कि अभियान के सफल संचालन के लिए 16 नोडल अधिकारियों को नामित कर नियमित निरीक्षण आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की बढ़ रही मौतों पर गंभीर सरकार ने इसकी रोकथाम को रणनीति तैयार की है। शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रचार के बाद जिले में बुधवार से मातृत्व सप्ताह का शुभारंभ किया। तीन फरवरी तक चलने वाले इस अभियान में आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं एएनएम गांव-गांव पहुंचकर गर्भवती महिलाओं को शत प्रतिशत चिन्हित कर खून, सुगर, हीमोग्लोबिन और ब्लड प्रेशर की जांच करने के निर्देश दिए हैं। अभियान की निगरानी के लिए 16 नोडल अधिकारियों को लगाया गया है, जो अभियान की नियमित प्रगति आख्या भी प्रस्तुत करेंगे। इतना ही नहीं विभाग ने सभी सूचनाओं एवं अपडेट के लिए विकास भवन में एक कंट्रोल रूम की भी स्थापना की है।
बावजूद इसके अभियान को लेकर प्रशासन एवं नामित अधिकारी गंभीर नहीं हैं। सीडीओ कार्यालय से लेकर विकास भवन में बने कंट्रोल रूम तक चार दिन बाद भी कोई भी निरीक्षण आख्या एवं अपडेट नहीं है। यह उदासीनता तब है जब अभियान की नियमित समीक्षा प्रमुख सचिव से लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से स्वयं की जा रही है।
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प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की बढ़ रही मौतों पर गंभीर सरकार ने इसकी रोकथाम को रणनीति तैयार की है। शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रचार के बाद जिले में बुधवार से मातृत्व सप्ताह का शुभारंभ किया। तीन फरवरी तक चलने वाले इस अभियान में आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं एएनएम गांव-गांव पहुंचकर गर्भवती महिलाओं को शत प्रतिशत चिन्हित कर खून, सुगर, हीमोग्लोबिन और ब्लड प्रेशर की जांच करने के निर्देश दिए हैं। अभियान की निगरानी के लिए 16 नोडल अधिकारियों को लगाया गया है, जो अभियान की नियमित प्रगति आख्या भी प्रस्तुत करेंगे। इतना ही नहीं विभाग ने सभी सूचनाओं एवं अपडेट के लिए विकास भवन में एक कंट्रोल रूम की भी स्थापना की है।
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बावजूद इसके अभियान को लेकर प्रशासन एवं नामित अधिकारी गंभीर नहीं हैं। सीडीओ कार्यालय से लेकर विकास भवन में बने कंट्रोल रूम तक चार दिन बाद भी कोई भी निरीक्षण आख्या एवं अपडेट नहीं है। यह उदासीनता तब है जब अभियान की नियमित समीक्षा प्रमुख सचिव से लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से स्वयं की जा रही है।
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