{"_id":"6652310b6b2665bb33064124","slug":"how-the-talent-of-the-players-blossomed-not-only-in-the-stadium-but-also-in-the-coach-etah-news-c-25-agr1050-480566-2024-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etah News: स्टेडियम में कोच ही नहीं कैसे निखरे खिलाड़ियों की प्रतिभा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etah News: स्टेडियम में कोच ही नहीं कैसे निखरे खिलाड़ियों की प्रतिभा
Sun, 26 May 2024 12:12 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sun, 26 May 2024 12:12 AM IST
विज्ञापन
एटा। खिलाड़ियों की प्रतिभा निखरकर सामने आ सके, इसके लिए सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है। लेकिन शहर के गोविंद बल्लभ पंत स्टेडियम में कब्बडी के लिए कोच ही नहीं हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को खुद ही अभ्यास करना पड़ रहा है।
देश में खेलो इंडिया मुहिम चल रही है, जिससे खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन युवाओं की प्रतिभा निखारने में जिसका अहम रोल हो और वही न हो तो फिर कैसे युवा खेल पाएगा। शहर में स्पोर्ट्स स्टेडियम होने के बावजूद कबड्डी के कोच की कमी है। ऐसे में सिर्फ खेल के नाम पर युवाओं की प्रतिभा से भी खेला जा रहा है। कबड्डी खिलाड़ियों ने बताया स्टेडियम में रजिस्ट्रेशन शुल्क प्रति खिलाड़ी 175 रुपये लिया जाता हैं। इसके बाद कोई सुविधा नहीं दी जाती हैं। यहां तक की कबड्डी के लिए मैदान को भी खुद खिलाड़ियों द्वारा ही तैयार किया जाता हैं।
युवा खिलाड़ियों ने बताया की यहां कुछ सीनियर खिलाड़ी है जो अपनी दम पर राज्य और अंतरराष्ट्रीय खेलो में भाग ले चुके हैं, उन्ही के द्वारा हम लोगो को कबड्डी से जुड़ी जानकारी व सहयोग मिलता है। इसके अलावा स्टेडियम की तरफ से कोई सुविधा नहीं दी जा रही हैं। स्टेडियम में मौजूद खेलो इंडिया के कोच मणिकांत पटेल ने बताया की कबड्डी का अगर अच्छा कोच मिल जाए तो यह बच्चे भविष्य में देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
विज्ञापन
-- --
अगर कबड्डी का कोच मिल जाए तो हम लोग अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। स्टेडियम से भी हमें कोई सहूलियत नहीं मिलती हैं कबड्डी के लिए मैदान भी हम खिलाड़ी ही तैयार करते हैं।गोविंद, कबड्डी खिलाड़ी
-- -
कुछ सीनियर खिलाड़ी हैं, जिनकी वजह से हमें प्रशिक्षण मिल जाता है। वहीं स्टेडियम में कोई कबड्डी का कोच नहीं हैं।
करन, कबड्डी खिलाड़ी
-- -
स्टेडियम में शुरू से ही कोच की कमी रही हैं। अपनी दम पर खेल कर ही नेशनल तक पहुंचा हूं। अगर कबड्डी कोच मिल जाए तो हमारे शहर से बहुत से खिलाड़ी देश में नाम रोशन कर सकते हैं।
साहिल, नेशनल खिलाड़ी
शहर में स्टेडियम तो है, लेकिन कोच न होने की कमी खिलाड़ियों को हमेशा महसूस होती है। अगर कबड्डी कोच मिल जाए तो शहर से कई खिलाडि़यों की प्रतिभा निखर सकेगी।
सचिन कुमार, स्टेट खिलाड़ी
-- -
स्टेडियम में कोच नहीं है, इसके लिए डिमांड भेजी गई हैं। खिलाड़ियों को जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी भेजा जाता हैं। कबड्डी के बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार ही मैदान तैयार करते हैं, फिर भी कर्मचारियों से खिलाड़ियों का सहयोग कराया जाता है।पूजा भट्ट, उप जिला क्रीड़ाधिकारी
विज्ञापन
देश में खेलो इंडिया मुहिम चल रही है, जिससे खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन युवाओं की प्रतिभा निखारने में जिसका अहम रोल हो और वही न हो तो फिर कैसे युवा खेल पाएगा। शहर में स्पोर्ट्स स्टेडियम होने के बावजूद कबड्डी के कोच की कमी है। ऐसे में सिर्फ खेल के नाम पर युवाओं की प्रतिभा से भी खेला जा रहा है। कबड्डी खिलाड़ियों ने बताया स्टेडियम में रजिस्ट्रेशन शुल्क प्रति खिलाड़ी 175 रुपये लिया जाता हैं। इसके बाद कोई सुविधा नहीं दी जाती हैं। यहां तक की कबड्डी के लिए मैदान को भी खुद खिलाड़ियों द्वारा ही तैयार किया जाता हैं।
विज्ञापन
युवा खिलाड़ियों ने बताया की यहां कुछ सीनियर खिलाड़ी है जो अपनी दम पर राज्य और अंतरराष्ट्रीय खेलो में भाग ले चुके हैं, उन्ही के द्वारा हम लोगो को कबड्डी से जुड़ी जानकारी व सहयोग मिलता है। इसके अलावा स्टेडियम की तरफ से कोई सुविधा नहीं दी जा रही हैं। स्टेडियम में मौजूद खेलो इंडिया के कोच मणिकांत पटेल ने बताया की कबड्डी का अगर अच्छा कोच मिल जाए तो यह बच्चे भविष्य में देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
विज्ञापन
अगर कबड्डी का कोच मिल जाए तो हम लोग अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। स्टेडियम से भी हमें कोई सहूलियत नहीं मिलती हैं कबड्डी के लिए मैदान भी हम खिलाड़ी ही तैयार करते हैं।गोविंद, कबड्डी खिलाड़ी
कुछ सीनियर खिलाड़ी हैं, जिनकी वजह से हमें प्रशिक्षण मिल जाता है। वहीं स्टेडियम में कोई कबड्डी का कोच नहीं हैं।
करन, कबड्डी खिलाड़ी
स्टेडियम में शुरू से ही कोच की कमी रही हैं। अपनी दम पर खेल कर ही नेशनल तक पहुंचा हूं। अगर कबड्डी कोच मिल जाए तो हमारे शहर से बहुत से खिलाड़ी देश में नाम रोशन कर सकते हैं।
साहिल, नेशनल खिलाड़ी
शहर में स्टेडियम तो है, लेकिन कोच न होने की कमी खिलाड़ियों को हमेशा महसूस होती है। अगर कबड्डी कोच मिल जाए तो शहर से कई खिलाडि़यों की प्रतिभा निखर सकेगी।
सचिन कुमार, स्टेट खिलाड़ी
स्टेडियम में कोच नहीं है, इसके लिए डिमांड भेजी गई हैं। खिलाड़ियों को जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी भेजा जाता हैं। कबड्डी के बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार ही मैदान तैयार करते हैं, फिर भी कर्मचारियों से खिलाड़ियों का सहयोग कराया जाता है।पूजा भट्ट, उप जिला क्रीड़ाधिकारी