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Etah News: इतिहास के अभिलेखों में दर्ज होगा सकीट का किला
Sun, 10 Sep 2023 10:57 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sun, 10 Sep 2023 10:57 PM IST
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सकीट(एटा)। कस्बा स्थित एतिहासिक किला इतिहास के अभिलेखों में दर्ज होगा। साथ ही इससे जुड़े कई अनसुने पहलू भी सामने आ सकते हैं। रविवार को मेरठ और दिल्ली के इतिहास के जानकारों ने आकर यहां सर्वेक्षण किया।
रविवार को मेरठ यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफेसर विग्नेश कुमार और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्राेफेसर विनय कुमार भारद्वाज अपनी टीम के साथ सकीट में पहुंचे। यहां पुरातात्विक धरोवर किले का सर्वेक्षण शुरू किया। उन्होंने किले की चहारदीवारी, सैकड़ों वर्ष पुराना बना हुआ राजा-महाराजाओं के समय का कुंआ, मामू-भांजा की मजार व अलग-अलग भाषाओं के शिलालेखों और पट्टिकाओं को देखा। पट्टिकाओं के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी लेने की कोशिश की।
प्रोफेसर विनय भारद्वाज ने बताया कि हम लोग इतिहास के प्रोफेसर हैं। पुरानी धरोहर के बारे में जानकारी करने आए हैं। इतनी पुरानी धरोहर अभी तक इतिहास में कहीं अंकित नहीं है। हमारे द्वारा सर्वेक्षण किया जा रहा है कि इन धरोहरों को इतिहास में जगह देते हुए अंकित किया जाए। थाना प्रभारी केके लोधी ने टीम को सर्वेक्षण में मदद उपलब्ध कराई गई।
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नाप-जोख और तोड़-फोड़ के अंदेशे से सहमे लोग
किले के आसपास अतिक्रमण भी हावी है। ऐसे में जब टीम यहां पहुंची तो लोग सहम गए। चर्चा थी कि टीम नाप-जोख करने आई है। किले की जमीन को कब्जा मुक्त कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके बाद किले की घिरी हुई जमीन को खाली कराया जाएगा। ऐसे में कई लोगों के घर-दुकानें टूट सकते हैं।
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रविवार को मेरठ यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफेसर विग्नेश कुमार और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्राेफेसर विनय कुमार भारद्वाज अपनी टीम के साथ सकीट में पहुंचे। यहां पुरातात्विक धरोवर किले का सर्वेक्षण शुरू किया। उन्होंने किले की चहारदीवारी, सैकड़ों वर्ष पुराना बना हुआ राजा-महाराजाओं के समय का कुंआ, मामू-भांजा की मजार व अलग-अलग भाषाओं के शिलालेखों और पट्टिकाओं को देखा। पट्टिकाओं के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी लेने की कोशिश की।
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प्रोफेसर विनय भारद्वाज ने बताया कि हम लोग इतिहास के प्रोफेसर हैं। पुरानी धरोहर के बारे में जानकारी करने आए हैं। इतनी पुरानी धरोहर अभी तक इतिहास में कहीं अंकित नहीं है। हमारे द्वारा सर्वेक्षण किया जा रहा है कि इन धरोहरों को इतिहास में जगह देते हुए अंकित किया जाए। थाना प्रभारी केके लोधी ने टीम को सर्वेक्षण में मदद उपलब्ध कराई गई।
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नाप-जोख और तोड़-फोड़ के अंदेशे से सहमे लोग
किले के आसपास अतिक्रमण भी हावी है। ऐसे में जब टीम यहां पहुंची तो लोग सहम गए। चर्चा थी कि टीम नाप-जोख करने आई है। किले की जमीन को कब्जा मुक्त कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके बाद किले की घिरी हुई जमीन को खाली कराया जाएगा। ऐसे में कई लोगों के घर-दुकानें टूट सकते हैं।