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Etah: गुप्तकालीन अवशेषों को एक सदी से वैभव का इंतजार, प्रस्तावित है संग्रहालय, अब तक शुरू नहीं हुआ निर्माण

Thu, 20 Oct 2022 10:16 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Thu, 20 Oct 2022 10:16 AM IST
सार

अलीगंज तहसील के गांव बिल्सड़ में उत्खनन में गुप्तकालीन सीढ़ियां, चबूतरा, शिलालेख मिले थे। यह जगह एएसआई द्वारा संरक्षित है। संग्रहालय प्रस्तावित है, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है। 

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construction of the museum of the relics in village Bilsad has not started in etah
उत्खनन में मिला गुप्तकालीन अवशेष - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एटा की अलीगंज तहसील के गांव बिल्सड़ में गुप्तकालीन अवशेष हैं। इसे करीब 94 साल पहले संरक्षित किया गया था। कई बहुमूल्य अवशेष यहां दबे हुए हैं। पिछले साल खुदाई के दौरान सीढ़ियां, चबूतरा, शिलालेख मिला था। यहां संग्रहालय का निर्माण प्रस्तावित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक निर्माण की शुरुआत तक नहीं की गई।
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एक सदी से इन गुप्तकालीन अवशेषों को वैभव मिलने का इंतजार है। एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की टीम ने सितंबर 2021 में यहां खुदाई (उत्खनन) कराई थी। इसमें गुप्तकालीन पांचवीं सदी के अवशेष जमीन के नीचे से प्राप्त हुए। लाल पत्थर का फर्श और पांच सीढ़ियां मिलीं, जो मंदिर की थीं। साथ ही एक शिलालेख मिला, जिस पर महेंद्रादित्य लिखा हुआ है। 
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सम्राट कुमार गुप्त को दी गई थी महेंद्रादित्य की उपाधि

गौरतलब है कि गुप्तकाल के सम्राट कुमार गुप्त ने 415 ई. से 455 ई. तक शासन किया था। उसी दौरान उन्हें महेंद्रादित्य की उपाधि दी गई थी। ऐसे में यह अवशेष बहुत ही महत्वपूर्ण और गौरवशाली हैं। पुरातत्वविदों के अनुसार यहां और भी वृहद इतिहास जमीन में दबा हुआ है। एसआई की टीम ने पूरे क्षेत्र में बाउंड्रीवाल करवा दी। एक वर्ष से ज्यादा समय बीत चुका है। लेकिन इसके आगे अभी तक कुछ नहीं किया गया। 
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इसे लेकर क्षेत्रीय लोगों में निराशा है। ग्राम प्रधान बिल्सड़ पुवायां चंद्रशेखर पांडेय ने बताया कि लोगों के मन में इतिहास को जानने की जिज्ञासा है। यदि एएसआई पूरे क्षेत्र की खुदाई करे तो गांव में और भी कई महत्वपूर्ण एतिहासिक चीजें प्राप्त होंगी। हमारे गांव का इतिहास पांच हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। 

एएसआई के अधीक्षक आरके पटेल ने बताया कि स्मारक को सरंक्षित किया जा चुका है। इसके संबंध में जो उचित होगा वो किया जाएगा। बिल्सड़ में दो क्षेत्र हैं, दोनों ही संरक्षित हैं। 
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