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Etah News: प्लास्टिक के चलन से कांच बोतल उद्योग पर संकट
Wed, 08 Jul 2026 11:56 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 08 Jul 2026 11:56 PM IST
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फिरोजाबाद। पारंपरिक कांच उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले कांच बोतल कारोबार के सामने इन दिनों प्लास्टिक और टेट्रा पैक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बड़ा संकट खड़ा हो गया है। तरल पदार्थों, दवाओं और शराब की पैकेजिंग में प्लास्टिक के बढ़ते चलन ने लगभग एक लाख कामगारों की आजीविका से जुड़े इस उद्योग की तरक्की रोक दी है। उद्योग को संकट से उबारने के लिए वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब और बीयर कंपनियों में फिरोजाबाद निर्मित कांच की बोतलों का 50 प्रतिशत कोटा तय करने की घोषणा की थी, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी यह नीति धरातल पर नहीं उतर सकी है। दूसरी ओर, देशी-विदेशी शराब की पैकिंग में प्लास्टिक की शीशियों और टेट्रा पैक के बढ़ते इस्तेमाल ने स्थानीय उद्योग का गणित बिगाड़ दिया है।
वरिष्ठ उद्यमी राजकुमार मित्तल और संजय मित्तल के अनुसार, पहले दूध, तरल दवाएं, सेंट, कोल्डड्रिंक और ग्लूकोज बनाने वाली कंपनियों से कांच की बोतलों के भरपूर ऑर्डर मिलते थे, लेकिन बीते दो-तीन सालों में इन घरेलू कंपनियों ने कांच से दूरी बनाकर खुद ही प्लास्टिक की पैकेजिंग शुरू कर दी है, जिससे ऑर्डरों में भारी कटौती हुई है। देश के भीतर बेंगलुरु, कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, पंजाब और हरियाणा जैसे बड़े बाजारों में कांच बोतलों की मांग लगातार सिकुड़ रही है। हालांकि, अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के दम पर फिरोजाबाद की इकाइयां यूरोपीय और पड़ोसी देशों में निर्यात के भरोसे टिकी हुई हैं। उद्यमियों का मानना है कि यदि सरकार ने 50 प्रतिशत कोटे के वादे को कड़ाई से लागू नहीं किया, तो एक लाख मजदूरों के सामने रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
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वरिष्ठ उद्यमी राजकुमार मित्तल और संजय मित्तल के अनुसार, पहले दूध, तरल दवाएं, सेंट, कोल्डड्रिंक और ग्लूकोज बनाने वाली कंपनियों से कांच की बोतलों के भरपूर ऑर्डर मिलते थे, लेकिन बीते दो-तीन सालों में इन घरेलू कंपनियों ने कांच से दूरी बनाकर खुद ही प्लास्टिक की पैकेजिंग शुरू कर दी है, जिससे ऑर्डरों में भारी कटौती हुई है। देश के भीतर बेंगलुरु, कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, पंजाब और हरियाणा जैसे बड़े बाजारों में कांच बोतलों की मांग लगातार सिकुड़ रही है। हालांकि, अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के दम पर फिरोजाबाद की इकाइयां यूरोपीय और पड़ोसी देशों में निर्यात के भरोसे टिकी हुई हैं। उद्यमियों का मानना है कि यदि सरकार ने 50 प्रतिशत कोटे के वादे को कड़ाई से लागू नहीं किया, तो एक लाख मजदूरों के सामने रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
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