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जेल अस्पताल के लिए संजीवनी बनीं जेनरिक दवाएं
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जिला जेल ।संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। जिला कारागार के अस्पताल में नया प्रयोग किया गया है। इसमें मरीजों को जेनरिक दवाएं दी जा रहीं हैं, जो जेल अस्पताल के लिए संजीवनी का काम कर रहीं हैं। इनके इस्तेमाल से बंदियों के इलाज के बजट में करीब 25 फीसदी की कमी आई है। साथ ही चिकित्सक के अनुसार मरीजों पर इन दवाओं का असर भी अच्छा है और उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।
जेल अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. उत्सव जैन ने बताया कि यहां अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 60 से 70 मरीजों को उपचार दिया जाता है। वहीं नियमित रूप से सबसे ज्यादा रक्तचाप से संबंधित मरीज हैं। 50 लोगों की दवाएं लगातार चलती हैं। जबकि सांस की बीमारियों से संबंधित 20, डायबिटीज के 15 से 17 और हृदय संबंधी रोगों के 10 से 15 लोगों को दवाएं दी जातीं हैं। पहले बाजार से विभिन्न कंपनियों की दवाएं खरीदी जा रही थीं।
औसतन प्रति माह एक लाख रुपये का खर्च हो रहा था। इस बीच जन औषधि केंद्रों पर मिल रही जेनरिक दवाओं को खरीदने की योजना तैयार की। शहर के ही एक केंद्र से दवाएं लेना शुरू कर दीं। पहले वाली दवाओं की अपेक्षा इनके परिणाम बेहतर देखने को मिल रहे हैं। रोगियों को जल्दी फायदा मिल रहा है। ये दवाएं हर महीने करीब 75 हजार रुपये की आ रहीं हैं। इस तरह सरकार के 25 हजार रुपये की बचत भी हो रही है।
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जेल अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. उत्सव जैन ने बताया कि यहां अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 60 से 70 मरीजों को उपचार दिया जाता है। वहीं नियमित रूप से सबसे ज्यादा रक्तचाप से संबंधित मरीज हैं। 50 लोगों की दवाएं लगातार चलती हैं। जबकि सांस की बीमारियों से संबंधित 20, डायबिटीज के 15 से 17 और हृदय संबंधी रोगों के 10 से 15 लोगों को दवाएं दी जातीं हैं। पहले बाजार से विभिन्न कंपनियों की दवाएं खरीदी जा रही थीं।
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औसतन प्रति माह एक लाख रुपये का खर्च हो रहा था। इस बीच जन औषधि केंद्रों पर मिल रही जेनरिक दवाओं को खरीदने की योजना तैयार की। शहर के ही एक केंद्र से दवाएं लेना शुरू कर दीं। पहले वाली दवाओं की अपेक्षा इनके परिणाम बेहतर देखने को मिल रहे हैं। रोगियों को जल्दी फायदा मिल रहा है। ये दवाएं हर महीने करीब 75 हजार रुपये की आ रहीं हैं। इस तरह सरकार के 25 हजार रुपये की बचत भी हो रही है।
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