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Etah News: एफएसएल की जांच में बेनकाब होंगे पेपर लीक के गुनहगार
Fri, 07 Mar 2025 11:14 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 07 Mar 2025 11:14 PM IST
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एटा। जैथरा ब्लॉक क्षेत्र के पेपर लीक मामले में स्कूल प्रबंधक, केंद्र व्यवस्था और कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक पेपर लीक मामले से पूरी तरह पर्दा नहीं हटा है। इसकी परतें खोलने के लिए मोबाइल और डीवीआर को एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैब) में भेजा गया है। वहां से डाटा रिकवर होते ही पूरा मामला स्पष्ट हो जाएगा।जैथरा के चौधरी बीएल इंटर कॉलेज, नगला रेवती को बोर्ड परीक्षा का केंद्र बनाया गया है। यहां 1 मार्च को गणित की परीक्षा के दौरान पेपर के फोटो बोर्ड परीक्षा के ग्रुप पर वायरल हुए थे। स्टेटिक मजिस्ट्रेट डॉ. ब्रजेश कुमार यादव ने केंद्र व्यवस्थापक अंजू यादव के खिलाफ जैथरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
केंद्र व्यवस्थापक के पास जब्त किए गए मोबाइल से डाटा डिलीट किया गया था। यहां तक कि सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी डिलीट कर दिया गया। ताकि जांच में किसी तरह के साक्ष्य पुलिस के हाथ न लग सकें।
पुलिस ने जांच की तो पता लगा कि केंद्र व्यवस्थापक को जो मोबाइल दिया गया था, उसमें नंबर स्कूल प्रबंधक का लगा हुआ था। जिससे उसको सभी प्रशासनिक जानकारियां हासिल होती रहती थीं। पुलिस ने 4 मार्च को प्रबंधक संजय यादव और कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांशु को गिरफ्तार किया था। जबकि 5 मार्च को अंजू यादव को गिरफ्तार कर लिया।
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हालांकि कंप्यूटर ऑपरेटर पुलिस पूछताछ में स्वीकार कर चुका है कि पेपर वायरल करने के उद्देश्य से उसने केंद्र व्यवस्थापक के मोबाइल से फोटो लेकर अपने मोबाइल पर डाली थी, लेकिन धोखे से ये बोर्ड परीक्षा के ग्रुप में पड़ गई। लेकिन ठोस साक्ष्यों को एकत्रित करने और मामले की तह तक जाने के लिए मोबाइल और डीवीआर को डाटा रिकवरी के लिए एफएसएल भेजा गया है।
यहां खास बात यह भी है कि इस केंद्र के बारे में विभाग और प्रशासन पहले से ही जानकारी रखता था। 2023 में परीक्षा के दौरान यहां 6 छात्राएं नकल करते पकड़ी गई थीं। सभी पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद बदनाम विद्यालय को इस बार अति संवेदनशील की मुहर लगाकर फिर केंद्र बनाया गया। सीओ अलीगंज सुधांशु शेखर ने बताया कि तीन लोगों को जेल भेजा जा चुका। जांच लगातार जारी है।
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केंद्र व्यवस्थापक के पास जब्त किए गए मोबाइल से डाटा डिलीट किया गया था। यहां तक कि सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी डिलीट कर दिया गया। ताकि जांच में किसी तरह के साक्ष्य पुलिस के हाथ न लग सकें।
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पुलिस ने जांच की तो पता लगा कि केंद्र व्यवस्थापक को जो मोबाइल दिया गया था, उसमें नंबर स्कूल प्रबंधक का लगा हुआ था। जिससे उसको सभी प्रशासनिक जानकारियां हासिल होती रहती थीं। पुलिस ने 4 मार्च को प्रबंधक संजय यादव और कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांशु को गिरफ्तार किया था। जबकि 5 मार्च को अंजू यादव को गिरफ्तार कर लिया।
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हालांकि कंप्यूटर ऑपरेटर पुलिस पूछताछ में स्वीकार कर चुका है कि पेपर वायरल करने के उद्देश्य से उसने केंद्र व्यवस्थापक के मोबाइल से फोटो लेकर अपने मोबाइल पर डाली थी, लेकिन धोखे से ये बोर्ड परीक्षा के ग्रुप में पड़ गई। लेकिन ठोस साक्ष्यों को एकत्रित करने और मामले की तह तक जाने के लिए मोबाइल और डीवीआर को डाटा रिकवरी के लिए एफएसएल भेजा गया है।
यहां खास बात यह भी है कि इस केंद्र के बारे में विभाग और प्रशासन पहले से ही जानकारी रखता था। 2023 में परीक्षा के दौरान यहां 6 छात्राएं नकल करते पकड़ी गई थीं। सभी पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद बदनाम विद्यालय को इस बार अति संवेदनशील की मुहर लगाकर फिर केंद्र बनाया गया। सीओ अलीगंज सुधांशु शेखर ने बताया कि तीन लोगों को जेल भेजा जा चुका। जांच लगातार जारी है।