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खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का घेराव
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Tue, 01 Sep 2015 11:13 PM IST
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कस्बा में तीन दिन से खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा लाइसेंस के नाम पर की जा रही अवैध वसूली को लेकर दुकानदारों में आक्रोश पनप गया। मंगलवार को अवैध वसूली का विरोध करते हुए खाद्य निरीक्षक का घेराव कर नारेबाजी की। वहीं खाद्य विभाग के अधिकारियों के वसूली न किए जाने के आश्वासन पर ही माने।
तीन दिन से खाद्य विभाग के अधिकारियों में खाद्य निरीक्षक आरके सिंह एवं उनकी टीम सैंपलिंग और लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली कर रही थे। मंगलवार शाम चार बजे जैसे ही खाद्य विभाग के अधिकारी पुराने अस्पताल चौराहे पर आए और उन्होंने चाय की दुकान, खोखे वालों से वसूली करने का प्रयास किया तभी दुकानदारों ने उनका घेराव कर लिया और मारपीट पर उतारू हो गए। दुकानदारों का विरोध देखकर टीम ने ऐसे वसूली न करने का आश्वासन दिया तब उन्हें छोड़ा। हालांकि कस्बा के दुकानदारों के यहां से खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग तो हुई लेकिन आज तक उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई।
वसूली करते हैं लेकिन पंजीकरण नहीं
कस्बा में सैंकड़ों दुकानदार से हर साल लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। लेकिन उनका पंजीकरण कभी नहीं कराया जाता है। जिससे दुकानदार असंतुष्ट रहते हैं। आरोप है अधिकारी इससे अपनी आमदनी करते हैं। लाइसेंस के नाम पर सौ की जगह एक हजार दो और रुपये और सैंपलिंग लैब में न भेजे जाने के लिए पांच से दस हजार की वसूली की जाती है।
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तीन दिन से खाद्य विभाग के अधिकारियों में खाद्य निरीक्षक आरके सिंह एवं उनकी टीम सैंपलिंग और लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली कर रही थे। मंगलवार शाम चार बजे जैसे ही खाद्य विभाग के अधिकारी पुराने अस्पताल चौराहे पर आए और उन्होंने चाय की दुकान, खोखे वालों से वसूली करने का प्रयास किया तभी दुकानदारों ने उनका घेराव कर लिया और मारपीट पर उतारू हो गए। दुकानदारों का विरोध देखकर टीम ने ऐसे वसूली न करने का आश्वासन दिया तब उन्हें छोड़ा। हालांकि कस्बा के दुकानदारों के यहां से खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग तो हुई लेकिन आज तक उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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वसूली करते हैं लेकिन पंजीकरण नहीं
कस्बा में सैंकड़ों दुकानदार से हर साल लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। लेकिन उनका पंजीकरण कभी नहीं कराया जाता है। जिससे दुकानदार असंतुष्ट रहते हैं। आरोप है अधिकारी इससे अपनी आमदनी करते हैं। लाइसेंस के नाम पर सौ की जगह एक हजार दो और रुपये और सैंपलिंग लैब में न भेजे जाने के लिए पांच से दस हजार की वसूली की जाती है।
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