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हर एमबीबीएस छात्र एक परिवार को लेगा गोद
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प्राचार्य डॉ रजनी पटेल ।संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाला एमबीबीएस का हर छात्र एक परिवार को गोद लेगा। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने यह नई पहल की है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गोद लिया जाएगा। छात्र उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की देखरेख भी करेंगे।
अबंतीवाई लोधी स्वशासी राज्य महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में एमबीबीएस की शिक्षा लेने वाले 86 छात्र-छात्राएं हैं। काउंसिलिंग जारी है, कुल मिलाकर 100 छात्रों का प्रवेश होना है। एमबीबीएस छात्र पढ़ाई के साथ-साथ ये छात्र नैतिकता का भी पाठ पढ़ेंगे। गांव का रुख करके ग्रामीणों की सेहत का ख्याल रखेंगे। एनएमसी के नियमों के तहत एमबीबीएस के हर छात्र-छात्राओं को आर्थिक रूप से कमजोर एक-एक परिवार को गोद लेना होगा। इससे ग्रामीणों के साथ संवाद करने का भी मौका मिलेगा। वहीं आम आदमी की दिक्कतों को भी जान सकेंगे और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मूलभूत समस्याओं को भी समझेंगे।
प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल ने बताया कि एनएमसी के नियमों में प्रावधान किया गया है कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों को आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गोद लेना होगा। इसी के तहत छात्र एक-एक परिवार को गोद लेंगे और उनके स्वास्थ्य के अलावा मूलभूत समस्याओं का भी निदान कराने में सहयोग करेंगे। इनको ग्रामीण परिवेश समझने का मौका मिलेगा ताकि भविष्य में बेहतर सूझबूझ के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को निपटाने में सक्षम बन सकें।
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अबंतीवाई लोधी स्वशासी राज्य महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में एमबीबीएस की शिक्षा लेने वाले 86 छात्र-छात्राएं हैं। काउंसिलिंग जारी है, कुल मिलाकर 100 छात्रों का प्रवेश होना है। एमबीबीएस छात्र पढ़ाई के साथ-साथ ये छात्र नैतिकता का भी पाठ पढ़ेंगे। गांव का रुख करके ग्रामीणों की सेहत का ख्याल रखेंगे। एनएमसी के नियमों के तहत एमबीबीएस के हर छात्र-छात्राओं को आर्थिक रूप से कमजोर एक-एक परिवार को गोद लेना होगा। इससे ग्रामीणों के साथ संवाद करने का भी मौका मिलेगा। वहीं आम आदमी की दिक्कतों को भी जान सकेंगे और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मूलभूत समस्याओं को भी समझेंगे।
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प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल ने बताया कि एनएमसी के नियमों में प्रावधान किया गया है कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों को आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गोद लेना होगा। इसी के तहत छात्र एक-एक परिवार को गोद लेंगे और उनके स्वास्थ्य के अलावा मूलभूत समस्याओं का भी निदान कराने में सहयोग करेंगे। इनको ग्रामीण परिवेश समझने का मौका मिलेगा ताकि भविष्य में बेहतर सूझबूझ के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को निपटाने में सक्षम बन सकें।
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