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एटा: डेंगू की जांच के नाम पर पैथोलॉजी संचालक कर रहे लूट
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ठंडी सड़क स्थित एक पैथलॉजी लैब।संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। डेंगू की जांच के नाम पर पैथोलॉजी संचालक मनमानी फीस वसूल कर रहे है। जबकि डेंगू कार्ड की कीमत 120 रुपये है। लेकिन जांच के नाम पर मरीज से एक हजार रुपये लिए जा रहे हैं।
जनपद में शहर से लेकर देहात तक बुखार के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भले ही लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए कैंप लगा रहा है, लेकिन बुखार पीड़ितों की क्लीनिक से लेकर नर्सिंग होमो में भीड़ देखी जा सकती है। विभाग का दावा है कि जिले में सिर्फ डेंगू के 18 केस समाने आए हैं, लेकिन पैथोलॉजी पर जांच में प्रतिदिन चार-पांच केस बताए जा रहे हैं। हालांकि इनकी विश्वसनीयता को लेकर संशय बना रहता है।
दरअसल, जिले में 100 से अधिक निजी पैथोलॉजी लैब संचालित की जा रही हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग में नियमानुसार कुछ छह लैब ही पंजीकृत हैं। ऐसे में बिना मानक वाली इन लैब की रिपोर्ट संदेहास्पद तो रहती है। साथ ही मरीजों से फीस भी जमकर वसूली जा रही है। 40 लैब ऐसी हैं, जो डेंगू की जांचें कर रही हैं। जहां हर दिन प्रत्येक लैब पर पांच से छह लोगों की डेंगू जांच की जा रही है। इनसे जांच के एक हजार रुपये लिए जाते हैं।
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बोले बुखार से पीड़ित
पांच दिन से बुखार आ रहा था। चिकित्सक को दिखाया तो जांच कराने की बात कही। लैब पर डेंगू की जांच के एक हजार रुपये लिए गए। कार्ड से जांच की गई। बताया गया कि डेंगू के लक्षण हैं।
- दिनेश
एक सप्ताह से बुखार आ रहा है। शिकोहाबाद रोड एक क्लीनिक पर दवा लेने आया हूं। डॉक्टर ने जांच कराने की बात कही। वहीं डेंगू कह जांच के एक हजार व अन्य जांच के 400 रुपये लिए है। अभी रिपोर्ट नहीं आई है।
- रामनरेश
पैथोलॉजी संचालकों को स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट करनी चाहिए, जिससे मरीज का एलाइजा टेस्ट हो सके। जिले में बड़ी संख्या में अपंजीकृत पैथोलॉजी संचालित हैं। कई बार अपंजीकृत नर्सिंग होम, क्लीनिक व पैथोलॉजी का मुद्दा उठाया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अपंजीकृत पैथोलॉजी सहित नर्सिंग होम व क्लीनिकों पर विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए।
-डॉ. स्वतंत्र शर्मा, आईएमए जिलाध्यक्ष
जिले में अपंजीकृत पैथोलॉजी सहित क्लीनिक व नर्सिंग होम पर छापा मारा गया है। पैथोलॉजी संचालक सहित नर्सिंग होम वाले किट से जांच कर रहे हैं। जबकि डेंगू में एलाइजा जांच महत्वपूर्ण होती है। वह जानकारी दें तो मरीजों की एलाइजा जांच की जाए और हकीकत सामने आ सके। वर्तमान में जिले में डेंगू का एक भी मरीज नहीं है।
-डॉ. उमेश त्रिपाठी, सीएमओ
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जनपद में शहर से लेकर देहात तक बुखार के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भले ही लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए कैंप लगा रहा है, लेकिन बुखार पीड़ितों की क्लीनिक से लेकर नर्सिंग होमो में भीड़ देखी जा सकती है। विभाग का दावा है कि जिले में सिर्फ डेंगू के 18 केस समाने आए हैं, लेकिन पैथोलॉजी पर जांच में प्रतिदिन चार-पांच केस बताए जा रहे हैं। हालांकि इनकी विश्वसनीयता को लेकर संशय बना रहता है।
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दरअसल, जिले में 100 से अधिक निजी पैथोलॉजी लैब संचालित की जा रही हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग में नियमानुसार कुछ छह लैब ही पंजीकृत हैं। ऐसे में बिना मानक वाली इन लैब की रिपोर्ट संदेहास्पद तो रहती है। साथ ही मरीजों से फीस भी जमकर वसूली जा रही है। 40 लैब ऐसी हैं, जो डेंगू की जांचें कर रही हैं। जहां हर दिन प्रत्येक लैब पर पांच से छह लोगों की डेंगू जांच की जा रही है। इनसे जांच के एक हजार रुपये लिए जाते हैं।
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बोले बुखार से पीड़ित
पांच दिन से बुखार आ रहा था। चिकित्सक को दिखाया तो जांच कराने की बात कही। लैब पर डेंगू की जांच के एक हजार रुपये लिए गए। कार्ड से जांच की गई। बताया गया कि डेंगू के लक्षण हैं।
- दिनेश
एक सप्ताह से बुखार आ रहा है। शिकोहाबाद रोड एक क्लीनिक पर दवा लेने आया हूं। डॉक्टर ने जांच कराने की बात कही। वहीं डेंगू कह जांच के एक हजार व अन्य जांच के 400 रुपये लिए है। अभी रिपोर्ट नहीं आई है।
- रामनरेश
पैथोलॉजी संचालकों को स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट करनी चाहिए, जिससे मरीज का एलाइजा टेस्ट हो सके। जिले में बड़ी संख्या में अपंजीकृत पैथोलॉजी संचालित हैं। कई बार अपंजीकृत नर्सिंग होम, क्लीनिक व पैथोलॉजी का मुद्दा उठाया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अपंजीकृत पैथोलॉजी सहित नर्सिंग होम व क्लीनिकों पर विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए।
-डॉ. स्वतंत्र शर्मा, आईएमए जिलाध्यक्ष
जिले में अपंजीकृत पैथोलॉजी सहित क्लीनिक व नर्सिंग होम पर छापा मारा गया है। पैथोलॉजी संचालक सहित नर्सिंग होम वाले किट से जांच कर रहे हैं। जबकि डेंगू में एलाइजा जांच महत्वपूर्ण होती है। वह जानकारी दें तो मरीजों की एलाइजा जांच की जाए और हकीकत सामने आ सके। वर्तमान में जिले में डेंगू का एक भी मरीज नहीं है।
-डॉ. उमेश त्रिपाठी, सीएमओ