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Etah News: बदलती जीवनशैली और तनाव से बढ़ रहा थायराइड, युवा भी चपेट में
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एटा। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण थायराइड की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। पहले इसे बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, लेकिन अब युवा और किशोर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। एटा के मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब 40 मरीज थायराइड संबंधी समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों ने बताया यदि समय रहते जांच और उपचार न कराया जाए तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है। एटा मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है। यहां आने वाले मरीजों में महिलाओं और युवाओं की संख्या सबसे अधिक है।
थायराइड गले में मौजूद एक छोटी ग्रंथि है। यह शरीर के लिए आवश्यक हार्मोन का उत्पादन करती है। ये हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं, जैसे ऊर्जा और पाचन। हार्मोन का असंतुलन, चाहे कम हो या अधिक, गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। चिकित्सकों ने समय पर जांच और उपचार को महत्वपूर्ण बताया है।-- -
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थकान, वजन बढ़ना और चिड़चिड़ापन हैं प्रमुख संकेत : लगातार थकान रहना, अचानक वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, हाथ कांपना, नींद कम आना, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना और गले में सूजन इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ी और गर्भधारण में परेशानी भी थाइराइड के कारण हो सकती है। वहीं बच्चों और युवाओं में यह बीमारी पढ़ाई, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक विकास पर असर डाल सकती है।
दो प्रकार की होती है बीमारी
थाइराइड दो प्रकार का होता है। इसमें हाइपोथायाइड होने पर अचानक वजन बढ़ने लगता है। इस कारण महिलाएं काम में रुचि नहीं लेती है, माहवारी अनियमित हो जाती है। जोड़ों में पानी भर जाता है, जिससे पैरों में सूजन आ जाती है। यह 30 से 60 वर्ष की महिलाओं में अधिक होता है। दूसरा हाइपर थाइराइड होता है, जिसमें वजन अचानक कम होने लगता है। गर्मी बर्दाश्त नहीं होती है। इसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
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इलाज में लापरवाही पड़ सकती है भारी
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य बलवीर सिंह के मुताबिक कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक उपचार न मिलने पर यह बीमारी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मानसिक तनाव और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। चिकित्सकीय सलाह से इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। मरीजों को बिना डाक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए। मेडिकल कॉलेज में इसकी जांच कराने महीने में 1200 से अधिक लोग आते हैं। जांच के लिए 300 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। हालांकि, निजी लैबों में इसकी जांच 500 से 700 रुपये तक की होती है।
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सुबह-शाम टहलने से काबू में थायराइड
फोटो-
जैथरा गांव गांव गुजरई निवासी राजकुमारी पत्नी अवनीश शाक्य ने बताया कि वह करीब सात वर्ष से थायराइड से परेशान थीं। गले में कभी पैरों में सूजन रहती थी। सुबह-शाम नियमित टहलने से मुझे लाभ मिला। संतुलित खानपान से बीमारी नियंत्रण में है।
थाइराइड से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां
- संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
- आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करें।
- नियमित व्यायाम और योग करें।
- तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।
- पर्याप्त नींद लें और दिनचर्या नियमित रखें।
वजन और स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करवाएं।
- लगातार थकान या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
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एक्सपर्ट की राय
जागरूकता और समय पर उपचार से थाइराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। लापरवाही बरतने पर यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। पहले केवल 50 साल के बाद यह बीमारी देखने को मिलती थी, लेकिन अब तो युवा इसकी चपेट में आ रहे है।
- डाॅ. बलवीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज एटा
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चिकित्सकों ने बताया यदि समय रहते जांच और उपचार न कराया जाए तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है। एटा मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है। यहां आने वाले मरीजों में महिलाओं और युवाओं की संख्या सबसे अधिक है।
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थायराइड गले में मौजूद एक छोटी ग्रंथि है। यह शरीर के लिए आवश्यक हार्मोन का उत्पादन करती है। ये हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं, जैसे ऊर्जा और पाचन। हार्मोन का असंतुलन, चाहे कम हो या अधिक, गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। चिकित्सकों ने समय पर जांच और उपचार को महत्वपूर्ण बताया है।
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थकान, वजन बढ़ना और चिड़चिड़ापन हैं प्रमुख संकेत : लगातार थकान रहना, अचानक वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, हाथ कांपना, नींद कम आना, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना और गले में सूजन इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ी और गर्भधारण में परेशानी भी थाइराइड के कारण हो सकती है। वहीं बच्चों और युवाओं में यह बीमारी पढ़ाई, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक विकास पर असर डाल सकती है।
दो प्रकार की होती है बीमारी
थाइराइड दो प्रकार का होता है। इसमें हाइपोथायाइड होने पर अचानक वजन बढ़ने लगता है। इस कारण महिलाएं काम में रुचि नहीं लेती है, माहवारी अनियमित हो जाती है। जोड़ों में पानी भर जाता है, जिससे पैरों में सूजन आ जाती है। यह 30 से 60 वर्ष की महिलाओं में अधिक होता है। दूसरा हाइपर थाइराइड होता है, जिसमें वजन अचानक कम होने लगता है। गर्मी बर्दाश्त नहीं होती है। इसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
इलाज में लापरवाही पड़ सकती है भारी
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य बलवीर सिंह के मुताबिक कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक उपचार न मिलने पर यह बीमारी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मानसिक तनाव और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। चिकित्सकीय सलाह से इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। मरीजों को बिना डाक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए। मेडिकल कॉलेज में इसकी जांच कराने महीने में 1200 से अधिक लोग आते हैं। जांच के लिए 300 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। हालांकि, निजी लैबों में इसकी जांच 500 से 700 रुपये तक की होती है।
सुबह-शाम टहलने से काबू में थायराइड
फोटो-
जैथरा गांव गांव गुजरई निवासी राजकुमारी पत्नी अवनीश शाक्य ने बताया कि वह करीब सात वर्ष से थायराइड से परेशान थीं। गले में कभी पैरों में सूजन रहती थी। सुबह-शाम नियमित टहलने से मुझे लाभ मिला। संतुलित खानपान से बीमारी नियंत्रण में है।
थाइराइड से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां
- संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
- आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करें।
- नियमित व्यायाम और योग करें।
- तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।
- पर्याप्त नींद लें और दिनचर्या नियमित रखें।
वजन और स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करवाएं।
- लगातार थकान या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
एक्सपर्ट की राय
जागरूकता और समय पर उपचार से थाइराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। लापरवाही बरतने पर यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। पहले केवल 50 साल के बाद यह बीमारी देखने को मिलती थी, लेकिन अब तो युवा इसकी चपेट में आ रहे है।
- डाॅ. बलवीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज एटा