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Election 2024: अखिलेश यादव के दिग्गज सलाखों के पीछे... तो कुछ बन गए भगवाधारी; बिन खेवैया, कैसे पार होगी नैया?

Thu, 11 Apr 2024 09:11 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Thu, 11 Apr 2024 09:11 AM IST
सार

Election 2024: एटा जिले में अखिलेश यादव के कुछ दिग्गज सलाखों के पीछे हैं तो कुछ भगवाधारी बन गए। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जिले में बिन खेवैया, कैसे पार होगी सपा की नैया?

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Election 2024 Many leaders of Akhilesh Yadav left party and joined BJP in Etah This election tough test for SP
अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के एटा में सपा के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव कड़ा इम्तिहान है। दरअसल पिछले चुनावों में अहम भूमिका निभाने वाले बड़े नाम इस बार गुमनाम हैं। कई भाजपा में शामिल हो गए तो कुछ जेल की सलाखों के पीछे हैं। ऐसे में बचे हुए कुनबे को जोड़कर चुनाव में ताकत झोंकने की कोशिश की जा रही है।लोकसभा चुनाव से काफी पहले ही सपा के खेमे में सेंध लगना शुरू हो गई थी।
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जिले में सपा के बड़े नेता और मुलायम सिंह के करीबी रमेश यादव उप्र विधान परिषद के सभापति भी रहे। उनके नेतृत्व में जिले में कई चुनाव लड़े गए। हालांकि विधान परिषद सभापति कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने स्वयं की तो राजनीतिक रूप से सक्रियता लगभग खत्म कर दी। लेकिन उनके पूर्व सपा से पूर्व सदर विधायक आशीष यादव उर्फ आशू ने मार्च 2022 में सपा छोड़ भाजपा की सदस्यता ले ली। पार्टी के टिकट पर एमएलसी भी चुने गए, वर्तमान में इस पद पर पार्टी के साथ हैं।
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लिस्ट और भी लंबी है...

जिले में सपा के दूसरे दिग्गज पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव और उनके भाई पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव माने जाते हैं। दोनों ही इस समय जेल में निरुद्ध हैं। ऐसे में प्रत्याशी और कार्यकर्ताओं को उनके अनुभव और नेतृत्व का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कासगंज के जिलाध्यक्ष रहे पूर्व सांसद देवेंद्र सिंह यादव भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इनके अलावा लिस्ट और भी लंबी है।

भगवाधारी हो गए सपा के पदाधिकारी

सपा के तमाम पदाधिकारी और पूर्व जनप्रतिनिधि भगवा ओढ़ चुके हैं। यहां तक कि टिकट की दावेदारी कर रहे शाक्य समाज के डॉ. आशीष शाक्य भी भाजपा में पहुंच गए। जबकि इस बार सपा ने प्रत्याशी भी बाहर से भेजा है। ऐसे में उसे स्थानीय स्तर पर संगठन का उतना साथ नहीं मिल पा रहा, जो पिछले चुनावों में रहता था।
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यादव मतदाताओं के लिए असमंजस

यूं तो यादव मतदाताओं को सपा का बेस वोट बैंक माना जाता है। साइकिल का चुनाव चिह्न देखकर यह वर्ग मतपत्र मेंं मुहर या ईवीएम का बटन दबा देता है। लेकिन इस बार जो हालात बन रहे हैं, उसको लेकर यह वर्ग भी असमंजस की स्थिति में है। पार्टी के तमाम यादव नेता भाजपा में पहुंच गए हैं। ऐसे में उनके समर्थकों का भी मन भटक रहा है।

एक ओर घर वापसी तो दूसरी ओर छोड़ रहे घर

सत्ता की चमक के आगे भाजपा के अंदर गिले-शिकबे भी दूर हो रहे हैं। टिकट न मिलने पर जो लोग स्थानीय नगर निकाय में साथ छोड़ गए थे, वो भी घर वापसी कर चुके हैं। वहीं, सपा में अपने घर के सदस्यों को रोकना मुश्किल हो गया है। कब कौन सा नेता भाजपा में शामिल हो जाए, इसकी भनक जिम्मेदारों को तक नहीं होती।
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