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Etah News: अनुबंध पर खेती के रास्ते ऊंचाइयां छू रही चिकोरी,1200 किसानों से की थी शुरुआत, अब 30 हजार किसानों के खेतों में हो रही फसल

Sat, 14 Jan 2023 11:28 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 14 Jan 2023 11:28 PM IST
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सकीट क्षेत्र में चिकोरी की फसल की देखभाल करता किसान। संवाद - फोटो : ETAH
एटा। एटा की चिकोरी को जीआई टैग मिलने जा रहा है। हालांकि इसकी जिले में परंपरागत खेती नहीं है। किसान न तो इसे जानते थे और न ही इसकी पैदावार के पक्ष में थे। सबसे पहले हिंदुस्तान यूनीलीवर लि. ने कांट्रेक्ट फार्मिंग के जरिए किसानों को जोड़ा। इसके बाद निजी क्षेत्र में सबसे पहले औद्यानिक उत्पादन सहकारी समिति ने कांट्रेक्ट पर खेती कराना शुरू किया। 1200 किसानों से शुरू हुई इस खेती में अब करीब 30 हजार किसान शामिल हो चुके हैं।
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मुख्य रूप से गुजरात में इसकी खेती की जाती थी। पैदावार को मल्टीनेशनल कंपनी खरीदती थीं। उत्पादन में कमी आने पर हिंदुस्तान यूनीलीवर लि. ने एटा में प्लांट स्थापित कर 1984 से चिकोरी की कांट्रेक्ट फार्मिंग शुरू कराई। 1999 में जिले के चार-पांच व्यापारियों ने इस ओर रुख किया। उन्होंने औद्यानिक उत्पादन सहकारी समिति बनाकर 1200 किसानों को खेती के लिए तैयार किया। अब छोटी-बड़ी नौ इकाइयां चल रही हैं। यह चिकोरी की फसल कराने के बाद इसे खरीदकर विभिन्न तरीके से प्रोसेसिंग कराती हैं। 30 हजार किसान करीब 16 हजार एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं। संवाद
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देश में नहीं मिलता है बीज
चिकोरी का बीज देश के बाजारों में उपलब्ध नहीं है। इसे फ्रांस, इटली, हॉलैंड आदि देशों से मंगाया जाता है। यह काफी महंगा भी है। वर्तमान में बीज का रेट 6500 रुपये प्रति किलो है।
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बीज देते समय ही तय हो जाता है सौदा
चिकोरी प्रोसेसिंग प्लांट संचालक किसानों को बीज मंगाकर देते हैं। उसी समय उपज का सौदा और रेट तय हो जाता है। मार्च-अप्रैल में इसे बोया जाता है। सितंबर-अक्तूबर में उत्पादन प्लांट पर पहुंचते ही तय रेट पर भुगतान कर दिया जाता है।
5 क्विंटल बीज से शुरू हुआ सफर
चिकोरी उत्पादन का सफर 5 क्विंटल बीज से शुरू हुआ। जिसे उस समय 1200 किसानों में बांटा गया। धीरे-धीरे किसानों की संख्या और बीज की मांग बढ़ने लगी। वर्तमान में जिले में करीब 80 क्विंटल बीज बांटा जा रहा है। जिले की बलुई दोमठ मिट्टी और जलवायु इसके अनुकूल है।
निश्चित रेट और कम जोखिम है आकर्षण
चिकोरी की फसल में रेट निश्चित है। यह बीज देते समय ही तय हो जाता है। ऐसे में किसानों को उत्पादन के बाद इसके लिए मंडी तलाशना या रेट में कमी जैसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता। वहीं कसैले स्वाद की वजह से इस फसल को आवारा पशु भी खराब नहीं करते। जिसके चलते जोखिम कम है। इन्हीं वजहों से किसान इसके प्रति आकर्षित हो रहे हैं।

क्या है चिकोरी
चिकोरी पौधे की जड़ है। यह मूली के आकार की होती है। इसे सुखाकर मशीनों में भूना जाता है। इसके बाद इसमें कॉफी जैसा स्वाद आ जाता है। इसका कॉफी पाउडर में मिश्रण किया जाता है। वहीं इसे सीधे चाय-कॉफी की तरह भी पीया जा सकता है।
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