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Etah News: बारिश के बीच फसलों को नुकसान, हाईवे पर मक्का सुखा रहे किसान
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दिल्ली-कानपुर हाईवे पर नगरिया मोड़ के पास सर्विस रोड पर फैलाई मक्का। संवाद
एटा। जिले में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी बारिश तो कभी तेज धूप व उसम के कारण खेतों में नमी बनी हुई है और कई फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसान अपनी भीगी हुई मक्का को सड़कों पर सुखाने को मजबूर हैं। इससे हादसों का डर बना हुआ है।
सोमवार को अधिकतम तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई, जिससे गर्मी और उसम बढ़ी। मंगलवार को तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। कृषि मौसम वैज्ञानिक एसके सिंह के अनुसार, मौसम के उतार-चढ़ाव का असर खेती-किसानी पर साफ दिख रहा है। जून की शुरुआत में हुई बारिश से खेतों में रखी मक्का की फसल भीग गई थी। बीते दिनों जून में हुई बारिश से तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। मंगलवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहा। किसान मक्का को खराब होने से बचाने के लिए गांव की गलियों और सड़कों पर सुखा रहे हैं। पिलुआ, नगरिया मोड़ और भदवास जैसे गांवों में भी किसान भीगी मक्का को सड़कों पर फैलाकर सुखा रहे हैं। किसानों को आशंका है कि यदि फिर बारिश हुई तो मक्का, मूंग, उड़द और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान होगा।
स्वास्थ्य पर मौसमी बीमारियों का असर
मौसम के इस बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। दिन में तेज गर्मी, उसम और बीच-बीच में बारिश से मौसमी बीमारियां बढ़ रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों में इन बीमारियों के मामले अधिक देखे जा रहे हैं। चिकित्सकों ने लोगों को बदलते मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है।-- -
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सड़क पर मक्का सुखाने पर फिसल रहे वाहन
फोटो-
राजा का रामपुर। पहरा-रुदायन मार्ग पर किसानों के मक्का सुखाने से राहगीर परेशान हैं। कस्बे से रुदायन तक पूरे मार्ग पर जगह-जगह किसानों ने सड़क पर मक्का डाल रखी है। सड़क पर मक्का होने पर बाइक और स्कूटी के फिसलने का खतरा रहता है, कई दो पहिया वाहन गिरकर चोटिल हो चुके हैं। कस्बे के मोहित तिवारी ने बताया वह कार से गुजर रहे थे तो मक्का के ढेर से टकराकर उनकी कार का बंपर क्षतिग्रस्त हो गया। क्षेत्र के लोगों ने सड़क पर सूख रही मक्का की फसल को हटवाने की मांग की है। संवाद
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सोमवार को अधिकतम तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई, जिससे गर्मी और उसम बढ़ी। मंगलवार को तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। कृषि मौसम वैज्ञानिक एसके सिंह के अनुसार, मौसम के उतार-चढ़ाव का असर खेती-किसानी पर साफ दिख रहा है। जून की शुरुआत में हुई बारिश से खेतों में रखी मक्का की फसल भीग गई थी। बीते दिनों जून में हुई बारिश से तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। मंगलवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहा। किसान मक्का को खराब होने से बचाने के लिए गांव की गलियों और सड़कों पर सुखा रहे हैं। पिलुआ, नगरिया मोड़ और भदवास जैसे गांवों में भी किसान भीगी मक्का को सड़कों पर फैलाकर सुखा रहे हैं। किसानों को आशंका है कि यदि फिर बारिश हुई तो मक्का, मूंग, उड़द और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान होगा।
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स्वास्थ्य पर मौसमी बीमारियों का असर
मौसम के इस बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। दिन में तेज गर्मी, उसम और बीच-बीच में बारिश से मौसमी बीमारियां बढ़ रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों में इन बीमारियों के मामले अधिक देखे जा रहे हैं। चिकित्सकों ने लोगों को बदलते मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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सड़क पर मक्का सुखाने पर फिसल रहे वाहन
फोटो-
राजा का रामपुर। पहरा-रुदायन मार्ग पर किसानों के मक्का सुखाने से राहगीर परेशान हैं। कस्बे से रुदायन तक पूरे मार्ग पर जगह-जगह किसानों ने सड़क पर मक्का डाल रखी है। सड़क पर मक्का होने पर बाइक और स्कूटी के फिसलने का खतरा रहता है, कई दो पहिया वाहन गिरकर चोटिल हो चुके हैं। कस्बे के मोहित तिवारी ने बताया वह कार से गुजर रहे थे तो मक्का के ढेर से टकराकर उनकी कार का बंपर क्षतिग्रस्त हो गया। क्षेत्र के लोगों ने सड़क पर सूख रही मक्का की फसल को हटवाने की मांग की है। संवाद

दिल्ली-कानपुर हाईवे पर नगरिया मोड़ के पास सर्विस रोड पर फैलाई मक्का। संवाद