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एटा: फर्जी एनकाउंटर: जो हमारे साथ हुआ, किसी के साथ न हो...
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एटा। पुलिस कर्मियों के दोषी ठहराए जाने की अमर उजाला में खबर पढ़ते राजाराम के परिजन। संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। जिला कासगंज की थाना सिढ़पुरा पुलिस द्वारा किए गए फर्जी एनकाउंटर में मारे गए राजाराम के परिवार वालों ने अदालत के फैसले का सम्मान जताया है। साथ ही यह भी कह रहे हैं कि हमें तो दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने की उम्मीद थी। वहीं, उनके मन में छिपी पीड़ा भी बाहर निकली। बोले, जो हमारे साथ हुआ और किसी के साथ न हो।
राजाराम की पत्नी संतोष कुमारी दो पुत्र और दो पुत्रियों के साथ अलीगंज के मोहल्ला पड़ाव में रहती हैं। मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह मकान बनवा लिया है। सीबीआई अदालत में बुधवार को सुनाई जाने वाली सजा को लेकर परिवार वाले काफी उत्सुक थे। बड़े पुत्र मोहित ने बताया कि हम लोगों को पुलिस वालों को दोषी ठहराए जाने की जानकारी तक नहीं थी।
बुधवार को अखबार में खबर पड़ी तो पता लगा। इसके बाद फैसले पर नजर रखे थे। हमें उम्मीद थी कि इस अमानवीय हत्याकांड के लिए सभी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा दी जाएगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। लेकिन अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं।
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मोहित कहते हैं कि उस समय वह करीब पांच साल के थे। पिता की मौत के बाद पूरा परिवार अस्त-व्यस्त हो गया। हम लोगों के साथ बहुत बुरा हुआ। ऐसा किसी के साथ न हो। राजाराम की पत्नी संतोष ने कहा कि न्याय के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया है। अदालत ने अपना काम कर हम लोगों को न्याय भी दिला दिया। अब सरकार आगे आए और मुखिया के रूप में पति की मौत के बाद बिगड़ी घर की स्थिति संभालने के लिए कुछ करे। एक बच्चे को नौकरी दिलाई जाए।
पढ़ रही हैं दो बेटियां और एक बेटा
राजाराम की मौत के बाद परिवार का गुजारा बड़ी चुनौती बन गई थी। मिलावली में संतोष ने प्राथमिक विद्यालय में रसोइया का काम किया। कुछ साल यहां रहने के बाद बच्चों को लेकर वह मायके राजा का रामपुर चली आईं। यहां पिता, भाइयों के साथ रहीं। बाद में बड़े पुत्र मोहित पढ़ाई के साथ ही फर्नीचर का काम करने लगा। जिससे कुछ कमाई हुई तो अलीगंज में अपना मकान बनवा लिया। जिम्मेदारियों के चलते इंटर के बाद मोहित की पढ़ाई छूट गई। छोटा पुत्र रोहित इंटर कर रहा है। जबकि पुत्री सुनीता हाईस्कूल व पूनम कक्षा 8 की छात्रा है।
फैसला आने पर मिठाई भी बांटी
लंबे इंतजार के बाद अदालत का फैसला आया तो संतोष, मोहित ने आसपास के घरों के लोगों को मिठाई भी बांटी। खुशी मनाई कि पुलिस विभाग से संघर्ष करते हुए विषम हालातों में हमने यह जीत हासिल की है।
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राजाराम की पत्नी संतोष कुमारी दो पुत्र और दो पुत्रियों के साथ अलीगंज के मोहल्ला पड़ाव में रहती हैं। मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह मकान बनवा लिया है। सीबीआई अदालत में बुधवार को सुनाई जाने वाली सजा को लेकर परिवार वाले काफी उत्सुक थे। बड़े पुत्र मोहित ने बताया कि हम लोगों को पुलिस वालों को दोषी ठहराए जाने की जानकारी तक नहीं थी।
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बुधवार को अखबार में खबर पड़ी तो पता लगा। इसके बाद फैसले पर नजर रखे थे। हमें उम्मीद थी कि इस अमानवीय हत्याकांड के लिए सभी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा दी जाएगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। लेकिन अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं।
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मोहित कहते हैं कि उस समय वह करीब पांच साल के थे। पिता की मौत के बाद पूरा परिवार अस्त-व्यस्त हो गया। हम लोगों के साथ बहुत बुरा हुआ। ऐसा किसी के साथ न हो। राजाराम की पत्नी संतोष ने कहा कि न्याय के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया है। अदालत ने अपना काम कर हम लोगों को न्याय भी दिला दिया। अब सरकार आगे आए और मुखिया के रूप में पति की मौत के बाद बिगड़ी घर की स्थिति संभालने के लिए कुछ करे। एक बच्चे को नौकरी दिलाई जाए।
पढ़ रही हैं दो बेटियां और एक बेटा
राजाराम की मौत के बाद परिवार का गुजारा बड़ी चुनौती बन गई थी। मिलावली में संतोष ने प्राथमिक विद्यालय में रसोइया का काम किया। कुछ साल यहां रहने के बाद बच्चों को लेकर वह मायके राजा का रामपुर चली आईं। यहां पिता, भाइयों के साथ रहीं। बाद में बड़े पुत्र मोहित पढ़ाई के साथ ही फर्नीचर का काम करने लगा। जिससे कुछ कमाई हुई तो अलीगंज में अपना मकान बनवा लिया। जिम्मेदारियों के चलते इंटर के बाद मोहित की पढ़ाई छूट गई। छोटा पुत्र रोहित इंटर कर रहा है। जबकि पुत्री सुनीता हाईस्कूल व पूनम कक्षा 8 की छात्रा है।
फैसला आने पर मिठाई भी बांटी
लंबे इंतजार के बाद अदालत का फैसला आया तो संतोष, मोहित ने आसपास के घरों के लोगों को मिठाई भी बांटी। खुशी मनाई कि पुलिस विभाग से संघर्ष करते हुए विषम हालातों में हमने यह जीत हासिल की है।