{"_id":"5762e58f4f1c1b144311c112","slug":"electricity-department-refuses-to-deal-with-monsoon","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानसून से निपटने को तैयार नहीं विद्युत विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानसून से निपटने को तैयार नहीं विद्युत विभाग
अमर उजाला ब्यूरो एटा।
Updated Thu, 16 Jun 2016 11:21 PM IST
विज्ञापन
मानसून से निपटने को तैयार नहीं विद्युत विभाग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मानसून कभी भी दस्तक दे सकता है, लेकिन विद्युत विभाग ने इससे निपटने के अभी तक तक कोई इंतजाम नहीं किए। न तो ट्रांसफार्मरों की बैरीकेटिंग की है और न ही झूलते तारों को ठीक किया। मकानों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। बिजली विभाग की लापरवाही कभी भी हादसे का कारण बन सकती है।
विद्युत विभाग जिले में छोटे-बड़े करीब 3500 ट्रांसफार्मर के माध्यम से बिजली की सप्लाई देता है। विभाग इनके रखरखाव के प्रति गंभीर नहीं हैं। नगरीय क्षेत्र में ही बहुत से ऐसे ट्रांसफार्मर हैं जिनके चारों ओर सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इनके तार जमीन को छूटे रहते हैं। अधिक बारिश होने पर नगर की तमाम बस्तियों में जलभराव के हालात पैदा हो जाते हैं, जिससे इनके माध्यम से करंट प्रवाहित होने की खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं ऐसी स्थिति में फाल्ट होने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे बिजली की आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ सकता है। जिले भर में 65 हजार किमी हाईटेंशन लाइन गुजरती है। इस लाइन के अधिकांश हिस्से के नीचे गार्डनिंग की व्यवस्था तक नहीं की गई है। जबकि 2 लाख किमी एलटी की लाइन है। इस लाइन की हालत भी ठीक नहीं है। तमाम स्थानों पर केबल जर्जर हो चुकी हैं। जरा सी बारिश होने पर ही इनमें फाल्ट हो जाते हैं। अक्सर तार टूटकर गिरते रहते हैं।
हादसे का कारण बन सकता है पोल
सोरों। तीर्थ नगरी के बस स्टेंड की बाउंड्रीवाल के पास लगा बिजली का पोल नीचे से गल कर झुक गया है। इस स्थान पर परिवहन विभाग की बसें भी खड़ी होती हैं। यह पोल कभी भी गिर सकता है। शिकायत के बाद भी पोल को बदला नहीं गया है।
विज्ञापन
खुले ट्रांसफार्मरों के चारों ओर गार्डनिंग कराने के लिए विभाग तैयारियां कर रहा है, जल्द ही गार्डनिंग का कार्य शुरू कराया जाएगा। -सत्यदेव सिंह अधिशासी अभियंता
विज्ञापन
विद्युत विभाग जिले में छोटे-बड़े करीब 3500 ट्रांसफार्मर के माध्यम से बिजली की सप्लाई देता है। विभाग इनके रखरखाव के प्रति गंभीर नहीं हैं। नगरीय क्षेत्र में ही बहुत से ऐसे ट्रांसफार्मर हैं जिनके चारों ओर सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इनके तार जमीन को छूटे रहते हैं। अधिक बारिश होने पर नगर की तमाम बस्तियों में जलभराव के हालात पैदा हो जाते हैं, जिससे इनके माध्यम से करंट प्रवाहित होने की खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं ऐसी स्थिति में फाल्ट होने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे बिजली की आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ सकता है। जिले भर में 65 हजार किमी हाईटेंशन लाइन गुजरती है। इस लाइन के अधिकांश हिस्से के नीचे गार्डनिंग की व्यवस्था तक नहीं की गई है। जबकि 2 लाख किमी एलटी की लाइन है। इस लाइन की हालत भी ठीक नहीं है। तमाम स्थानों पर केबल जर्जर हो चुकी हैं। जरा सी बारिश होने पर ही इनमें फाल्ट हो जाते हैं। अक्सर तार टूटकर गिरते रहते हैं।
विज्ञापन
हादसे का कारण बन सकता है पोल
सोरों। तीर्थ नगरी के बस स्टेंड की बाउंड्रीवाल के पास लगा बिजली का पोल नीचे से गल कर झुक गया है। इस स्थान पर परिवहन विभाग की बसें भी खड़ी होती हैं। यह पोल कभी भी गिर सकता है। शिकायत के बाद भी पोल को बदला नहीं गया है।
विज्ञापन
खुले ट्रांसफार्मरों के चारों ओर गार्डनिंग कराने के लिए विभाग तैयारियां कर रहा है, जल्द ही गार्डनिंग का कार्य शुरू कराया जाएगा। -सत्यदेव सिंह अधिशासी अभियंता