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आठ साल के जतिन शतरंज में माहिर
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Sat, 20 Dec 2014 11:25 PM IST
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शहर के नन्हे चेस खिलाड़ी की कामयाबी का डंका शहर के बाहर भी बज रहाहै। शतरंज खेल में अपने प्रतिद्वंद्वियों की चाल को मात देने वाले जतिन कालोनी व स्कूल में ‘चेस प्लेयर’ के नाम से मशहूर हैं। वर्ष 2013 में मुरादाबाद में केआईएमटी अंडर 7 एवं अंडर 17 यूपी स्टेट चेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। इसके अलावा पुणे में भी वे अपनी धाक जमा चुके हैं। बड़े होकर वह इंजीनियर बनना चाहते हैं।
आवास विकास कालोनी निवासी जतिन सेंट पॉल्स स्कूल में कक्षा तीन के छात्र हैं। आठ वर्षीय जतिन को चेस का शौक लगभग एक- डेढ़ वर्ष पूर्व लगा। बताते हैं कि इटावा में अपनी मौसी के घर गर्मियों की छुट्टियां बिताने पहुंचे वहां मौसाजी को चेस खेलते देखा। तभी से उनके मन में चेस खेलने की इच्छा हुई।
इसके लिए इटावा में एक माह की कोचिंग भी की। उनका कहना है कि ‘शतरंज खेलने से दिमाग तेज होता है, इसलिए मैं खेलता हूं’। पढ़ाई के लोड से उन्हें रोज शतरंज खेलने का मौका नहीं मिलता, लेकिन खाली समय में वे शतरंज जरूर खेलते हैं। शतरंज के अलावा उन्हें क्रिकेट का भी शौक है। उनकी मां मधुबाला और पिता पूरन सिंह बताते हैं कि जतिन जितने चेस में तेज हैं उतने ही पढ़ाई में भी। उन्हें विज्ञान विषय पसंद है।
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आवास विकास कालोनी निवासी जतिन सेंट पॉल्स स्कूल में कक्षा तीन के छात्र हैं। आठ वर्षीय जतिन को चेस का शौक लगभग एक- डेढ़ वर्ष पूर्व लगा। बताते हैं कि इटावा में अपनी मौसी के घर गर्मियों की छुट्टियां बिताने पहुंचे वहां मौसाजी को चेस खेलते देखा। तभी से उनके मन में चेस खेलने की इच्छा हुई।
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इसके लिए इटावा में एक माह की कोचिंग भी की। उनका कहना है कि ‘शतरंज खेलने से दिमाग तेज होता है, इसलिए मैं खेलता हूं’। पढ़ाई के लोड से उन्हें रोज शतरंज खेलने का मौका नहीं मिलता, लेकिन खाली समय में वे शतरंज जरूर खेलते हैं। शतरंज के अलावा उन्हें क्रिकेट का भी शौक है। उनकी मां मधुबाला और पिता पूरन सिंह बताते हैं कि जतिन जितने चेस में तेज हैं उतने ही पढ़ाई में भी। उन्हें विज्ञान विषय पसंद है।
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