{"_id":"3588e11620752fba555474e41b6a4f15","slug":"desperate-farmers-in-rice-prices-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान की कम कीमतों से किसान मायूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान की कम कीमतों से किसान मायूस
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Mon, 15 Dec 2014 11:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धान किसानों को पहले मौसम की मार ने रुलाया और अब बाजार में धान की कम कीमतें किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही हैं। हालात यह हैं कि धान की जिस किस्म की कीमत विगत वर्ष 3200 से 38 रुपये प्रति क्ंिवटल थी, आज उसकी कीमत 1800 रुपये प्रति क्विंटल भी नहीं रह गइ है।
वहीं किसानों को मंडी में अपना धान बेचने के लिए दो से तीन दिन तक रुकना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि जब मौसम ने किसानों को मारा तो सरकार धान कीमतें बढ़ाकर उस मार से बचा सकती थी लेकिन कम कीमतों ने किसानों को कर्जदार बना दिया है। जिले में इस वर्ष मानसून की बेरुखी का सबसे अधिक असर धान की फसल पर पड़ा है। इसके बावजूद किसानों ने निजी संसाधनों से धान की पैदावार की। हालांकि फसल के लिए अनुकूल मौसम न होने के चलते इसका असर पैदावार पर पड़ा और पैदावार कम हुई। कम पैदावार के कारण किसानों को लगा कि इस बार बाजार में धान की अच्छी कीमतें रहेंगी, लेकिन ऐसा न होने पर अब किसान को फसल में लगाई गई लागत भी नहीं वसूल हो पा रही है। इससे किसान कर्जदार होते जा रहे हैं।
---
इस कारण गिर रही धान की कीमतें
एटा। मंडी व्यापारियों की मानें तो भारत से अरब देशों में जाने वाला चावल बंद हो गया है। इसके चलते धान की कीमते कम हुई हैं। धान किसानों के साथ-साथ व्यापारी भी परेशान हैं। मंडी में भी धान अधिक एकत्रित हो जाता है। इसके चलते किसानों से भी धान खरीदने में परेशानी होती है। मंडी में इस समय सात से आठ हजार क्विंटल प्रतिदिन धान आ रहा है।
विज्ञापन
---
धान की कीमतों में अंतर
धन किस्म गत वर्ष वर्तमान
सुगंधा 24 सौ से 28 सौ 14 सौ
बासमती 28 सौ से 32 सौ 14 से 28 सौ
पीटेन 32 सौ से 38 सौ 24 सौ
---
सरकारी खरीद भी सुस्त
एटा। इस बार सरकारी धान की खरीद भी काफी सुस्त है। शासन ने इस बार धान का समर्थन मूल्य 1360 रुपये रखा है। जिले में इस बार छह हजार मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 204 क्विंटल ही धान खरीद हो सकी है।
धान की कम कीमतों के बावजूद भी व्यापारी किसानों से धान खरीदने में आनाकानी कर रहे हैं। किसानों को मंडी में धान बेचने के लिए दो से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके चलते कुछ किसानों का तो दो दिन पहले हुई बारिश से नुकसान तक उठाना पड़ा।
श्याम सिंह, निवासी रेवाड़ी, सकीट।
इस बार पहले धान की कम पैदावार हुई। इसके बाद बाजार में कम कीमत किसानों को परेशान कर रखा है। हालात यह है कि इन कीमतों से लागात भी नहीं निकल पा रही है। इसके चलते पट्टे पर ली भूमि और खाद बीज के लिए, लिए गए कर्ज से छुटकारा भी नहीं मिल रहा।
-- पप्पू, निवासी शीतलपुर।
क्या बोले व्यापारी
अरब देशों में भारत से चावल जाना बंद हो जाने से धान की कीमतें कम हुई हैं। मंडी में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न आए, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। व्यापारी भी अपनी क्षमता के अनुसार धान की खरीद कर रहे हैं।
-- हरीश गुप्ता, अध्यक्ष, खाद्यान व्यापार मंडल एटा।
विज्ञापन
वहीं किसानों को मंडी में अपना धान बेचने के लिए दो से तीन दिन तक रुकना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि जब मौसम ने किसानों को मारा तो सरकार धान कीमतें बढ़ाकर उस मार से बचा सकती थी लेकिन कम कीमतों ने किसानों को कर्जदार बना दिया है। जिले में इस वर्ष मानसून की बेरुखी का सबसे अधिक असर धान की फसल पर पड़ा है। इसके बावजूद किसानों ने निजी संसाधनों से धान की पैदावार की। हालांकि फसल के लिए अनुकूल मौसम न होने के चलते इसका असर पैदावार पर पड़ा और पैदावार कम हुई। कम पैदावार के कारण किसानों को लगा कि इस बार बाजार में धान की अच्छी कीमतें रहेंगी, लेकिन ऐसा न होने पर अब किसान को फसल में लगाई गई लागत भी नहीं वसूल हो पा रही है। इससे किसान कर्जदार होते जा रहे हैं।
विज्ञापन
---
इस कारण गिर रही धान की कीमतें
एटा। मंडी व्यापारियों की मानें तो भारत से अरब देशों में जाने वाला चावल बंद हो गया है। इसके चलते धान की कीमते कम हुई हैं। धान किसानों के साथ-साथ व्यापारी भी परेशान हैं। मंडी में भी धान अधिक एकत्रित हो जाता है। इसके चलते किसानों से भी धान खरीदने में परेशानी होती है। मंडी में इस समय सात से आठ हजार क्विंटल प्रतिदिन धान आ रहा है।
विज्ञापन
---
धान की कीमतों में अंतर
धन किस्म गत वर्ष वर्तमान
सुगंधा 24 सौ से 28 सौ 14 सौ
बासमती 28 सौ से 32 सौ 14 से 28 सौ
पीटेन 32 सौ से 38 सौ 24 सौ
---
सरकारी खरीद भी सुस्त
एटा। इस बार सरकारी धान की खरीद भी काफी सुस्त है। शासन ने इस बार धान का समर्थन मूल्य 1360 रुपये रखा है। जिले में इस बार छह हजार मीट्रिक टन धान खरीद के लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 204 क्विंटल ही धान खरीद हो सकी है।
धान की कम कीमतों के बावजूद भी व्यापारी किसानों से धान खरीदने में आनाकानी कर रहे हैं। किसानों को मंडी में धान बेचने के लिए दो से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके चलते कुछ किसानों का तो दो दिन पहले हुई बारिश से नुकसान तक उठाना पड़ा।
श्याम सिंह, निवासी रेवाड़ी, सकीट।
इस बार पहले धान की कम पैदावार हुई। इसके बाद बाजार में कम कीमत किसानों को परेशान कर रखा है। हालात यह है कि इन कीमतों से लागात भी नहीं निकल पा रही है। इसके चलते पट्टे पर ली भूमि और खाद बीज के लिए, लिए गए कर्ज से छुटकारा भी नहीं मिल रहा।
-- पप्पू, निवासी शीतलपुर।
क्या बोले व्यापारी
अरब देशों में भारत से चावल जाना बंद हो जाने से धान की कीमतें कम हुई हैं। मंडी में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न आए, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। व्यापारी भी अपनी क्षमता के अनुसार धान की खरीद कर रहे हैं।
-- हरीश गुप्ता, अध्यक्ष, खाद्यान व्यापार मंडल एटा।