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दरगाह प्रकरण: सुन्नी वक्फ बोर्ड में दरगाह पंजीकृत, मो. अकबर को बनाया मुतवल्ली
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जलेसर में दरगाह के पास विश्राम स्थल पर मूर्तियों को सुरक्षित करने के लिए लगवाई जा रही लोहे की जाल?
- फोटो : ETAH
एटा। जलेसर की बड़े मियां की दरगाह प्रकरण में नया मोड़ आया है। स्थानीय प्रशासन ने यहां गठित दरगाह समिति को भंग कर इसके अध्यक्ष मो. अकबर सहित नौ लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। करीब 99 करोड़ रुपये गबन करने का आरोप है। गैर जमानतीय धाराओं में पुलिस इन लोगों की तलाश कर रही है। उधर, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने इस दरगाह को बतौर वक्फ कब्रिस्तान बोर्ड में पंजीकृत कर लिया है। वहीं आरोपी मु. अकबर को इस संपत्ति का मुतवल्ली (केयरटेकर) घोषित किया है। जिसके बाद मामला और ज्यादा पेचीदा हो गया है।
जलेसर स्थित बड़े मियां और छोटे मियां की दरगाह पर हर बुधवार और शनिवार को जात करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। इनमें काफी चढ़ावा भी आता है। शिकायतें होने पर बड़े मियां की दरगाह जांच के घेरे में आई। जिला प्रशासन ने जांच कराई तो 18 साल में 83 से 99 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया। इस पर 10 अप्रैल को दरगाह समिति के अध्यक्ष मु. अकबर सहित सभी 9 पदाधिकारी व सदस्यों के विरुद्ध कोतवाली जलेसर में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। इसके बाद से सभी आरोपी फरार हैं। उधर, प्रशासन दरगाह को कब्जे में लेकर जात व अन्य व्यवस्थाएं करा रहा है। 15 अप्रैल को यहां पुलिस चौकी बनवाने के लिए नींव की खोदाई में हनुमानजी और शनिदेव की प्रतिमाएं निकली थीं। जिसके बाद दरगाह के अस्तित्व को लेकर भी चर्चाएं होने लगीं। तमाम स्थानीय लोग यहां प्राचीन शनिदेव मंदिर होने का दावा करते हैं। इसे लेकर 20 अप्रैल को आगरा से आई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने बारीकी से सर्वेक्षण किया।
प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बीच उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने एक आदेश जारी किया है। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. सैयद शफीक अहमद ने डीए एटा को पत्र भेज बताया है कि जलेसर के वक्फ कब्रिस्तान को वक्फ संख्या 733-740 पर दर्ज किया गया है। जिसका मुतवल्ली जलेसर के मोहल्ला सादात निवासी मु. अकबर को बनाया गया है। 19 अप्रैल को जारी इस प्रमाण पत्र की वैद्यता तीन साल की बताई गई है।
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जलेसर स्थित बड़े मियां और छोटे मियां की दरगाह पर हर बुधवार और शनिवार को जात करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। इनमें काफी चढ़ावा भी आता है। शिकायतें होने पर बड़े मियां की दरगाह जांच के घेरे में आई। जिला प्रशासन ने जांच कराई तो 18 साल में 83 से 99 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया। इस पर 10 अप्रैल को दरगाह समिति के अध्यक्ष मु. अकबर सहित सभी 9 पदाधिकारी व सदस्यों के विरुद्ध कोतवाली जलेसर में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। इसके बाद से सभी आरोपी फरार हैं। उधर, प्रशासन दरगाह को कब्जे में लेकर जात व अन्य व्यवस्थाएं करा रहा है। 15 अप्रैल को यहां पुलिस चौकी बनवाने के लिए नींव की खोदाई में हनुमानजी और शनिदेव की प्रतिमाएं निकली थीं। जिसके बाद दरगाह के अस्तित्व को लेकर भी चर्चाएं होने लगीं। तमाम स्थानीय लोग यहां प्राचीन शनिदेव मंदिर होने का दावा करते हैं। इसे लेकर 20 अप्रैल को आगरा से आई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने बारीकी से सर्वेक्षण किया।
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प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बीच उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने एक आदेश जारी किया है। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. सैयद शफीक अहमद ने डीए एटा को पत्र भेज बताया है कि जलेसर के वक्फ कब्रिस्तान को वक्फ संख्या 733-740 पर दर्ज किया गया है। जिसका मुतवल्ली जलेसर के मोहल्ला सादात निवासी मु. अकबर को बनाया गया है। 19 अप्रैल को जारी इस प्रमाण पत्र की वैद्यता तीन साल की बताई गई है।
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