Etah: शनि जात में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, दबकर वृद्ध की मौत; पुत्र और दंपती घायल
एटा में शनि जात में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भीड़ में दबकर वृद्ध की मौत हो गई। वहीं अन्य स्थान पर हादसे में पुत्र और दंपती घायल हो गए।
विस्तार
उत्तर प्रदेश के एटा में जलेसर क्षेत्र में शनि जात करने आए फिरोजाबाद के वृद्ध की भीड़ में दबने से मौत हो गई। एक अन्य घटना में जात करके लौट रहे दंपती पुत्री सहित सड़क दुर्घटना में घायल हो गया।
शनिवार को नगर में शनि जात के लिए श्रद्वालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भीड़ के चलते अफरा-तफरी का माहौल रहा। धक्का-मुक्की के बीच श्रद्धालुओं ने बड़ी मुश्किल से पूजा-अर्चना की। फिरोजाबाद जनपद के गांव मीतपुरा से जात करने आए लगभग बदन सिंह (60) भीड़ में दब गए। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की जानकारी लगते ही कोतवाली पुलिस ने वृद्ध को सीएचसी पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने भी मृत घोषित कर दिया गया। सूचना के बाद परिजन के पहुंचने पर शव पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया गया।
इसके अलावा मोहल्ला द्वारिकापुरी निवासी उपदेश पत्नी पिंकी (32) और पुत्री शिवी के साथ बाइक से जात करने आया था। जात करके वह घर जा रहे थे। जलेसर-अवागढ़ मार्ग पर गांव पोंडरी स्थित पेट्रोल पंप के सामने नीलगाय बाइक से टकरा गई। हादसे में तीनों घायल हो गए। अवागढ़ पीएचसी पर घायलों को पहुंचाया गया। 4 वर्षीय शिवी की हालत गंभीर देखते हुए आगरा रेफर कर दिया गया।
शनि जात में उमड़ी भीड़, बाजार-गलियां रहे खचाखच
आषाढ़ मास के तीसरे शनिवार को शनि जात के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मुख्य मार्गों के साथ-साथ बाजार व गलियां भी श्रद्धालुओं से खचाखच रहीं। बड़े मियां दरगाह के साथ छोटे मियां दरगाह तथा शनिदेव मंदिर पर लोगों ने पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगीं।
श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते तहसील व पुलिस प्रशासन को भी मशक्कत करनी पड़ी। जात के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के बीच भी मोबाइल, पर्स चोरी की घटनाएं हुईं। प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने नगर के बाहर बैरिकेडिंग लगवाई थी। जिससे नगर में वाहनों का आना पूरी तरह बंद रहा। इससे लोगों को सड़कों पर आवागमन में काफी सहूलियत हुई।
निधौली चौराहा, इसौली चौराहा, आगरा चौराहा, सासनी रोड आदि पर बैरिकेडिंग लगाकर वाहनों को नगर में घुसने से रोका गया। श्रद्धालुओं ने बड़े मियां दरगाह पर मत्था टेकने के साथ ही शनि देव मंदिर स्थित भगवान शनिदेव की प्रतिमा पर सरसों का तेल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की।
पूजा पाठ के दौरान भक्तों द्वारा चादर चढ़ाने के साथ भेंट में मुर्गा-बकरी भी चढ़ाई गई। यह शुक्रवार रात 2 बजे से शुरू होकर शनिवार देर शाम तक चलता रहा। बता दें कि आषाढ़ महीने की जात के लिए कई जनपदों के साथ-साथ दूसरे राज्यों के भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। संतान इच्छा से यहां मनौती मांगते हैं।