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हजारों हेक्टेयर खरीफ की फसल सूखी

Sun, 20 Sep 2015 10:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 20 Sep 2015 10:41 PM IST
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crops destroyed, disturbing weather
जिले में औसत से 30-35 प्रतिशत कम हुई बारिश से कृषि विभाग खरीफ फसलों की पैदावार 20 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान लगा रहा है। जबकि  बरसात के न होने और लगातार चटक धूप के निकलने से पैदावार और भी प्रभावित हो सकती है। यह हालात तब हैं, जब सूखे की मार से बचने के लिए किसान फसलों की कृत्रिम साधनों से सिंचाई कर रहे हैं। बीते एक पखवाड़े के अधिक समय से मौसम खरीफ फसलों के लिए प्रतिकूल बना हुआ है। जानकारों की मानें तो इसका असर अक्तूबर से बोई जाने वाली रबी की फसलों पर भी पड़ेगा।
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मानसून के शुरुआती तेवर देख किसानों ने खरीफ की बुवाई शुरू की थी। इसके चलते बीते साल 92 हजार हेक्टेयर का क्षेत्र इस वर्ष 97 हजार हेक्टेयर हो गया, लेकिन कमजोर मानसून ने किसानों को इस बार भी तगड़ा झटका दिया है। कृषि विभाग के अनुमान के तहत इस बार भी जिले में पैदावार 20 प्रतिशत तक गिरेगी, लेकिन अब तक कटी खरीफ फसलों में 20 प्रतिशत से अधिक पैदावार कम निकल रही है। जबकि यह अगैती फसलें हैं, ऐसे में पिछैती फसलों में और अधिक पैदावार प्रभावित होने की संभावनाएं हैं। इस बार जिले में मक्का, बाजरा और दलहन की फसलों का क्षेत्र बड़ा है, जबकि धान का बीते वर्ष से भी कम हुआ है।
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फसलें बचाने को बचाने की जुगत
फसलों को सूखे से बचाने के लिए जीतोड़ मेहनत हो रही है। जिले में किसान खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए बिजली ट्यूबेवल, डीजल पंप, जेनरेटर, ट्रैक्टर के साथ-साथ तालाबों से भी सिंचाई कर रहे हैं। किसानों की मानें तो इस बेेार भी प्रतिकूल मौसम ने उन्हें बर्बादी के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। ऐसे में सूखे की चपेट से उन्हें अपनी फसलें बचाने के लिए सिंचाई करनी पड़ रही है।
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तेज धूप फसलों को दे रही नुकसान
किसान बताते हैं कि इन दिनों में तापमान कम होता था। इसलिए फसलों को अधिक पानी की भी जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन इस बार पड़ रही गर्मी ने फसलों को काफी प्रभावित किया है। कम बारिश होने की वजह से किसान पहले से ही परेशान हैं, ऊपर से तेज धूप और फसलों को नुकसान पहुंचा रही है।

 
मौसम के प्रतिकूल रहने से खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। अनुमान के तहत इस बार खरीफ की पैदावार 20 प्रतिशत तक कम होने की संभावनाएं हैं।
- डा. सर्वेश यादव, जिला कृषि अधिकारी
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