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शवों के पहुंचते ही मचा कोहराम
Amar Ujala
Updated Mon, 19 Dec 2016 12:19 AM IST
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शवों के पहुंचते ही मचा कोहराम
- फोटो : Amar Ujala
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शवों के पहुंचते ही मचा कोहराम
सुन्नगढ़ी के किलौनी और किसौल गांव के मारे गए लोगों के शवों को गंगा किनारे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अंतिम संस्कार किया गया। दोनों पक्षों के बीच तनातनी के माहौल को देखते हुए पुलिस प्रशासन काफी सतर्क था। फिर से संघर्ष के हालात न बन जाएं इसे देखते हुए पुलिस ने पहले किसौल पक्ष के शवों का अंतिम संस्कार कराया फिर किलौनी पक्ष के शवों का अंतिम संस्कार कराया गया।
पोस्टमार्टम के बाद दोनों गांवों में शवों के पहुंचते ही कोहराम मच गया। चीत्कार और रोने की गूंज वातावरण में सुनाई देने लगी।
किसौल पक्ष के रामरहीस एवं अमृतपाल की मौत हुई थी। इन दोनों के शव पोस्टमार्टम के बाद अपराह्न चार बजे गांव में पहुंचे।
एटा से ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों के शव लाए गए। उनके शव सीधे ही किसौल गांव में लाए गए। जहां शव पहुंचते ही चीत्कार मचने लगा। लोगों के बीच शव देखने की होड़ थी। बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एवं पुरुष मौके पर एकत्रित रहे। दोनों शवों को गंगा किनारे ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।
इसके बाद किलौनी पक्ष के रामकिशोर, शिवराम एवं सुखवीर के शव किलौनी पहुुंचे। शव पहुंचते ही किलौनी गांव में कोहराम मच गया। ग्रामीणों की का हजूम एकत्रित हो गया। इसके बाद तीनों शवों को गंगा किनारे ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। दोनों पक्षों के बीच तनातनी और गहमा गहमी को देखते हुए पुलिस और पीएससी सतर्क रही। अपर जिलाधिकारी सुरेंद्र प्रताप सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक हरिंद्र यादव, एसडीएम परवेज अहमद, सीओ शबीह हैदर सहित अन्य थाना प्रभारी स्वयं मौजूद रहे।
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सुन्नगढ़ी क्षेत्र के किसौल और किलौनी गांव में खूनी संघर्ष की घटना को देखते हुए पीएसी तैनात कर दी गई है। एक विद्यालय में पीएसी ने कैंप लगाकर अपना डेरा जमा लिया है। सीओ सहावर शबीह हैदर अतिरिक्त पुलिसबल के साथ सुन्नगढ़ी थाने में कैंप कर रहे हैं।
जिलाधिकारी के विजियेंद्र पांडियन एवं पुलिस अधिक्षक सुनील कुमार सिंह ने संघर्ष की आशंका को देखते हुए गांव में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। समीक्षा के बाद एक सैक्शन पीएसी को कैंप करने के निर्देश देते हुए तैनात किया गया है। आसपास के थानों के थाना प्रभारी भी सुन्नगढ़ी में मौजूद हैं।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गांव में कोई तनाव की स्थिति नहीं है लेकिन ऐतिहातन अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि अब कोई भी किसी तरह की खुरापात करने की कोशिश करेगा या शांति भंग करने की कोशिश करेगा तो पुलिस ऐसे लोगों को चिन्ह्ति कर कार्रवाई करेगी। बता दें, खादर की जमीन पर कब्जे के लिए हुई फायरिंग में किलौनी निवासी रामरहीस व अमृतपाल और किसौल निवासी रामकिशोर, उसके भाई, शिवराम और गांव के ही सुखवीर की मौत हो गई थी।
इस मामले में किसौल पक्ष की ओर से राधेश्याम की तहरीर पर हरिजन एक्ट हत्या, बलवा, जानलेवा हमला आदि की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस मामले में मृतक रामकिशोर, शिवराम, सुखवीर के अलावा नेत्रपाल, इकबाल, रफीक, उदयभान, रनवीर, आरिफ, बब्बल को नामजद किया गया है।
किलौनी पक्ष से नामजदों में रामरहीस, अमृतपाल दोनों मृतक शामिल हैं। इसके अलावा मनवीर, मनोज, राजपाल, मुकुल, बुद्धपाल, उदयवीर, रफीक, नेत्रपाल, सुरेश, खुशीराम शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिशें दी जा रहीं हैं। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
सुन्नगढ़ी के खूनी संघर्ष में पांच ग्रामीणों की मौत के मामले में जिलाधिकारी के विजियेंद्र पांडियन ने मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश दिए हैं। अपर जिलाधिकारी को इस जांच का जिम्मा सौंपा गया है। जांच में कब्जे की स्थिति, फायरिंग आदि बिंदुओं पर जांच पड़ताल होगी। सरकारी मशीनरी के किन लोगों की जमीन पर कब्जे में संलिप्तता है, यह भी जांच के दायरे में है। मृतकों के आश्रितों को मुआवजा देने की भी समीक्षा की जाएगी।
कौन किसान बीमा योजना के अंतर्गत पात्र होगा और कौन नहीं। जो लोग इस योजना के पात्र नहीं होंगे, उनको मुख्यमंत्री सहायता कोष से मदद दिलाने की संस्तुति की जाएगी। जिलाधिकारी के विजियेंद्र पांडियन ने बताया कि मृतकों के परिवारीजनों को मुआवजा दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। तहसील प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई है।
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सुन्नगढ़ी के किलौनी और किसौल गांव के मारे गए लोगों के शवों को गंगा किनारे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अंतिम संस्कार किया गया। दोनों पक्षों के बीच तनातनी के माहौल को देखते हुए पुलिस प्रशासन काफी सतर्क था। फिर से संघर्ष के हालात न बन जाएं इसे देखते हुए पुलिस ने पहले किसौल पक्ष के शवों का अंतिम संस्कार कराया फिर किलौनी पक्ष के शवों का अंतिम संस्कार कराया गया।
पोस्टमार्टम के बाद दोनों गांवों में शवों के पहुंचते ही कोहराम मच गया। चीत्कार और रोने की गूंज वातावरण में सुनाई देने लगी।
किसौल पक्ष के रामरहीस एवं अमृतपाल की मौत हुई थी। इन दोनों के शव पोस्टमार्टम के बाद अपराह्न चार बजे गांव में पहुंचे।
एटा से ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों के शव लाए गए। उनके शव सीधे ही किसौल गांव में लाए गए। जहां शव पहुंचते ही चीत्कार मचने लगा। लोगों के बीच शव देखने की होड़ थी। बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एवं पुरुष मौके पर एकत्रित रहे। दोनों शवों को गंगा किनारे ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।
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इसके बाद किलौनी पक्ष के रामकिशोर, शिवराम एवं सुखवीर के शव किलौनी पहुुंचे। शव पहुंचते ही किलौनी गांव में कोहराम मच गया। ग्रामीणों की का हजूम एकत्रित हो गया। इसके बाद तीनों शवों को गंगा किनारे ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। दोनों पक्षों के बीच तनातनी और गहमा गहमी को देखते हुए पुलिस और पीएससी सतर्क रही। अपर जिलाधिकारी सुरेंद्र प्रताप सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक हरिंद्र यादव, एसडीएम परवेज अहमद, सीओ शबीह हैदर सहित अन्य थाना प्रभारी स्वयं मौजूद रहे।
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सुन्नगढ़ी क्षेत्र के किसौल और किलौनी गांव में खूनी संघर्ष की घटना को देखते हुए पीएसी तैनात कर दी गई है। एक विद्यालय में पीएसी ने कैंप लगाकर अपना डेरा जमा लिया है। सीओ सहावर शबीह हैदर अतिरिक्त पुलिसबल के साथ सुन्नगढ़ी थाने में कैंप कर रहे हैं।
जिलाधिकारी के विजियेंद्र पांडियन एवं पुलिस अधिक्षक सुनील कुमार सिंह ने संघर्ष की आशंका को देखते हुए गांव में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। समीक्षा के बाद एक सैक्शन पीएसी को कैंप करने के निर्देश देते हुए तैनात किया गया है। आसपास के थानों के थाना प्रभारी भी सुन्नगढ़ी में मौजूद हैं।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गांव में कोई तनाव की स्थिति नहीं है लेकिन ऐतिहातन अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि अब कोई भी किसी तरह की खुरापात करने की कोशिश करेगा या शांति भंग करने की कोशिश करेगा तो पुलिस ऐसे लोगों को चिन्ह्ति कर कार्रवाई करेगी। बता दें, खादर की जमीन पर कब्जे के लिए हुई फायरिंग में किलौनी निवासी रामरहीस व अमृतपाल और किसौल निवासी रामकिशोर, उसके भाई, शिवराम और गांव के ही सुखवीर की मौत हो गई थी।
इस मामले में किसौल पक्ष की ओर से राधेश्याम की तहरीर पर हरिजन एक्ट हत्या, बलवा, जानलेवा हमला आदि की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस मामले में मृतक रामकिशोर, शिवराम, सुखवीर के अलावा नेत्रपाल, इकबाल, रफीक, उदयभान, रनवीर, आरिफ, बब्बल को नामजद किया गया है।
किलौनी पक्ष से नामजदों में रामरहीस, अमृतपाल दोनों मृतक शामिल हैं। इसके अलावा मनवीर, मनोज, राजपाल, मुकुल, बुद्धपाल, उदयवीर, रफीक, नेत्रपाल, सुरेश, खुशीराम शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिशें दी जा रहीं हैं। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
सुन्नगढ़ी के खूनी संघर्ष में पांच ग्रामीणों की मौत के मामले में जिलाधिकारी के विजियेंद्र पांडियन ने मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश दिए हैं। अपर जिलाधिकारी को इस जांच का जिम्मा सौंपा गया है। जांच में कब्जे की स्थिति, फायरिंग आदि बिंदुओं पर जांच पड़ताल होगी। सरकारी मशीनरी के किन लोगों की जमीन पर कब्जे में संलिप्तता है, यह भी जांच के दायरे में है। मृतकों के आश्रितों को मुआवजा देने की भी समीक्षा की जाएगी।
कौन किसान बीमा योजना के अंतर्गत पात्र होगा और कौन नहीं। जो लोग इस योजना के पात्र नहीं होंगे, उनको मुख्यमंत्री सहायता कोष से मदद दिलाने की संस्तुति की जाएगी। जिलाधिकारी के विजियेंद्र पांडियन ने बताया कि मृतकों के परिवारीजनों को मुआवजा दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। तहसील प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई है।