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दरगाह प्रकरण: अधर में लटका पुलिस चौकी का निर्माण
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लेसर में दरगाह स्थल पर रुका हुआ चौकी की नींव खोदाई का कार्यी।संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। बड़े मियां की दरगाह आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी का निर्माण मंजूर किया गया। इसके लिए नींव खोदाई में मूर्तियां निकल आईं और काम रोक दिया गया। इसके बाद से पुलिस चौकी का निर्माण अधर में लटका हुआ है। दरगाह पर जात को लेकर करोड़ों रुपये का गोलमाल सामने आने के बाद प्रशासन ने दरगाह की व्यवस्थाओं को अपने कब्जे में ले लिया था। जबकि दरगाह समिति से जुड़े 9 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई। दरगाह पर बुधवार और शनिवार को जात की जाती है। शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था बड़ा मुद्दा रहता है। इसके मद्देनजर ही प्रशासन इस परिसर में पुलिस चौकी का निर्माण करा रहा था, लेकिन इसकी नींव खोदाई के पहले ही दिन 15 अप्रैल को मिट्टी में दबी हुई हनुमान जी और शनिदेव की प्रतिमाएं मिलीं। जिसके बाद खोदाई का काम रोक दिया गया। अभी तक यह तय नहीं हो सका है कि यहां काम होगा या नहीं। हालांकि स्थानीय प्रशासन के मुताबिक एक अन्य स्थान भी पुलिस चौकी निर्माण के लिए चिह्नित किया गया है, लेकिन अभी तक वहां भी निर्माण के लिए कोई पहल नहीं की गई है। जबकि बुधवार और शनिवार को यहां लगातार जात कराई जा रही है।
मूर्तियां पौराणिक नहीं, मंदिर के अस्तित्व का असमंजस बरकरार
नींव खोदाई के दौरान 15 अप्रैल को दो मूर्तियां मिट्टी में दबी मिली थीं। डीएम द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर 20 अप्रैल को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा की टीम जलेसर पहुंची। टीम ने भौतिक सर्वेक्षण करने के साथ फोटो आदि लिए। इस पर किए गए अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी है। जिसमें कहा गया है कि मूर्तियों का पौराणिक महत्व नहीं है। एसडीएम जलेसर अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि सैकड़ों साल पुराने कालखंड से जुडी चीजों को एएसआई पौराणिक और परातात्विक महत्व का मानती है। 100-150 साल पुरानी चीजों का आंकलन आसानी से नहीं हो पाता है। यहां इन मूर्तियों की स्थापना इसी कालखंड में रही होगी। ऐसे में मंदिर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कही जा सकती है।
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ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था बड़ा मुद्दा रहता है। इसके मद्देनजर ही प्रशासन इस परिसर में पुलिस चौकी का निर्माण करा रहा था, लेकिन इसकी नींव खोदाई के पहले ही दिन 15 अप्रैल को मिट्टी में दबी हुई हनुमान जी और शनिदेव की प्रतिमाएं मिलीं। जिसके बाद खोदाई का काम रोक दिया गया। अभी तक यह तय नहीं हो सका है कि यहां काम होगा या नहीं। हालांकि स्थानीय प्रशासन के मुताबिक एक अन्य स्थान भी पुलिस चौकी निर्माण के लिए चिह्नित किया गया है, लेकिन अभी तक वहां भी निर्माण के लिए कोई पहल नहीं की गई है। जबकि बुधवार और शनिवार को यहां लगातार जात कराई जा रही है।
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मूर्तियां पौराणिक नहीं, मंदिर के अस्तित्व का असमंजस बरकरार
नींव खोदाई के दौरान 15 अप्रैल को दो मूर्तियां मिट्टी में दबी मिली थीं। डीएम द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर 20 अप्रैल को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा की टीम जलेसर पहुंची। टीम ने भौतिक सर्वेक्षण करने के साथ फोटो आदि लिए। इस पर किए गए अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी है। जिसमें कहा गया है कि मूर्तियों का पौराणिक महत्व नहीं है। एसडीएम जलेसर अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि सैकड़ों साल पुराने कालखंड से जुडी चीजों को एएसआई पौराणिक और परातात्विक महत्व का मानती है। 100-150 साल पुरानी चीजों का आंकलन आसानी से नहीं हो पाता है। यहां इन मूर्तियों की स्थापना इसी कालखंड में रही होगी। ऐसे में मंदिर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कही जा सकती है।
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