एटा। शीतलहर का प्रकोप बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। वह निमोनिया के शिकार होने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 25 से 28 बीमार बच्चों को अभिभावक जांच व इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। कॉलेज के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) के अलावा एसएनसीयू में नवजात शिशुओं को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। बृहस्पतिवार को अवकाश के चलते आधे दिन की ओपीडी हुई। 11 बच्चे निमोनिया से पीड़ित चिह्नित किए गए। इनमें से सात को भर्ती कर उपचार दिया गया।
बच्चों के शरीर का सामान्य तापमान औसतन 36.5 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए। अगर इससे अधिक ा कम रहता है तो बुखार, दर्द, खांसी व सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, इससे वह निमोनिया से ग्रसित हो जाते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एबी सिंह ने बताया बच्चों को निमोनिया बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण से होता है। कुछ बच्चों में जन्मजात कुछ परेशानियों की वजह से बार-बार निमोनिया की समस्या होती है। सर्दियों के मौसम में बच्चों को सबसे ज्यादा निमोनिया होता है। इस बीमारी से बचाव के लिए एहतियात के तौर पर उचित सामान्य स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए। गर्भवती महिलाएं नवजात में इस बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए खुद को टीका लगवा सकती हैं।