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Etah News: बच्चे हो रहे डायरिया व बुखार के शिकार
Fri, 02 Jun 2023 11:05 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 02 Jun 2023 11:05 PM IST
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एटा। बदलते मौसम में बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ रही है। वह डायरिया, बुखार और वायरल की चपेट में आने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 25 से अधिक डायरिया और उल्टी-दस्त से पीड़ित बच्चों को लेकर परिजन इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं बीस से 25 तक बुखार के पीड़ित भी पहुंच रहे हैं। चिकित्सक बार-बार मौसम में हो रहे बदलाव को इसका कारण बता रहे हैं।
बदलते मौसम का प्रभाव सबसे अधिक बच्चों पर पड़ता है। क्यों कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इस मौसम में रोटा वायरस के संक्रमण से बच्चों को डायरिया हो जाता है। रोटा वायरस से ग्रसित बच्चे, बुखार, उल्टी, दस्त, पेट दर्द जैसी समस्या से परेशान हो जाते हैं। यह परेशानी करीब एक सप्ताह तक बनी रहती है।
मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजीडेंट डॉ. वैभव गुप्ता ने बताया कि बच्चों के शरीर में पानी की कमी न होने दें। अगर बार-बार उल्टी या दस्त हो रही है तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। उनकी सेहत का पूरा ध्यान रखें। पानी की कमी को दूर करने के लिए ओआरएस, जिंक का घोल पिलाते रहें।
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उन्होंने बताया कि शुक्रवार को उनके पास ओपीडी में 27 बच्चे डायरिया व 24 बच्चे बुखार से पीड़ित पहुंचे। जहां दो बच्चों को बच्चा वार्ड में भर्ती किया गया। जबकि तीन बच्चे दो दिन पहले से भर्ती हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एबी सिंह ने बताया कि रोटा वायरस में बच्चों को पहले बुखार आता है और इसके बाद वह डायरिया के शिकार हो जाते हैं। यह वायरस गर्मी के मौसम में सक्रिय होता है। चिकित्सक को बिना दिखाए बच्चों को किसी भी प्रकार की दवा न दें।
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बदलते मौसम का प्रभाव सबसे अधिक बच्चों पर पड़ता है। क्यों कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इस मौसम में रोटा वायरस के संक्रमण से बच्चों को डायरिया हो जाता है। रोटा वायरस से ग्रसित बच्चे, बुखार, उल्टी, दस्त, पेट दर्द जैसी समस्या से परेशान हो जाते हैं। यह परेशानी करीब एक सप्ताह तक बनी रहती है।
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मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजीडेंट डॉ. वैभव गुप्ता ने बताया कि बच्चों के शरीर में पानी की कमी न होने दें। अगर बार-बार उल्टी या दस्त हो रही है तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। उनकी सेहत का पूरा ध्यान रखें। पानी की कमी को दूर करने के लिए ओआरएस, जिंक का घोल पिलाते रहें।
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उन्होंने बताया कि शुक्रवार को उनके पास ओपीडी में 27 बच्चे डायरिया व 24 बच्चे बुखार से पीड़ित पहुंचे। जहां दो बच्चों को बच्चा वार्ड में भर्ती किया गया। जबकि तीन बच्चे दो दिन पहले से भर्ती हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एबी सिंह ने बताया कि रोटा वायरस में बच्चों को पहले बुखार आता है और इसके बाद वह डायरिया के शिकार हो जाते हैं। यह वायरस गर्मी के मौसम में सक्रिय होता है। चिकित्सक को बिना दिखाए बच्चों को किसी भी प्रकार की दवा न दें।