{"_id":"611512da8ebc3ef39d3d10b6","slug":"august-revolution-british-courage-broke-with-salt-satyagraha-etah-news-agr503448032","type":"story","status":"publish","title_hn":"अगस्त क्रांति: नमक सत्याग्रह से तोड़ दी अंग्रेजों की हिम्मत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अगस्त क्रांति: नमक सत्याग्रह से तोड़ दी अंग्रेजों की हिम्मत
विज्ञापन
एटा। नमक सत्याग्रह के दौरान एटा के सत्याग्रही होतीलाल दास, गोपाल दत्त पाराशर, मानपाल गुप्ता सहित तमाम लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जिससे जिले में इसने बड़े आंदोलन का रूप ले लिया। सत्याग्रह की ताकत और सत्याग्रहियों की बढ़ती संख्या देख अंग्रेजों की हिम्मत टूटने लगी थी।
जवाहर लाल नेहरू डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. राकेश मधुकर बताते हैं कि कई पुस्तकों और गजट में एटा में हुए उस समय के आंदोलन की घटनाओं का जिक्र किया गया। नमक उस समय कासगंज-एटा में ही शामिल था और नमक सत्याग्रह का केंद्र रहा था। एटा के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वहां पहुंचकर रणनीति बनाते थे। आंदोलन के जरिए होतीलाल दास, गोपाल दत्त पाराशर, मानपाल गुप्ता ने बड़ा जनसमूह खड़ा कर दिया था, जो अंग्रेजों की पुरजोर खिलाफत कर रहा था। इसे देखते हुए अंग्रेज चिंतित हो उठे।
आंदोलन को कमजोर करने के लिए इन तीनों ही स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार कर लिया गया और एक साल की कैद की सजा दी गई। वह बताते हैं कि महिलाओं की भूमिका भी कम नहीं रही थी। मोहनपुर गांव की गंगादेवी पाराशर, मायादेवी, महारानी देवी, जलेसर की फूलमती, चंद्रकिशोरी, प्रेमवती गुप्ता आदि महिलाओं ने अपनी हुंकार से अंग्रेजों के पसीने छुड़ा दिए थे। नारी शक्ति ने अपने त्याग, बलिदान से राष्ट्रधर्म का पालन करने का कीर्तिमान स्थापित किया। जिसकी गवाही इतिहास हमेशा ही देता रहेगा। डॉ. मधुकर बताते हैं कि बेरहम अंग्रेजी हुकूमत ने महिलाओं के दमन में भी कोई कसर नहीं रखी। इन स्वतंत्रता सेनानियों को भी कष्ट दिए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
जवाहर लाल नेहरू डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. राकेश मधुकर बताते हैं कि कई पुस्तकों और गजट में एटा में हुए उस समय के आंदोलन की घटनाओं का जिक्र किया गया। नमक उस समय कासगंज-एटा में ही शामिल था और नमक सत्याग्रह का केंद्र रहा था। एटा के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वहां पहुंचकर रणनीति बनाते थे। आंदोलन के जरिए होतीलाल दास, गोपाल दत्त पाराशर, मानपाल गुप्ता ने बड़ा जनसमूह खड़ा कर दिया था, जो अंग्रेजों की पुरजोर खिलाफत कर रहा था। इसे देखते हुए अंग्रेज चिंतित हो उठे।
विज्ञापन
आंदोलन को कमजोर करने के लिए इन तीनों ही स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार कर लिया गया और एक साल की कैद की सजा दी गई। वह बताते हैं कि महिलाओं की भूमिका भी कम नहीं रही थी। मोहनपुर गांव की गंगादेवी पाराशर, मायादेवी, महारानी देवी, जलेसर की फूलमती, चंद्रकिशोरी, प्रेमवती गुप्ता आदि महिलाओं ने अपनी हुंकार से अंग्रेजों के पसीने छुड़ा दिए थे। नारी शक्ति ने अपने त्याग, बलिदान से राष्ट्रधर्म का पालन करने का कीर्तिमान स्थापित किया। जिसकी गवाही इतिहास हमेशा ही देता रहेगा। डॉ. मधुकर बताते हैं कि बेरहम अंग्रेजी हुकूमत ने महिलाओं के दमन में भी कोई कसर नहीं रखी। इन स्वतंत्रता सेनानियों को भी कष्ट दिए गए।
विज्ञापन