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आलू की कीमतों को भी लगा ‘झुलसा’
Amar Ujala
Updated Fri, 24 Feb 2017 11:50 PM IST
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कोल्ड स्टोरेज के बाहर आलू लेकर खड़ी ट्रैक्टर ट्राली
- फोटो : Amar Ujala
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आलू की पैदावार और भाव दोनों को इस बार ‘झुलसा’ लग गया है। खेतों में झुलसा बीमारी के हमले से उपज 20 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर कम हुई है, तो वहीं अब कीमतें गिर गई हैं। किसान खून-पसीने के कमाई माटी के मोल बेचने को मजबूर हैं। ऐसे में लागत तक निकलनी मुश्किल दिख रही है।
एटा जिले में इस बार आलू के किसान परेशान हैं। क्योंकि इस साल आलू पिछले वर्ष की आधी कीमत में भी नहीं बिक रहा है। नगरिया गांव के किसान मुकेश ने बताया आलू की फसल शुरू में अच्छी थी, लेकिन ‘झुलसा’ रोग लगने से पैदावार प्रभावित हो गई। उपज कम होने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि कीमत अच्छी मिलेगी। पर, भाव गिरने से किसानों को लागत मिलनी मुश्किल है। अमृतपुर के किसान फूल सिंह आर्य ने बताया कि इस बार 50 किलो की बोरी 125 रुपए से लेकर 200 तक बिक रही है। पिछले साल इसकी कीमत 400 रुपये थी। मंदी से बेहाल किसान अब कीमत बढ़ने की आस में इस कोल्ड स्टोर में भंडारित करने में लगे हैं।
गरीब किसान सबसे ज्यादा बेहाल
शीतगृह संचालक आलू का किराया 125 रुपए पैकेट की दर से वसूल रहे हैं। वहीं पिछले साल नोटबंदी से जिले के सैकड़ों किसानों ने आलू को कोल्डस्टोर में ही छोड़ दिया था। इससे गरीब किसान इस बार स्टोर में आलू रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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जिले में आलू की खेती का रकबा 5180 हेक्टेयर रहा है। पर, इस बार नोटबंदी के कारण बुआई भी प्रभावित रही है। वहीं मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण झुलसा बीमारी का भी प्रकोप रहा है। इससे प्रति हेक्टेयर करीब 20-25 क्विंटल पैदावार कम हुई है। पिछले साल प्रति हेक्टेयर 270 क्विंटल पैदावार हुई थी। इस बार मुश्किल से 245-250 क्विंटल उपज मिल रही है।
वीके शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी
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एटा जिले में इस बार आलू के किसान परेशान हैं। क्योंकि इस साल आलू पिछले वर्ष की आधी कीमत में भी नहीं बिक रहा है। नगरिया गांव के किसान मुकेश ने बताया आलू की फसल शुरू में अच्छी थी, लेकिन ‘झुलसा’ रोग लगने से पैदावार प्रभावित हो गई। उपज कम होने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि कीमत अच्छी मिलेगी। पर, भाव गिरने से किसानों को लागत मिलनी मुश्किल है। अमृतपुर के किसान फूल सिंह आर्य ने बताया कि इस बार 50 किलो की बोरी 125 रुपए से लेकर 200 तक बिक रही है। पिछले साल इसकी कीमत 400 रुपये थी। मंदी से बेहाल किसान अब कीमत बढ़ने की आस में इस कोल्ड स्टोर में भंडारित करने में लगे हैं।
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गरीब किसान सबसे ज्यादा बेहाल
शीतगृह संचालक आलू का किराया 125 रुपए पैकेट की दर से वसूल रहे हैं। वहीं पिछले साल नोटबंदी से जिले के सैकड़ों किसानों ने आलू को कोल्डस्टोर में ही छोड़ दिया था। इससे गरीब किसान इस बार स्टोर में आलू रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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जिले में आलू की खेती का रकबा 5180 हेक्टेयर रहा है। पर, इस बार नोटबंदी के कारण बुआई भी प्रभावित रही है। वहीं मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण झुलसा बीमारी का भी प्रकोप रहा है। इससे प्रति हेक्टेयर करीब 20-25 क्विंटल पैदावार कम हुई है। पिछले साल प्रति हेक्टेयर 270 क्विंटल पैदावार हुई थी। इस बार मुश्किल से 245-250 क्विंटल उपज मिल रही है।
वीके शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी